उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक फेरबदल करते हुए दलित चेहरे राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का नया प्रभारी नियुक्त किया है। वे अविनाश पांडे की जगह यह जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके साथ ही पार्टी ने हरियाणा में संजय दत्त और ओडिशा में लालजी देसाई को नया प्रभारी बनाया है। वहीं युवा नेता श्रीनिवास बीवी को कांग्रेस सेवा दल की कमान सौंपी गई है।
- यूपी में कांग्रेस का बड़ा संगठनात्मक बदलाव
- राजेंद्र पाल गौतम बने नए प्रभारी
- दलित वोट बैंक साधने की रणनीति
- हरियाणा-ओडिशा में भी बदले प्रभारी
- सेवा दल की कमान श्रीनिवास बीवी को
यूपी में दलित समीकरण पर बड़ा दांव
राजेंद्र पाल गौतम का कांग्रेस में शामिल हुए अभी दो वर्ष ही हुए हैं, लेकिन इस दौरान पार्टी नेतृत्व का उन पर भरोसा लगातार बढ़ा है। पहले उन्हें अनुसूचित जाति विभाग का अध्यक्ष बनाया गया और अब उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्य की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। माना जा रहा है कि कांग्रेस दलित वोट बैंक में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
क्या है राहुल गांधी की रणनीति?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि उत्तर प्रदेश में बदलते दलित राजनीतिक समीकरणों के बीच पार्टी अपने लिए नई संभावनाएं तलाशना चाहती है। इसी वजह से राजेंद्र पाल गौतम को अहम जिम्मेदारी दी गई है। हाल के महीनों में उनके बहुजन राजनीति से जुड़े कई राजनीतिक संदेश भी चर्चा में रहे हैं।
सपा गठबंधन पर भी रहेगी नजर
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में है। ऐसे में नए प्रभारी के सामने संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ सीट बंटवारे और चुनावी तालमेल को बेहतर बनाने की भी बड़ी चुनौती होगी। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में कांग्रेस अब अगड़ा-दलित सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश करेगी।
हरियाणा और ओडिशा में भी बदलाव
कांग्रेस ने संगठनात्मक बदलाव के तहत हरियाणा प्रभारी बीके हरिप्रसाद को जिम्मेदारी से मुक्त करते हुए संजय दत्त को नया प्रभारी नियुक्त किया है। वहीं ओडिशा में अजय कुमार लल्लू की जगह लालजी देसाई को जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी को कांग्रेस सेवा दल का राष्ट्रीय प्रमुख बनाया गया है।
2027 चुनाव की तैयारी तेज
कांग्रेस के इस फेरबदल को सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी सामाजिक समीकरणों को साधने, संगठन को मजबूत करने और विपक्षी दलों के बीच अपनी राजनीतिक जमीन वापस हासिल करने की रणनीति पर काम करती नजर आ रही है।उत्तर प्रदेश में राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति कांग्रेस की नई राजनीतिक रणनीति का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि क्या यह बदलाव कांग्रेस को दलित वोट बैंक में नई ताकत दिला पाएगा और क्या पार्टी 2027 के चुनाव से पहले अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस हासिल कर सकेगी। ( प्रकाश कुमार पाण्डेय)