देशभर में परीक्षा प्रणाली को लेकर चल रहे विरोध के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी प्रमुख मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में संगठन के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल रहे। दोनों नेताओं ने करीब दस मिनट तक नड्डा से चर्चा की और कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए। बैठक के बाद भी संगठन ने स्पष्ट किया कि उनकी प्रमुख मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
जेपी नड्डा के साथ बैठक में शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक का मुद्दा प्रमुख रहा
बैठक के बाद CJP की ओर से बताया गया कि केंद्रीय मंत्री को लिखित मांग पत्र सौंपा गया है। संगठन का कहना है कि हाल के वर्षों में विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार मंत्री ने उनकी बात सुनी और भरोसा दिलाया कि मामले पर उचित स्तर पर चर्चा की जाएगी। हालांकि किसी प्रकार का अंतिम आश्वासन या निर्णय फिलहाल सामने नहीं आया है।
सोशल मीडिया पर साझा किया मांग पत्र, शिक्षा मंत्री की जवाबदेही पर उठाए सवाल
बैठक के बाद CJP ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मांग पत्र की प्रति भी साझा की। संगठन ने आरोप लगाया कि NEET-UG 2026, परीक्षा प्रबंधन से जुड़े विवाद, CBSE पोर्टल की तकनीकी समस्याएं और CUET परीक्षा में देरी जैसे मामलों में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इसी आधार पर संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।
संगठन ने सरकार के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें
CJP ने अपने ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। दूसरी, सोनम वांगचुक की रिहाई। तीसरी, NEET पेपर लीक से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। संगठन का कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच आंदोलन पर सबकी नजर
दिल्ली में जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश भी की थी, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका। CJP का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचा रहे हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इन मांगों पर आगे क्या रुख अपनाती है।