Climate Change Update: जलवायु परिवर्तन का असर अब नींद पर भी, वाराणसी में हर साल 73 घंटे कम सो रहे लोग; स्वास्थ्य पर बढ़ा खतरा

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब केवल तापमान और मौसम तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर लोगों की दिनचर्या, स्वास्थ्य और नींद पर भी साफ दिखाई देने लगा है। एक वैश्विक अध्ययन में सामने आया है कि उत्तर प्रदेश के कई शहरों में रहने वाले लोग हर साल दर्जनों घंटे कम सो पा रहे हैं। सबसे अधिक असर वाराणसी के लोगों पर देखा गया है, जहां औसतन 73 घंटे की नींद हर साल कम हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती गर्मी, उमस और मौसम के बदलते पैटर्न के कारण लोगों की नींद प्रभावित हो रही है, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।

वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर में सबसे ज्यादा कम हुई नींद, रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े

वैश्विक शोध संस्था क्लाइमेट सेंट्रल ने भारत समेत दुनिया के 1,338 शहरों का अध्ययन किया। वर्ष 2020 से 2025 के आंकड़ों के विश्लेषण में उत्तर प्रदेश के कई शहरों में नींद के घंटों में लगातार गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी पहले, प्रयागराज दूसरे और गोरखपुर तीसरे स्थान पर हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण रात के समय शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पा रहा है।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में प्रतिवर्ष नींद की कमी

शहर प्रतिवर्ष नींद में कमी (घंटे)
मेरठ 65
मुरादाबाद 66
बरेली 67
अलीगढ़ 68
आगरा 69
कानपुर 70
लखनऊ 70
गोरखपुर 71
प्रयागराज 72
वाराणसी 73

कम नींद से बढ़ सकता है वजन, हृदय रोग और मधुमेह का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लगातार कम नींद लेने का असर शरीर के मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि यदि कोई व्यक्ति लगातार छह सप्ताह तक हर रात करीब 80 मिनट कम सोता है, तो उसका वजन लगभग 450 ग्राम तक बढ़ सकता है। इसके अलावा उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। पर्याप्त नींद शरीर की रिकवरी और मानसिक संतुलन के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है।

नींद पूरी न होने से याददाश्त और कार्यक्षमता पर पड़ रहा सीधा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कम सोने से केवल थकान ही नहीं होती, बल्कि मस्तिष्क की कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है। एकाग्रता में कमी, निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होना, याददाश्त पर असर और रोग प्रतिरोधक क्षमता का घट जाना जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। वयस्कों के लिए प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद आवश्यक मानी जाती है।

इन आसान उपायों से बेहतर हो सकती है आपकी नींद की गुणवत्ता

अच्छी नींद के लिए रोजाना एक निश्चित समय पर सोने और उठने की आदत बनाएं। सोने से एक-दो घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी जैसी स्क्रीन से दूरी रखें। शाम के बाद चाय, कॉफी और निकोटीन का सेवन कम करें तथा नियमित व्यायाम करें, लेकिन सोने से ठीक पहले नहीं। यदि दो से तीन सप्ताह तक लगातार नींद की समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

 

 

 

 

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