अक्तूबर 2026 को चीन के आधुनिकीकरण के सफर में एक ऐतिहासिक महीने के
तौर पर याद किया जाएगा। इस एक ही महीने में तीन बड़ी ऐतिहासिक घटनाएं
एक साथ हो रही हैं — चीन लोक गणराज्य स्थापना की 77वीं वर्षगांठ, चीनी
मजदूर-किसान लाल सेना के महान लांग मार्च की जीत की 90वीं वर्षगांठ, और
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की 20वीं केंद्रीय समिति का पांचवां
पूर्णाधिवेशन। यह महत्वपूर्ण राजनीतिक अधिवेशन 26 से 29 अक्तूबर तक
पेइचिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में आयोजित हो रहा है और इसने चीन के
विकास की अंतर्निहित बुनियादों की ओर दुनियाभर का ध्यान आकर्षित किया है।
पांचवां पूर्णाधिवेशन क्या है और क्यों है अहम?
1978 में सुधार और खुली द्वार नीति के बाद से सीपीसी की हर केंद्रीय समिति
अपने पांच साल के कार्यकाल में सात पूर्णाधिवेशन आयोजित करती है। आमतौर
पर पांचवें अधिवेशन का फोकस आर्थिक एजेंडे पर होता था, लेकिन इस बार
स्थिति अलग है। 15वीं पंचवर्षीय योजना की समीक्षा चौथे पूर्णाधिवेशन में पूरी हो
चुकी है, इसलिए 20वीं केंद्रीय समिति के इस पांचवें पूर्णाधिवेशन का एजेंडा पूरी
तरह एक ही विषय पर केंद्रित है, पार्टी का व्यापक और कठोर प्रबंधन।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह अधिवेशन चीन की विकास रणनीति और
समाजवादी आधुनिकीकरण का मार्ग समझने की खिड़की है।
आत्म-सुधार: एक विशिष्ट शासन मॉडल
वैश्विक मंदी और भू-राजनीतिक टकरावों के बीच 20वीं केंद्रीय समिति का यह
पूर्णाधिवेशन एक अहम सवाल का जवाब दे रहा है — सौ साल पुरानी पार्टी अपनी
जीवन-शक्ति कैसे बनाए रखती है। पार्टी का यह आत्म-सुधार चीनी
आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाने और 15वीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्यों को हासिल
करने की बुनियादी राजनीतिक गारंटी है। चूंकि दुनिया स्थिर विकास का रास्ता
तलाश रही है, चीन का यह आंतरिक शासन-प्रयोग अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए
विशेष महत्व रखता है।
पार्टी की अनुशासन व्यवस्था और भ्रष्टाचार विरोधी तंत्र निर्णायक भूमिका निभा
रहे हैं, जिससे आत्म-सुधार केवल घोषणा तक सीमित न रहकर व्यवहार में उतर
रहा है। यह पूर्णाधिवेशन इस बात पर जोर देता है कि पार्टी को निरंतर आगे बढ़ाते
रहना ही है — उसे सदैव युग की अग्रणी पंक्ति में खड़ा, जनता के हृदय में बसा, हर
तरह की परीक्षाओं में खरा उतरने वाला और जीवंत मार्क्सवादी सत्तारूढ़ दल बनाए
रखना है। 15वीं पंचवर्षीय योजना की तैयारी के साथ-साथ पार्टी निर्माण को भी
उसी गंभीरता से आगे बढ़ाया जा रहा है। यही इस शासन मॉडल की सबसे बड़ी
विशेषता और विश्वसनीयता का आधार है।
कठोर प्रबंधन की अनिवार्यता: इतिहास में निहित आत्म-सुधार का तर्क
