ताइवान को साधने की कोशिश में चीन का नया दांव… ताइवान के टूरिज्म और ट्रेड पर खास फोकस

china and tivan

ताइवान को साधने की कोशिश में चीन का नया दांव… ताइवान के टूरिज्म और ट्रेड पर खास फोकस

चीन ने ताइवान को लेकर बड़ा कूटनीतिक कदम उठाते हुए 10 नए प्रोत्साहन उपायों का ऐलान किया है। इनका मकसद पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देना है, साथ ही राजनीतिक संवाद को भी नई दिशा देना है। यह कदम ऐसे समय आया है जब दोनों पक्षों के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं।

विपक्षी नेता की यात्रा के बाद फैसला

यह घोषणा उस मुलाकात के बाद हुई, जिसमें ताइवान की प्रमुख विपक्षी पार्टी कुओमिनतांग की वरिष्ठ नेता चेंग ली-वुन ने Xi Jinping से मुलाकात की। इस बैठक में शांति और संबंध सुधार पर चर्चा हुई, जिसके बाद चीन ने यह पैकेज सामने रखा।

टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना

चीन ने ताइवान के लिए पर्यटन से जुड़े कई प्रतिबंधों में ढील देने का संकेत दिया है। खासतौर पर शंघाई और फुजियान के निवासियों को ताइवान यात्रा की अनुमति देने की बात कही गई है। इसके साथ ही सीधे उड़ानों को फिर से शुरू करने की दिशा में भी पहल की जा रही है।

व्यापार और बाजार में राहत

चीन के इन प्रोत्साहनों में ताइवानी खाद्य और कृषि उत्पादों को चीन में बेचने की प्रक्रिया को आसान बनाना शामिल है। साथ ही खाद्य और मत्स्य उत्पादों के निरीक्षण मानकों को सरल बनाने का भी प्रस्ताव है, जिससे व्यापार को गति मिल सके।

मीडिया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान

चीन ने ताइवानी टीवी ड्रामा, डॉक्यूमेंट्री और एनीमेशन को अपने बाजार में अनुमति देने की बात कही है। हालांकि इसके लिए “सही दिशा” और “स्वस्थ कंटेंट” जैसी शर्तें रखी गई हैं। इसके अलावा सांस्कृतिक और मीडिया एक्सचेंज को भी बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

राजनीतिक संवाद पर जोर

चीन ने अपनी कम्युनिस्ट पार्टी और ताइवान की विपक्षी पार्टी के बीच नियमित संवाद तंत्र विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। इसके जरिए दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली और संवाद को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

राहत के लिए शर्तें लागू

इन सभी प्रोत्साहनों को चीन ने कुछ शर्तों से जोड़ा है। खासकर ताइवान की स्वतंत्रता के खिलाफ रुख अपनाने को इन सुविधाओं का आधार बताया गया है। यानी राजनीतिक सहमति के बिना इन उपायों का पूरा लाभ मिलना मुश्किल हो सकता है।

ताइवान सरकार की चुप्पी

इस पूरे घटनाक्रम पर ताइवान सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। चीन अब भी ताइवान के मौजूदा राष्ट्रपति लाई चिंग-ते को अलगाववादी मानता है और उनके साथ सीधे संवाद से इनकार करता रहा है।

विपक्ष के जरिए रिश्ते सुधारने की कोशिश

चीन की रणनीति साफ दिख रही है कि वह ताइवान की सत्ताधारी सरकार के बजाय विपक्ष के साथ संबंध मजबूत कर अपने हित साधना चाहता है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि बीजिंग रिश्तों को नए तरीके से संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।

Exit mobile version