चीन के विकास को करीब से देखने और एक पत्रकार के रूप में उसके बदलते औद्योगिक परिदृश्य को
समझने पर एक बात स्पष्ट दिखाई देती है—चीन की वैश्विक पहचान अब केवल बड़े पैमाने पर
उत्पादन करने वाले देश की नहीं रह गई है। रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनोवेटिव ड्रग्स
जैसे नए क्षेत्रों में चीन की बढ़ती मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि “मेड इन चाइना” धीरे-धीरे “क्रिएटेड
एंड इनोवेटेड इन चाइना” की दिशा में बढ़ रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में चीन के निर्यात में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कभी कपड़ा, फर्नीचर और
घरेलू उपकरणों ('पुरानी तीन चीज़ें') का दबदबा था, फिर इलेक्ट्रिक वाहन, लिथियम बैटरी और सौर
पैनल ('नई तीन चीज़ें') आए। लेकिन 2026 में, एक नया अध्याय शुरू हुआ है – रोबोटिक्स,
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इनोवेटिव दवाएं, जिन्हें 'नई नई तीन चीज़ें' कहा जा रहा है, विदेशों
में सबसे ज़्यादा बिकने वाले उत्पाद बन गए हैं।
यह सिर्फ एक निर्यात सूची में बदलाव नहीं है, बल्कि चीन के औद्योगिक विकास में एक बड़ी छलांग है
– 'पैमाने से प्रेरित' अर्थव्यवस्था से 'प्रौद्योगिकी-संचालित' अर्थव्यवस्था की ओर। आइए, एक रिपोर्टर
के नज़रिए से इन तीनों क्षेत्रों पर गौर करते हैं।
सबसे पहले रोबोटिक्स को देखें। चीन में रोबोट अब केवल कारखानों की उत्पादन लाइनों तक सीमित
नहीं हैं। औद्योगिक रोबोट से लेकर ह्यूमनॉइड रोबोट, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य सेवा और घरेलू उपयोग
तक, रोबोटिक्स का दायरा तेजी से विस्तृत हो रहा है। इसके पीछे केवल मशीन बनाने की क्षमता नहीं,
बल्कि सेंसर, चिप, सॉफ्टवेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसी कई
तकनीकों का एक साथ विकास है। चीनी रोबोटिक्स ने दुनिया भर में अपनी पैठ बनाई है। हर 10 में से 8
ह्यूमनॉइड रोबोट चीन में बनते हैं। 2026 की पहली तिमाही में, चीन ने 113.2 अरब युआन (लगभग
1.66 अरब डॉलर) के रोबोट निर्यात किए, जो 148 देशों में गए। सफाई रोबोट इसका सबसे बड़ा हिस्सा हैं
– 77.5 अरब युआन का निर्यात, जो कुल रोबोट निर्यात का 68.5% है।
लेकिन असली कहानी गुणवत्ता और तकनीक में है। चीनी रोबोट कंपनियां अब सिर्फ सस्ते उत्पाद नहीं
बेच रही हैं, बल्कि वे वैल्यू-एडेड समाधान पेश कर रही हैं। उदाहरण के लिए, ह्यूमनॉइड रोबोट
'लाइटनिंग' ने अप्रैल 2026 में एक हाफ-मैराथन 50 मिनट 26 सेकंड में पूरी की – जो मानव विश्व
रिकॉर्ड से भी तेज़ है।
चीन की सफलता का राज इसकी मजबूत सप्लाई चेन में है। शेन्ज़ेन के 'रोबोट वैली' में, पुर्जे महज आधे
दिन में मिल जाते हैं और उत्पादों को साल में 8 बार अपडेट किया जा सकता है। एक चीनी कंपनी का
बनाया ह्यूमनॉइड रोबोट जापान के हवाई अड्डे पर सामान लोड कर रहा है, तो वहीं एक और कंपनी का
रोबोट फ्रांस में इमारतों में टाइल्स लगा रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस बदलाव को और गति दे रहा है। चीन में एआई का इस्तेमाल
उद्योग, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और शहरों के प्रबंधन जैसे अनेक क्षेत्रों में बढ़ रहा है। सबसे
महत्वपूर्ण बात यह है कि AI अब केवल एक प्रयोगशाला की तकनीक नहीं रह गया है; वह वास्तविक
अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जिंदगी में प्रवेश कर रहा है। AI चीनी निर्यात में सबसे तेज़ी से बढ़ने
वाला सेक्टर है। 2026 की पहली छमाही में, AI-संबंधित उत्पादों का निर्यात 4800 अरब डॉलर से अधिक
रहा, जो साल-दर-साल 47.3% अधिक है। AI उत्पाद अब चीन के कुल निर्यात का 22% हिस्सा हैं। सबसे
