मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने और उनके आर्थिक विकास को लेकर तेजी से काम कर रही है।
मुख्यमन्त्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर सरकार मध्यप्रदेश में रोजगार और कौशल विकास को नई दिशा देने की तैयारी है। भोपाल स्थित संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क आने वाले समय में हर साल 10 हजार युवाओं को प्रशिक्षित करने की क्षमता विकसित करेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अभिमुखीकरण समारोह ‘आरंभ’ में यह लक्ष्य सामने रखते हुए साफ संकेत दिया कि सरकार अब केवल डिग्री आधारित शिक्षा पर नहीं, बल्कि रोजगार बाजार की जरूरत के मुताबिक कौशल आधारित प्रशिक्षण पर जोर दे रही है।
फिलहाल ग्लोबल स्किल्स पार्क हर साल करीब 2 हजार युवाओं को विभिन्न कौशल पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण और प्रमाण-पत्र दे रहा है। वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़ाकर 3 हजार करने का लक्ष्य है। इसके बाद प्रशिक्षण क्षमता को लगातार बढ़ाते हुए 10 हजार युवाओं तक ले जाने की योजना है। यह विस्तार महज संख्या बढ़ाने की कवायद नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश में युवाओं को उद्योगों की बदलती जरूरतों से जोड़ने की रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है।
98.9 प्रतिशत प्लेसमेंट सबसे बड़ा संकेत
किसी भी स्किल सेंटर की सफलता का असली पैमाना केवल कितने युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, यह नहीं बल्कि प्रशिक्षण के बाद कितने युवाओं को रोजगार मिला, यह है। इस लिहाज से ग्लोबल स्किल्स पार्क का 98.9 प्रतिशत प्लेसमेंट बेहद महत्वपूर्ण आंकड़ा है।
यह प्रतिशत बताता है कि प्रशिक्षण और उद्योग की जरूरतों के बीच संस्थान ने काफी हद तक प्रभावी तालमेल बनाया है। यदि यही मॉडल बड़े स्तर पर लागू होता है तो मध्यप्रदेश के युवाओं को रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों या महानगरों की ओर जाने की मजबूरी कम हो सकती है।
डिग्री से आगे कौशल की अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री के संबोधन में एक महत्वपूर्ण संदेश यह था कि बदलती अर्थव्यवस्था में केवल पारंपरिक डिग्री पर्याप्त नहीं है। उद्योगों में ऑटोमेशन, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिकल टेक्नोलॉजी और नई मशीनरी के बढ़ते इस्तेमाल ने रोजगार के स्वरूप को तेजी से बदला है।
ऐसे समय में इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स, एडवांस इलेक्ट्रिकल और अन्य तकनीकी पाठ्यक्रम युवाओं को सीधे रोजगार की जरूरत से जोड़ सकते हैं। यही कारण है कि ग्लोबल स्किल्स पार्क को केवल प्रशिक्षण संस्थान के बजाय उद्योग और शिक्षा के बीच पुल के रूप में विकसित करने की कोशिश दिखाई दे रही है।
दूसरे राज्यों के युवा भी बन रहे हिस्सेदार
इस संस्थान में मध्यप्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान सहित अन्य राज्यों के विद्यार्थी भी प्रशिक्षण के लिए पहुंच रहे हैं। यह पहल भोपाल को देश के एक महत्वपूर्ण स्किलिंग हब के रूप में स्थापित करने की संभावना पैदा करती है।
यदि यहां विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, प्रमाण-पत्र और मजबूत प्लेसमेंट नेटवर्क लगातार विकसित होता है तो इसका लाभ केवल मध्यप्रदेश के युवाओं को नहीं, बल्कि देशभर के विद्यार्थियों को मिल सकता है।
संत रविदास के विचारों से कौशल को जोड़ने की कोशिश
ग्लोबल स्किल्स पार्क का नाम संत शिरोमणि रविदास से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने संत रविदास की शिक्षाओं को कौशल और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए कहा कि व्यक्ति को अपने कौशल पर भरोसा रखना चाहिए।
इस संदेश का सामाजिक महत्व भी है। पारंपरिक रूप से कुछ कामों को छोटा-बड़ा समझने की मानसिकता रोजगार के कई अवसरों के रास्ते में बाधा बनती रही है। सरकार का यह संदेश कि “कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता”, व्यावसायिक शिक्षा को सामाजिक सम्मान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
युवतियों की सफलता बदल रही तस्वीर
‘आरंभ’ कार्यक्रम में ग्लोबल स्किल्स पार्क से प्रशिक्षण लेकर रोजगार पाने वाली वर्चस्वनी पथिक और सान्वी त्रिवेदी के अनुभव भी सामने आए। इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स और एडवांस इलेक्ट्रिकल जैसे क्षेत्रों में युवतियों का रोजगार हासिल करना यह संकेत देता है कि तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की भी बड़ी संभावना है।
अगर कौशल प्रशिक्षण में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ती है, तो इसका सीधा प्रभाव महिला रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और परिवार की आय पर पड़ सकता है।
उद्योग-शिक्षा साझेदारी सबसे अहम
बजाज ऑटो फाउंडेशन, मैजिक बिलियन और ट्वी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौते उद्योग और प्रशिक्षण संस्थान के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण को वास्तविक उद्योग की जरूरतों से जोड़ना है।
यही मॉडल भविष्य की सफलता तय करेगा—पहले उद्योग की जरूरत समझी जाए, फिर उसी के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाए और प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जोड़ा जाए।
आगे की सबसे बड़ी चुनौती
10 हजार युवाओं को प्रतिवर्ष प्रशिक्षित करना बड़ा लक्ष्य है, लेकिन असली चुनौती प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखना होगी। संख्या बढ़ने के साथ यदि प्रशिक्षकों, आधुनिक मशीनों, इंडस्ट्री एक्सपोजर और प्लेसमेंट नेटवर्क का विस्तार नहीं हुआ तो गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
इसलिए अगले चरण में संस्थान को केवल सीटें बढ़ाने के बजाय नए जमाने के कौशल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर लगातार ध्यान देना होगा।
कुल मिलाकर, भोपाल का ग्लोबल स्किल्स पार्क मध्यप्रदेश की उस रोजगार नीति का चेहरा बन सकता है, जिसमें डिग्री से ज्यादा दक्षता, प्रशिक्षण से ज्यादा रोजगार और शिक्षा से ज्यादा उद्योग की जरूरत को महत्व दिया जाए। 98.9 प्रतिशत प्लेसमेंट ने इसकी क्षमता का संकेत दे दिया है। अब 2 हजार से 10 हजार युवाओं तक पहुंचने की चुनौती इस मॉडल को बड़े पैमाने पर सफल साबित करने की होगी।