धनतेरस पर बाजारों में रौनक, शुभ मुहूर्त में खरीदारी का उत्साह। सोना-चांदी से लेकर बर्तन और झाड़ू तक, हर खरीदारी के पीछे छिपी है सुख-समृद्धि की मान्यता।
आज 6 नवंबर को देशभर में धनतेरस का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत करने वाला यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ खरीदारी के लिहाज से भी बेहद खास है। मान्यता है कि धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आती हैं। इस बार धनतेरस पर शुक्र प्रदोष का संयोग और शुक्र के तुला राशि में होने से मालव्य राजयोग की स्थिति को भी ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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धनतेरस का महामुहूर्त, खरीदारी का शुभ वक्त
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अभिजीत बेला में बरसेगी समृद्धि
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सोने-चांदी की चमक, धनतेरस की धमक
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शुभ मुहूर्त में खरीदारी, घर आए खुशहाली
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धनतेरस पर धन और आरोग्य का संगम
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बाजार सजे, शुभ घड़ी का इंतजार
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धनतेरस की खरीदारी, समृद्धि की तैयारी
खरीदारी का पहला शुभ मुहूर्त बीत चुका है और अब नजरें दूसरे बड़े मुहूर्त यानी अभिजीत मुहूर्त पर टिकी हैं। 6 नवंबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। करीब एक घंटा आठ मिनट की इस अवधि में लोग सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और दूसरी उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं। इसके बाद शाम को प्रदोष काल का शुभ समय शाम 5 बजकर 49 मिनट से रात 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इस दौरान खरीदारी के साथ भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना भी की जा सकती है।
धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा सबसे ज्यादा प्रचलित है। सोने को वैभव और चांदी को शीतलता तथा समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन सराफा बाजारों में सिक्कों, आभूषणों और लक्ष्मी-गणेश की चांदी की प्रतिमाओं की मांग बढ़ जाती है। हालांकि बदलते दौर में लोग अपने बजट के अनुसार छोटी खरीदारी को भी शुभ मान रहे हैं।
बर्तनों की खरीदारी का संबंध सीधे भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य से जोड़ा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण धनतेरस पर पीतल, तांबे और अन्य धातुओं के बर्तन खरीदने की परंपरा विकसित हुई। इसके अलावा मिट्टी के दीये खरीदना, नई झाड़ू घर लाना और साबुत धनिया खरीदना भी कई परिवारों की परंपराओं का हिस्सा है। झाड़ू को स्वच्छता और मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है, जबकि साबुत धनिया को उन्नति और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
धनतेरस का एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी है कि शुभ खरीदारी का मतलब महंगी वस्तु खरीदना नहीं है। अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार छोटी से छोटी खरीदारी भी इस पर्व की परंपरा का हिस्सा बन सकती है। धार्मिक आस्था के साथ विवेकपूर्ण खर्च और बचत का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।
कुल मिलाकर, धनतेरस केवल बाजार से सामान घर लाने का पर्व नहीं, बल्कि जीवन में धन, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सकारात्मकता का स्वागत करने का अवसर है। अभिजीत मुहूर्त से लेकर प्रदोष काल तक खरीदारी और पूजा की तैयारियां रहेंगी। सोना-चांदी की चमक के बीच हर घर की एक ही कामना है- मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहे, भगवान धन्वंतरि आरोग्य दें और परिवार में सुख-समृद्धि का वास हो।