100 डॉलर के नीचे आया ब्रेंट क्रूड, भारत को बड़ी राहत की उम्मीद
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भारत को बड़ी राहत दी है। पिछले महीने 117 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा ब्रेंट क्रूड अब फिसलकर 97.76 डॉलर पर आ गया है। यानी कच्चे तेल की कीमतों में करीब 20 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट दर्ज की गई है। भारत जैसे देश के लिए यह खबर अहम है, जिसकी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है। कच्चा तेल सस्ता होने का सीधा मतलब है कि देश का आयात बिल घट सकता है, विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है और महंगाई के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
लेकिन सवाल यह है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता हो रहा है, तो आम आदमी को पेट्रोल-डीजल के मोर्चे पर राहत कब मिलेगी? दिलचस्प बात यह है कि जब क्रूड का भाव 117 डॉलर के पार पहुंचा था, तब भी भारतीय तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए। और अब जब कीमतें 100 डॉलर से नीचे आ गई हैं, तब भी खुदरा कीमतें जस की तस बनी हुई हैं।
7 नवंबर को दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं भोपाल में पेट्रोल 114.57 रुपये और डीजल 99.64 रुपये, जबकि जयपुर में पेट्रोल 112.69 रुपये और डीजल 97.78 रुपये प्रति लीटर है। यानी अलग-अलग राज्यों में करों और स्थानीय शुल्कों के कारण कीमतों में बड़ा अंतर बना हुआ है।
दरअसल, पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव से तय नहीं होतीं। रुपये और डॉलर की विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, माल ढुलाई, केंद्र और राज्य सरकारों के कर तथा तेल कंपनियों की कीमत नीति भी इसमें अहम भूमिका निभाती है। यही वजह है कि क्रूड सस्ता होते ही पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत कम नहीं होते।
फिलहाल कच्चे तेल की गिरावट भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे आयात बिल, चालू खाते के घाटे और महंगाई पर दबाव कम होने की संभावना है। लेकिन आम उपभोक्ता की निगाहें अब तेल कंपनियों पर हैं। बड़ा सवाल यही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सस्ते होते कच्चे तेल का फायदा आखिर कब पेट्रोल पंप तक पहुंचेगा? राहत की असली परीक्षा तभी होगी, जब क्रूड की गिरावट का असर आम आदमी की जेब पर भी दिखाई देगा।