CIFTIS 2026: ‘मेड इन चाइना’ से आगे, वैश्विक सेवा व्यापार में नई पहचान गढ़ता चीन

चीन की राजधानी पेइचिंग में 9 सितंबर को जब चीन अंतरराष्ट्रीय सेवा व्यापार मेला यानी CIFTIS
शुरू होगा, तो शौकांग पार्क में पांच दिनों तक होने वाला यह आयोजन दुनिया को चीन की
अर्थव्यवस्था का एक ऐसा चेहरा दिखाएगा जो पारंपरिक “Made in China” की पहचान से कहीं
आगे जाता है। विनिर्माण और वस्तु निर्यात में दशकों से वैश्विक शक्ति रहा चीन अब डिजिटल
सेवाओं, वित्त, स्वास्थ्य, बौद्धिक संपदा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पेशेवर सेवाओं में भी अपनी
अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी तेजी से बढ़ा रहा है।

9 से 13 सितंबर तक होने वाला 13वां CIFTIS नार्वे इस बार अतिथि देश है। अगस्त तक करीब 70
देशों, क्षेत्रों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने प्रदर्शनियों या कार्यक्रमों में भागीदारी की पुष्टि कर दी थी।
नौ विशेष प्रदर्शनियों में 740 से अधिक कंपनियों और संस्थानों ने प्रत्यक्ष भागीदारी में रुचि दिखाई
थी, जिनमें 300 से अधिक Fortune Global 500 या अपने क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियां थीं।
इस बार सबसे दिलचस्प बदलाव चीनी कंपनियों के वैश्विक विस्तार को संस्थागत सहायता देने की
कोशिश है। CIFTIS पहली बार विदेश विस्तार सेवाओं के लिए विशेष क्षेत्र ला रहा है, जहां वित्त,
कानून, लेखा, विज्ञापन और मानव संसाधन से जुड़ी 30 से अधिक पेशेवर संस्थाएं कंपनियों को
विदेशी बाजारों में प्रवेश से जुड़ी सहायता देंगी। करीब 40 विदेश विस्तार रोडशो भी प्रस्तावित हैं।
दुनिया के व्यापार में सेवाओं की बढ़ती ताकत

CIFTIS का महत्व उस व्यापक वैश्विक बदलाव से जुड़ा है जिसमें सेवाएं अंतरराष्ट्रीय व्यापार की
सबसे तेजी से बढ़ने वाली धाराओं में शामिल हो गई हैं। UNCTAD के जुलाई 2026 के आंकड़ों के
अनुसार चीन 2025 में 508 अरब डॉलर के सेवा निर्यात के साथ दुनिया में पांचवें स्थान पर और
विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में पहले स्थान पर रहा। सेवा आयात में चीन 624 अरब डॉलर के साथ
अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर था।

UNCTAD के अनुसार दूरसंचार, कंप्यूटर और सूचना सेवाओं का वैश्विक निर्यात 2025 में लगातार
तीसरे वर्ष 11 प्रतिशत से अधिक बढ़ा। वित्तीय, बीमा और अन्य कारोबारी सेवाओं में भी 9.3

प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह रुझान उस वैश्विक अर्थव्यवस्था की ओर इशारा करता है जिसमें
डिजिटल रूप से उपलब्ध कराई जा सकने वाली सेवाओं का महत्व तेजी से बढ़ रहा है।
चीन इस बदलाव में केवल भाग नहीं ले रहा, बल्कि अपनी जगह तेजी से मजबूत कर रहा है। चीन
के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार 2026 की पहली छमाही में देश का सेवा आयात और निर्यात 8.3
प्रतिशत बढ़कर 3.77975 लाख करोड़ युआन पहुंच गया। सेवा निर्यात 17.6 प्रतिशत बढ़ा। ज्ञान
आधारित सेवाओं का निर्यात 12.8 प्रतिशत बढ़कर 805.67 अरब युआन हो गया और कुल सेवा
निर्यात में उसकी हिस्सेदारी 53.5 प्रतिशत रही। बौद्धिक संपदा उपयोग शुल्क के निर्यात में 44.3
प्रतिशत और व्यक्तिगत सांस्कृतिक एवं मनोरंजन सेवाओं में 57.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
SCMP ने देखा चीन के निर्यात ढांचे में बदलाव

