संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कार्य पद्धति पर खुली बहस के दौरान चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू
त्सोंग ने बुधवार को कहा कि एकजुटता और सहयोग ही सुरक्षा परिषद की सबसे महत्वपूर्ण कार्य
पद्धति होनी चाहिए।
फू त्सोंग ने कहा कि सुरक्षा परिषद की कार्य पद्धति केवल एक तकनीकी मुद्दा नहीं है। इसे
अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए लगातार बेहतर और प्रभावी
बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिषद के सभी सदस्यों को एक दूसरे का सम्मान करना
चाहिए, पूरी तरह से विचार विमर्श करना चाहिए, मतभेदों का उचित तरीके से समाधान करना
चाहिए और आम सहमति बनाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा परिषद को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय 6 की भावना का पालन
करना चाहिए। इसके तहत संवाद और वार्ता के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जाना चाहिए,
क्षेत्रीय देशों और संगठनों की मध्यस्थता का समर्थन किया जाना चाहिए तथा विवादों के शांतिपूर्ण
समाधान के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों और बल प्रयोग
जैसे अनिवार्य उपायों का इस्तेमाल सावधानी से किया जाना चाहिए। साथ ही, जो प्रतिबंध अपने
लक्ष्यों को हासिल करने में विफल रहे हैं, उनकी समीक्षा कर उनमें जरूरी बदलाव किए जाने चाहिए।
फू त्सोंग ने यह भी कहा कि एक मजबूत और एकजुट सुरक्षा परिषद विश्व शांति और स्थिरता की
जरूरतों को पूरा करती है और यह सभी सदस्य देशों के साझा हित में है। उन्होंने सभी देशों से सुरक्षा
परिषद के कामकाज का सक्रिय समर्थन करने, उसके प्रस्तावों का सख्ती से पालन करने और उसके
अधिकार की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने उन अवैध एकतरफा कार्रवाइयों का विरोध
करने की भी अपील की, जो सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र को दरकिनार करती हैं। साथ ही,
उन्होंने सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों से न्यायपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से अग्रणी भूमिका निभाने
का आग्रह किया।
इसके अलावा, फू त्सोंग ने कहा कि चीन बहुपक्षवाद के सिद्धांत का पालन करते हुए एकजुटता और
सहयोग को मजबूत करने तथा सुरक्षा परिषद की कार्य पद्धति को बेहतर बनाने के लिए अन्य देशों
के साथ मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य स्थायी शांति और
साझा सुरक्षा की दिशा में और अधिक योगदान देना है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)