1 अक्तूबर को संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फ़ू थ्सोंग ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की
तीसरी समिति में 28 समान विचारधारा वाले देशों की ओर से एक संयुक्त बयान दिया। इसमें
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकतरफा दंडात्मक उपायों पर सख्ती से अंकुश लगाने का आह्वान
किया।
फ़ू थ्सोंग ने कहा कि इस समय एकतरफावाद व्यापक रूप से बढ़ रहा है और एकतरफा दंडात्मक
उपायों का इस्तेमाल भी लगातार हो रहा है। इतिहास गवाह है कि ऐसे उपाय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर
अव्यवस्था और विश्व व्यवस्था में गड़बड़ी के प्रमुख कारणों में से एक रहे हैं। उन्होंने कहा कि
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर सतर्क रहना चाहिए, एकजुटता और सहयोग को मजबूत करना
चाहिए और इस तरह की अवैध प्रथाओं पर प्रभावी रूप से रोक लगानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकासशील देश और उनके लोग लंबे समय से एकतरफा दंडात्मक उपायों के
नकारात्मक असर का सामना कर रहे हैं। ये उपाय संप्रभु समानता और सहयोग के सिद्धांतों का
उल्लंघन करते हैं, दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करते हैं और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के
उद्देश्यों व सिद्धांतों के खिलाफ हैं। साथ ही, ये बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के भी विपरीत
हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय कई बार एकतरफा दंडात्मक उपायों को तत्काल हटाने
की अपील कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद ये उपाय संबंधित देशों और उनके लोगों पर गंभीर
असर डाल रहे हैं और कई मामलों में लोगों के जीवन के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा
कि एकतरफा दंडात्मक उपाय, द्वितीयक प्रतिबंध और अत्यधिक अनुपालन मौजूदा मानवीय और
आर्थिक चुनौतियों को और बढ़ा रहे हैं। इससे खाद्य, ऊर्जा और वित्तीय सुरक्षा भी गंभीर रूप से
प्रभावित हो रही है।
फ़ू थ्सोंग ने कहा कि 28 देशों ने एकतरफा दंडात्मक उपायों का विरोध दोहराया है। उन्होंने कुछ
पश्चिमी देशों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की न्यायसंगत अपीलों पर ध्यान देने और सभी एकतरफा
दंडात्मक उपायों को तत्काल और बिना शर्त वापस लेने का आह्वान किया।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)