South China Morning Post ने मई में चीन के निर्यात में हो रहे संरचनात्मक बदलाव को
रेखांकित करते हुए लिखा कि जिस देश की वैश्विक व्यापार पहचान लंबे समय तक जूते, बैग और
फर्नीचर जैसे सामानों से जुड़ी रही, वह अब तेजी से तकनीक और उच्च मूल्य वाली सेवाओं की ओर
बढ़ रहा है।

चीन विनिर्माण को छोड़कर सेवाओं की ओर नहीं जा रहा। वह अपने औद्योगिक आधार के ऊपर
डिजिटल तकनीक, डिजाइन, डेटा, अनुसंधान, वित्त और बौद्धिक संपदा की नई परत जोड़ रहा है।
WIPO की भागीदारी क्यों महत्वपूर्ण है

WIPO का पहली बार CIFTIS के सह-आयोजकों में शामिल होना इसी बदलाव का संकेत है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा अब केवल इस बात से तय नहीं होती कि कौन अधिक सस्ता या
अधिक मात्रा में उत्पादन कर सकता है। पेटेंट, औद्योगिक डिजाइन, सॉफ्टवेयर, ब्रांड और तकनीकी
ज्ञान भी कंपनियों की वैश्विक ताकत तय करते हैं।

चीनी कंपनियों के लिए विदेश विस्तार सेवा क्षेत्र इसी जरूरत को संबोधित करता है। वित्तीय
संस्थानों से लेकर कानूनी और बौद्धिक संपदा विशेषज्ञों तक एक ही मंच पर सहायता उपलब्ध
कराने का उद्देश्य कंपनियों, विशेषकर छोटे और मझोले उद्यमों, के लिए विदेशी बाजारों में प्रवेश
को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

180 से अधिक नए परिणाम
CIFTIS में नवाचार भी एक बड़ा केंद्र रहेगा। अगस्त में पेइचिंग सरकार ने बताया कि Alibaba,
Schneider Electric, GE HealthCare और MSD सहित 80 से अधिक कंपनियां तथा संस्थाएं
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वास्थ्य, सांस्कृतिक निर्यात और हरित विकास से जुड़े 180 से अधिक नए
परिणाम प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही हैं।

शौकांग पार्क का पुनर्विकास भी प्रतीकात्मक है। कभी भारी इस्पात उद्योग की पहचान रहा यह क्षेत्र
अब अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, कारोबारी वार्ताओं, तकनीकी प्रदर्शनियों और उत्पाद प्रस्तुतियों के लिए
स्थायी वैश्विक मंच में बदल चुका है। आयोजन से पहले यहां प्रदर्शनी और सम्मेलन सुविधाओं का
विस्तार भी पूरा किया गया है।

इस बदलाव में चीन की व्यापक आर्थिक रणनीति पढ़ी जा सकती है। उद्योग उसकी ताकत बना
रहेगा, लेकिन भविष्य की प्रतिस्पर्धा उद्योग और सेवाओं के मेल से तय होगी।
CIFTIS 2026 की बड़ी कहानी

दुनिया ने चीन को लंबे समय तक “मेड इन चाइना” के जरिए जाना। अब बढ़ता सेवा निर्यात, ज्ञान
आधारित सेवाओं का विस्तार, बौद्धिक संपदा पर जोर और चीनी कंपनियों के वैश्विक विस्तार के
लिए नई संस्थागत व्यवस्था संकेत दे रही है कि “चीन से सेवाएं” भी वैश्विक व्यापार में एक अधिक
मजबूत पहचान बनाने की दिशा में बढ़ रही हैं।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक: नीरज बाली)

 

 

 

 

 

 

 

 

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