जिस कचरे को देखकर लोग नाक सिकोड़कर आगे बढ़ जाते हैं, उसी कचरे को जयपुर के दो युवाओं ने कमाई और रोजगार का साधन बना दिया। अभिषेक गुप्ता और अभिनव शेखर वशिष्ठ ने अपने स्टार्टअप WeVOIS Labs के जरिए कचरा प्रबंधन को नया रूप देने की कोशिश की है। एक छोटे से कमरे से शुरू हुआ यह कारोबार आज देश के 25 शहरों तक पहुंच चुका है और इसकी कारोबारी कीमत करीब ₹250 करोड़ बताई जाती है। कंपनी गीले कचरे से खाद तैयार करती है, जबकि कपड़ों और दूसरे सूखे कचरे को दोबारा उपयोग लायक बनाने पर भी काम करती है। दोनों संस्थापकों को फोर्ब्स की अंडर-30 सूची में भी जगह मिल चुकी है। उनकी कहानी बताती है कि किसी बड़ी समस्या को सही सोच, तकनीक और लगातार मेहनत के जरिए कारोबार के अवसर में बदला जा सकता है।
कॉलेज में कचरे पर चलाए गए अभियान से निकला अपना स्टार्टअप शुरू करने का विचार
अभिषेक और अभिनव को कचरे से जुड़ी समस्या का व्यावहारिक समाधान खोजने का विचार वर्ष 2016 में कॉलेज परिसर में हुए एक जागरूकता अभियान के दौरान आया। जहां दूसरे छात्रों के लिए यह एक सामान्य शैक्षणिक गतिविधि थी, वहीं दोनों ने इसे कारोबार शुरू करने के अवसर के रूप में देखा। उस समय भारत में हर साल लगभग 6.2 करोड़ टन कचरा निकलने का आंकड़ा उनके लिए चिंता का विषय बना। बड़ी मात्रा में कचरा खुले में फेंका जाता था या जला दिया जाता था। दोनों ने इस समस्या को समझने के लिए शोध, सर्वे और योजना बनाने में करीब दो साल लगाए। इसके बाद वर्ष 2018 में WeVOIS Labs की शुरुआत हुई। उनका उद्देश्य केवल कचरा उठाना नहीं, बल्कि उसके संग्रह, छंटाई और दोबारा इस्तेमाल के लिए एक व्यवस्थित समाधान तैयार करना था।
IoT और डिजिटल तकनीक से कचरा उठाने की व्यवस्था को बनाया ज्यादा पारदर्शी
कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में काम शुरू करना आसान नहीं था। नगर निकायों, सफाई कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच बेहतर तालमेल बनाना बड़ी चुनौती थी। कचरा समय पर उठे, गाड़ियों के रास्ते सही रहें और काम की निगरानी हो सके, इसके लिए कंपनी ने डिजिटल तकनीक का सहारा लिया। इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी IoT के साथ RFID टैग और मोबाइल ऐप जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल किया गया। इससे कचरा उठाने का समय, उसका वजन, कर्मचारी की लोकेशन और वाहन की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिली। रूट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर और अलर्ट सिस्टम के जरिए सफाई व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश की गई। तकनीक के इस इस्तेमाल ने कचरा प्रबंधन को पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ाकर निगरानी और आंकड़ों पर आधारित मॉडल में बदलने में मदद की।
गीले कचरे से खाद और पुराने कपड़ों से नए उत्पाद तैयार करने पर जोर
WeVOIS Labs का काम केवल घरों और संस्थानों से कचरा इकट्ठा करने तक सीमित नहीं है। कंपनी गीले कचरे से खाद बनाती है और सूखे कचरे से प्लास्टिक, कांच, कागज तथा धातुओं को अलग करती है। कपड़ों के बेकार हिस्सों को दोबारा उपयोग में लाने के लिए कंपनी ने ReSootr नाम की इकाई भी शुरू की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जयपुर में प्रतिदिन 300 टन क्षमता वाला टेक्सटाइल वेस्ट रीसाइक्लिंग प्लांट शुरू किया गया है। इसके अलावा, बिसलेरी के साथ साझेदारी के तहत हर महीने 30 टन प्लास्टिक कचरा इकट्ठा करने का काम भी शुरू हुआ है। इस तरह कंपनी कचरे को केवल निपटाने के बजाय उससे उपयोगी सामग्री तैयार करने पर ध्यान दे रही है, जिससे लैंडफिल में जाने वाले कचरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
25 शहरों तक पहुंचा कारोबार, रोजगार और ग्रामीण स्वच्छता पर भी काम
कंपनी से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, WeVOIS Labs सालाना 6 से 7 लाख टन से अधिक कचरे को प्रोसेस कर रही है। इसका काम 25 शहरों तक फैल चुका है और अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्मार्ट विलेज सेंटर शुरू किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के जरिए स्वच्छता व्यवस्था बेहतर बनाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करने की कोशिश की जा रही है। कंपनी का मॉडल सफाई कर्मचारियों को नियमित काम उपलब्ध कराने और उनके श्रम को सम्मान दिलाने पर भी जोर देता है। कचरे से खाद, रीसाइक्लिंग और नए उत्पाद तैयार करने जैसी गतिविधियां पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान में योगदान दे सकती हैं। अभिषेक गुप्ता और अभिनव शेखर वशिष्ठ की यह पहल दिखाती है कि कचरे को सही ढंग से संभालकर पर्यावरण संरक्षण और कारोबार, दोनों के लिए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।