बड़ी सफलता चिप निर्यात में है। चिप्स लगातार तीसरे साल चीन का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन गए
हैं। 2026 की पहली छमाही में, चिप निर्यात 177.28 अरब डॉलर तक पहुंच गया – जो 96.1% की वृद्धि
है। दिलचस्प बात यह है कि चीनी AI कंपनियां अब सिर्फ हार्डवेयर नहीं, बल्कि सर्विस भी एक्सपोर्ट कर
रही हैं। एक चीनी कंपनी AI मॉडल्स को खिलौनों में एम्बेड कर रही है, जिससे लागत 50% कम हो जाती
है। वहीं, दुनिया के टॉप 20 AI मॉडल्स में 12 चीनी कंपनियों के हैं – जिनमें से आठ टॉप पर हैं। अमेरिकी
दिग्गज डोरडैश, एयरबीएनबी और जर्मनी की सीमेंस भी चीनी AI मॉडल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।
तीसरा क्षेत्र है—इनोवेटिव ड्रग्स। यह क्षेत्र चीन के औद्योगिक परिवर्तन की एक अलग तस्वीर प्रस्तुत
करता है। कभी चीन की फार्मास्युटिकल ताकत को मुख्य रूप से उत्पादन और जेनेरिक दवाओं से जोड़ा
जाता था। आज चीनी कंपनियां और शोध संस्थान नई दवाओं के अनुसंधान एवं विकास में अधिक
निवेश कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव बताता है कि
चीन की क्षमता अब केवल “बनाने” तक सीमित नहीं, बल्कि “नई चीज विकसित करने” की दिशा में
भी आगे बढ़ रही है।
शायद सबसे हैरान करने वाली सफलता इनोवेटिव दवाओं के क्षेत्र में है। 2026 की पहली तिमाही में,
चीनी इनोवेटिव दवाओं के लाइसेंसिंग डील 600 अरब डॉलर से अधिक की थीं। पूरे साल यह आंकड़ा
1100 अरब डॉलर तक पहुंच गया – जो 2025 के पूरे साल का 80% है। चीनी दवा कंपनियां अब सिर्फ
जेनरिक दवाएं नहीं, बल्कि मूल इनोवेशन एक्सपोर्ट कर रही हैं। दुनिया की टॉप 10 दवा डील्स में 8 पर
चीनी कंपनियों का कब्जा है। शिजियाओ ग्रुप ने एस्ट्राजेनेका के साथ 18.5 अरब डॉलर का सौदा किया,
तो हेंगरुई ने ब्रिस्टल-मायर्स स्क्विब के साथ 15.2 अरब डॉलर का। चीनी दवा कंपनियां अब 'उधार की
नाव' (लाइसेंसिंग) से 'अपनी नाव' (को-डेवलपमेंट) की तरफ बढ़ रही हैं। 2025 तक, चीन के पास दुनिया
की 33.7% इनोवेटिव दवाएं थीं – जो किसी भी देश से ज़्यादा हैं। यहां तक कि वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी
लिखा है कि दुनिया की बड़ी फार्मा कंपनियां अब चीन में इनोवेशन की तलाश कर रही हैं।
यह सफलता चीन के लिए एक नई पहचान है – 'दुनिया की फैक्ट्री' से 'दुनिया की इनोवेशन लैब' तक।
यह वही रास्ता है जो अमेरिका (सिलिकॉन वैली) और जापान (रोबोटिक्स) ने पहले अपनाया था।
एक रिपोर्टर के तौर पर, मैंने पाया कि इस बदलाव की तीन खास बातें हैं:
1. लंबी अवधि का निवेश – चीन ने R&D पर लगातार पैसा लगाया है।
2. पूरी सप्लाई चेन – चीन के पास हर चीज़ मौजूद है – चिप्स से लेकर सॉफ्टवेयर तक।
3. ग्लोबल मार्केट की ज़रूरतें – चीनी प्रोडक्ट्स किफायती और क्वालिटी में बेहतर हैं।
इन तीनों को मिलाकर देखें तो एक ऐसा चीन दिखाई देता है जो केवल “दुनिया के लिए उत्पादन” नहीं
करना चाहता, बल्कि “दुनिया के लिए नई तकनीक और नए समाधान” भी विकसित करना चाहता है।
यही वह बदलाव है जिसे मैं चीन के औद्योगिक विकास की अगली महत्वपूर्ण छलांग मानता
हूं—“स्केल-लीडिंग” से “टेक्नोलॉजी-ड्रिवन” विकास की ओर। और शायद आने वाले वर्षों में चीन की
वैश्विक आर्थिक कहानी को समझने की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी यही होगी: चीन कितना उत्पादन करता
है, यह महत्वपूर्ण है; लेकिन उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि वह भविष्य के लिए क्या नया
बना और दुनिया को क्या नया दिया।
दुनिया के सामने अब एक सवाल है: क्या वे चीन के इस नए इनोवेशन युग को स्वीकार करने के लिए
तैयार हैं? क्योंकि जो चीन आज दिखा रहा है, वह सिर्फ उत्पाद नहीं है – बल्कि भविष्य की एक झलक
है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग) (लेखक- देवेंद्र सिंह)