दिल्ली में पिछले दिनों हुई तेज बारिश ने मौसम के साथ-साथ राजनीतिक हलचल भी बढ़ा दी है। रामलीला मैदान में पानी भरने और जमीन गीली होने के कारण अब सबकी नजर 1 नवंबर को होने वाली कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की महारैली पर है। यह आयोजन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के विरोध में किया जा रहा है। हालांकि, बारिश के कारण रैली टलने की आशंका के बीच 31 अक्टूबर तक उपलब्ध रिपोर्टों में आयोजकों ने कार्यक्रम रद्द करने की घोषणा नहीं की है। कांग्रेस ने बड़े स्तर पर तैयारियां की हैं। पार्टी का दावा है कि देशभर से करीब 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में सवाल है कि मैदान की स्थिति सुधारने, कार्यकर्ताओं को दिल्ली लाने और गठबंधन के नेताओं की भागीदारी के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं?
रामलीला मैदान में बारिश का पानी बना चुनौती, लेकिन 1 नवंबर की रैली को लेकर तैयारी जारी
बारिश के बाद रामलीला मैदान में पानी जमा होने की तस्वीरें सामने आई हैं। मैदान को कार्यक्रम के लिए तैयार करना आयोजकों के सामने बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद 31 अक्टूबर तक मिली खबरों में रैली स्थगित होने की पुष्टि नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस ने भी स्पष्ट किया है कि 1 नवंबर के आयोजन की अनुमति वापस नहीं ली गई है। पुलिस की ओर से 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक मैदान के इस्तेमाल के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किया गया है। रैली का निर्धारित समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बताया गया है।
20 समितियों को सौंपी गई अलग-अलग जिम्मेदारी, मैदान से लेकर मंच और प्रचार तक की व्यवस्था
रैली को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराने के लिए दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने 20 समितियों का गठन किया है। इन समितियों को आयोजन स्थल की व्यवस्था, मंच तैयार कराने, आवास, साफ-सफाई और सोशल मीडिया प्रचार जैसे काम सौंपे गए हैं। पार्टी के सामने बड़ी संख्या में आने वाले लोगों के बैठने, पेयजल, शौचालय और प्रवेश-निकास का प्रबंध करने की जिम्मेदारी भी है। दिल्ली पुलिस ने आयोजकों को सीसीटीवी कैमरे, निगरानी व्यवस्था और पर्याप्त स्वयंसेवक तैनात करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए मैदान को 14 जोन में बांटने की योजना बनाई है।
10 लाख लोगों को जुटाने का दावा, 500 बसों से दिल्ली में समर्थकों को लाने की योजना
कांग्रेस की ओर से देशभर से करीब 10 लाख लोगों की भागीदारी का लक्ष्य बताया गया है। वहीं, दिल्ली में समर्थकों को जुटाने के लिए करीब 50 हजार लोगों और लगभग 500 बसों की व्यवस्था की योजना की भी रिपोर्ट सामने आई है। इन दोनों आंकड़ों का दायरा अलग-अलग बताया गया है—10 लाख का आंकड़ा देशव्यापी भागीदारी के लक्ष्य से जुड़ा है, जबकि 50 हजार और 500 बसों का उल्लेख दिल्ली में जुटान की तैयारी के संदर्भ में है। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी करीब 25 हजार कार्यकर्ताओं को दिल्ली भेजने का लक्ष्य रखा है। पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए सड़क और रेल मार्ग से पहुंचने की व्यवस्था की जा रही है।
SIR के विरोध में विपक्ष का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, इंडिया गठबंधन के करीब 20 दलों की भागीदारी की तैयारी
इस रैली का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं का विरोध है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठा रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गठबंधन के करीब 20 विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों की भागीदारी की तैयारी है। रैली में अलग-अलग दलों के नेताओं को संबोधित करने का मौका दिया जा सकता है और कार्यक्रम के लिए करीब 40 वक्ताओं की योजना की भी खबर सामने आई है। हालांकि, सभी दलों के नाम और अंतिम प्रतिनिधियों की सूची की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
सुरक्षा के लिए हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती, बारिश के बाद मैदान तैयार करना सबसे अहम चुनौती
रैली में बड़ी भीड़ आने की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा का विस्तृत इंतजाम किया है। पहले जारी जानकारी के मुताबिक, करीब 3,500 पुलिसकर्मियों की तैनाती, 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी और 14 जोन में भीड़ प्रबंधन की योजना बनाई गई थी। आयोजकों को प्रवेश और निकास द्वारों पर कैमरे लगाने, पानी के टैंकर, शौचालय और पर्याप्त स्वयंसेवकों की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अब बारिश के बाद मैदान से पानी निकालने, जमीन को कार्यक्रम के योग्य बनाने और लोगों के सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना होगा। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मौसम और मैदान की स्थिति के बीच कांग्रेस तय समय पर इतनी बड़ी रैली आयोजित कर पाती है या नहीं