जापान के TBS टेलीविज़न के अध्यक्ष मासामिने र्यूहो ने लोकप्रिय धारावाहिक विवांत
(VIVANT) के दूसरे सीज़न में चीन को बदनाम करने के आरोपों को जायज़ ठहराने की कोशिश
की है। इसके लिए उन्होंने पूरी तरह काल्पनिक और किसी ख़ास देश को नीचा दिखाने का
इरादा नहीं जैसी दलीलें दीं, लेकिन इससे जापान और विदेशों में आलोचना और तेज़ हो गई।
धारावाहिक में सीधे चीन का नाम लिया गया है। ऐसे में इसे काल्पनिक बताकर बहाने
बनाना बिल्कुल टिकाऊ नहीं है।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सैन्यवाद ने चीन पर हमला किया और मानवता-
विरोधी अत्याचार किए। यह धारावाहिक न सिर्फ़ तथाकथित चीनी गुप्त खुफ़िया संगठन की
साज़िश रचता है, बल्कि चीन पर हमला करने वाली जापानी सेना के यातना देने के तरीक़ों को
भी चीनियों पर थोप देता है। उंगलियां काटना और पेट में छुरा घोंपना जैसे तरीक़े इसी में
शामिल हैं। इस तरह अपराधी और पीड़ित का इतिहास ही उलट दिया जाता है। यह कल्पना
नहीं, बल्कि झूठा आरोप है।
पहले सीज़न में खलनायक को एक काल्पनिक देश का नाम दिया गया था, जबकि दूसरे सीज़न
में सीधे असली देश का नाम इस्तेमाल किया गया। यह चीन को खुलकर बदनाम करने और
उकसाने की कोशिश है, जो जापानी दक्षिणपंथियों की चीन-विरोधी संज्ञानात्मक युद्ध की
शर्मनाक रणनीति को उजागर करती है।
TBS की पृष्ठभूमि देखें, तो वह जापानी सरकार की विदेश-नैरेटिव रणनीति से गहराई से जुड़ा
नज़र आता है। जापान के विदेश मंत्रालय ने 2015 से विदेशी रणनीतिक सूचना प्रसार के
नाम पर चीन के ख़िलाफ़ प्रचार पर 56 अरब येन से ज़्यादा ख़र्च किया है। इस धारावाहिक के
पीछे भी एक संगठित और भारी निवेश वाली उत्पादन-प्रसार श्रृंखला मौजूद है। निर्माण के स्तर
पर प्राइम टाइम स्लॉट में हर एपिसोड पर लगभग 10 करोड़ येन लगाए गए हैं। व्यावसायिक
स्तर पर कई बड़ी कंपनियों का सहयोग रहा है। सैनरियो कंपनी ने इससे जुड़े संयुक्त उत्पाद
जारी किए और कड़ी आलोचना के बाद ही माफ़ी मांगकर सहयोग रद्द किया। प्रसार के स्तर
पर देखें तो इसके दो मुख्य कलाकार NHK के कोहाकू गायन प्रतियोगिता के सूत्रधार बनने
वाले हैं।
राजनीतिक स्तर पर जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची सानाए ने ख़ुद इस धारावाहिक की तारीफ़
की और कहा कि वह इसे एक बार में पूरा देखना चाहती हैं। इसी वजह से नेटिज़न्स इसे
ताकाइची समर्थक धारावाहिक कहने लगे हैं। जापानी लेखक यामाज़ाकी मासाहिरो ने
मुख्यधारा मीडिया की आलोचना की है। उनका कहना है कि मीडिया राजनेताओं के साथ
मिलकर चीन-विरोधी प्रचार के ज़रिये लोगों का दिमाग़ धो रहा है। फ़िल्म समीक्षक माचियामा
तोमोहिरो के मुताबिक़ धारावाहिक का कोई वास्तविक आधार नहीं है। उन्होंने इसे पूरी तरह
मनगढ़ंत बताया और कहा कि इसका मक़सद नफ़रत भड़काना है।
फ़िल्मों और धारावाहिकों के ज़रिये चीन को बदनाम करना जापानी दक्षिणपंथियों के
ऐतिहासिक संशोधनवाद को आगे बढ़ाने की कोशिशों का ही एक हिस्सा है। पाठ्यपुस्तकों से
छेड़छाड़ से लेकर AI से नक़ली वीडियो बनाने तक और यासुकुनी मंदिर में पूजा से लेकर बड़े
भाषा मॉडलों में ज़हर घोलने तक, जापानी दक्षिणपंथी इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने में और
तेज़ी दिखा रहे हैं।
जापानी सरकार ने 4.4 अरब येन ख़र्च कर सरकारी AI मॉडल "GenAI& विकसित किया है।
इसके डेटा संग्रह की शुरुआत मई 1947 से तय की गई है, यानी उस समय से जब जापान का
शांति संविधान लागू हुआ था। आरोप है कि ऐसा ऐतिहासिक सफ़ाई के लिए किया गया है।
इसी बीच जापान के पूर्व प्रधानमंत्री इशिबा शिगेरू ने कहा है कि चीन का जापान पर आक्रमण
जैसा कुछ नहीं हुआ, बल्कि युद्ध की शुरुआत जापान ने की थी। वहीं रूसी विदेश मंत्रालय की
प्रवक्ता ज़खारोवा ने चेतावनी दी है कि अगर जापान ऐसी झूठी गतिविधियां जारी रखता है, तो
रूस उचित क़दम उठाएगा।
इसके पीछे एक और गहरा मक़सद पुनः सैन्यीकरण की राह तैयार करना है। विवांत का चीनी
अनुवाद बेबनकाल्पनिक नहीं है, क्योंकि जापानी थलीय आत्मरक्षा बल में वाक़ई एक गुप्त
खुफ़िया इकाई मौजूद है। TBS उसे धैर्यवान और देश की रक्षा करने वाले नायक के रूप में पेश
कर रहा है। इसके ज़रिये वह देश के भीतर युद्ध-विरोधी भावनाओं को कमज़ोर करना और
आत्मरक्षा बलों के विदेशी युद्ध अभियान के लिए सामाजिक-मनोवैज्ञानिक ज़मीन तैयार
करना चाहता है।
साल 2026 के रक्षा श्वेतपत्र में चीन को सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौत बताया गया है। रक्षा
बजट लगातार 14 साल से बढ़ रहा है और 2026 के वित्त वर्ष में 90 खरब येन से ज़्यादा हो गया
है। इन सबके बीच जापान का नया सैन्यवादऔर संज्ञानात्मक युद्ध एक-दूसरे को सहारा दे
रहे हैं और क्षेत्रीय तथा वैश्विक शांति के लिए वास्तविक ख़तरा पैदा कर रहे हैं।
इतिहास को बदला नहीं जा सकता और युद्ध के बाद की व्यवस्था को चुनौती नहीं दी जा
सकती। TBS को अब बहाने बनाकर ग़लती छिपाने के बजाय इतिहास का सामना करना
चाहिए। उसे ईमानदारी से पछतावा जताना चाहिए, संबंधित धारावाहिक का प्रसारण बंद करना
चाहिए और चीनी जनता से माफ़ी मांगनी चाहिए। आक्रमण के अपराधों को सही ठहराने की
कोई भी कोशिश निश्चित रूप से नाकाम होगी।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)