समाजवादी आधुनिक देश के निर्माण और चीनी राष्ट्र के महान पुनर्जागरण को
आगे बढ़ाने की कुंजी पार्टी में है, इसीलिए इस महत्वपूर्ण मोड़ पर कठोर पार्टी-
प्रबंधन पर मंथन अत्यंत महत्वपूर्ण है। दृढ़ विश्वास और निरंतर संघर्ष के लिए
कठोर प्रबंधन को लगातार आगे बढ़ाना होगा।
इस साल 22 अक्तूबर को लाल सेना के लांग मार्च की जीत के 90 साल पूरे हुए।
लांग मार्च की बात हो तो चुनई बैठक (Zunyi Conference) का जिक्र जरूरी है, जो
पार्टी के इतिहास में जीवन-मरण का मोड़ थी। महासचिव शी चिनफिंग ने कहा है
कि लांग मार्च की जीत का मार्ग पार्टी के सही नेतृत्व से ही निकला था। छोटी सी
लाल नाव से विशाल जहाज तक (From a small red boat to a towering giant
vessel) का यह सफर बताता है कि पार्टी को एक महान परियोजना के रूप में
बनाना ही देश और पार्टी को मजबूत बनाने का मूलमंत्र है।
पूर्णाधिवेशन का आगाज: कठोर प्रबंधन के नए खाके पर मंथन
26 अक्तूबर को 20वीं केंद्रीय समिति के पांचवें पूर्णाधिवेशन के शुभारंभ पर,
महासचिव शी चिनफिंग ने राजनीतिक ब्यूरो की ओर से कार्य रिपोर्ट प्रस्तुत की ।
18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद से आत्म-क्रांति के जरिए सदी पुरानी पार्टी ने जो नया
आयाम खोला है, उसी ने देश के ऐतिहासिक परिवर्तन की नींव रखी है।
निष्कर्ष: सुशासन ही आधुनिकीकरण की कुंजी
संपूर्ण और कठोर पार्टी स्व-शासन का एक व्यापक उद्देश्य है। यह चीन के
आधुनिकीकरण अभियान का नेतृत्व करने की पार्टी की क्षमता को मजबूत करना
है। चीन 2035 तक बुनियादी आधुनिकीकरण के लक्ष्य को हासिल करने के
निर्णायक दौर में है, जहां बाहर अनिश्चितता बढ़ रही है और भीतर चुनौतियां भी
कम नहीं हैं। ऐसे निर्णायक मोड़ पर मजबूत पार्टी नेतृत्व ही देश की दिशा तय
करता है।
इस अर्थ में 20वीं केंद्रीय समिति का पांचवां पूर्णाधिवेशन केवल आंतरिक पार्टी
मामला नहीं है। यह सख्त अनुशासन को बनाए रखने, पार्टी शासन को अधिक
सुसंगत बनाने और सीपीसी को एक ऐसी मार्क्सवादी सत्तारूढ़ शक्ति के रूप में
गढ़ने से जुड़ा है जो समय के साथ अग्रिम मोर्चे पर रहे, जनता का समर्थन पाए
और हर तरह की परीक्षा में खरी उतरे।
शासन के दृष्टिकोण से ;देश ही जनता है और जनता ही देश है। देश चलाने का
अंतिम लक्ष्य जनता के जीवन को बेहतर बनाना है और इसके लिए प्रशासनिक
क्षमता, अनुशासन तथा अपनी गलतियों को सुधार कर नई परिस्थितियों के
अनुरूप ढलने की योग्यता चाहिए। पूर्णाधिवेशन का महत्व यहीं निहित है।
चीन अपनी विकास योजनाओं को कैसे आगे बढ़ाता है, बाहरी दुनिया के साथ
खुलेपन और औद्योगिक सहयोग में वह कौन सी नीतियां अपनाएगा और
ग्लोबल साउथ इससे क्या सीख सकता है, कौन से अनुभव आत्मसात करने योग्य
हैं, इन सभी सवालों का उत्तर एक ही है। सुशासन ही आधुनिकीकरण की कुंजी है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— रविशंकर बसु)