चीन ने जापान के पुनः सैन्यीकरण पर जताई चिंता

81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा की निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा समिति की सामान्य बहस में
8 अक्तूबर को चीनी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख और चीनी विदेश मंत्रालय के हथियार नियंत्रण विभाग
के निदेशक सुन श्याओपो ने भाषण दिया। उन्होंने कहा कि जापान की मौजूदा सरकार तेजी से पुनः
सैन्यीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है, जो क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए एक नया खतरा बन
सकता है।

सुन श्याओपो ने कहा कि इस साल टोक्यो मुकदमे की शुरुआत के 80 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने याद
दिलाया कि जापान ने सैन्यवादी अपराधों को स्वीकार करने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सभी
प्रावधानों को मानने के आधार पर संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता हासिल की थी। हालांकि, उनके
मुताबिक, जापान की मौजूदा सरकार आक्रमण के इतिहास को नकार रही है, युद्ध अपराधों को सही
ठहराने की कोशिश कर रही है और द्वितीय विश्व युद्ध के युद्ध अपराधियों का महिमामंडन कर
रही है। इसके साथ ही, जापान अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने और हथियारों का विस्तार करने में जुटा है।
सुन ने कहा कि ये कदम क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।

सुन ने आगे कहा कि जापान के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने परमाणु हथियार रखने की संभावनाओं
पर खुले तौर पर चर्चा की है और देश के ‘परमाणु हथियार रहित तीन सिद्धांतों’ को छोड़ने की
कोशिश की है। उनके अनुसार, यह अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर से ‘शत्रु राष्ट्र खंड’ हटाने के जापान के प्रस्ताव को भी युद्ध के बाद
स्थापित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती देने वाला कदम बताया।

सुन ने कहा कि जापान को अपने आक्रमण के इतिहास पर गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिए,
सैन्यवाद से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए, पुनः सैन्यीकरण की योजना छोड़नी चाहिए और परमाणु
अप्रसार से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायित्वों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए।
अमेरिका की नीति पर टिप्पणी करते हुए सुन ने कहा कि वह रणनीतिक बढ़त हासिल करने की होड़
में लगा है और ‘परमाणु साझेदारी’ तथा ‘विस्तारित प्रतिरोध’ जैसी नीतियों के जरिए परमाणु
गठबंधन मजबूत कर रहा है। उनके मुताबिक, इससे वैश्विक और क्षेत्रीय रणनीतिक स्थिरता को
गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हथियार नियंत्रण और परमाणु अप्रसार के
मुद्दों पर अमेरिका दोहरे मापदंड अपनाता है। सुन ने कहा कि यही रवैया बहुपक्षीय हथियार नियंत्रण
की प्रक्रिया धीमी होने और अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार व्यवस्था कमजोर पड़ने का एक प्रमुख
कारण है।

सुन ने अंत में कहा कि चीन परमाणु हथियारों के अप्रसार संबंधी संधि (एनपीटी) की अहम भूमिका
की दृढ़ता से रक्षा करता है। यह संधि अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार और निरस्त्रीकरण व्यवस्था की
बुनियाद है। उन्होंने कहा कि चीन शांतिपूर्ण और न्यायसंगत तरीके से सैन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता
(एआई) के विकास का समर्थन करता है, बशर्ते उसका इस्तेमाल विश्वसनीय और नियंत्रित हो।
सुन के मुताबिक, चीन निष्पक्ष, सहयोगात्मक, संतुलित और प्रभावी हथियार नियंत्रण की नीति का
समर्थन करता है और अशांत दुनिया में शांति, स्थिरता तथा प्रगति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध
है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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