मुख्यमंत्री ने गुरु को किया नमन: डॉ. जे.पी.एन. पाठक के 80वें जन्मदिवस पर भावुक हुए डॉ. मोहन यादव
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने शिक्षक और प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. जे.पी.एन. पाठक के 80वें जन्मदिवस पर उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुभकामनाएं दीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि डॉ. पाठक जैसे विरले शिक्षकों का शिष्य होना उनके जीवन का सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि गुरु का मार्गदर्शन ही व्यक्ति के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होता है और डॉ. पाठक का स्नेह व शिक्षाएं आज भी उन्हें प्रेरित करती हैं।
गुरु के सम्मान में भावुक हुए मुख्यमंत्री
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें प्रतिदिन कई कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिलता है, लेकिन अपने गुरु को जन्मदिन की बधाई देना उनके लिए विशेष और भावनात्मक क्षण है। उन्होंने कहा कि आज भी जब वे डॉ. पाठक को देखते हैं तो उनमें एक युवा जैसी ऊर्जा दिखाई देती है।
“ऐसा लगता है जैसे फिर साइंस कॉलेज की कक्षा में बैठ गए हों”
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. पाठक की सकारात्मक सोच, सहज व्यवहार और पढ़ाने की विशिष्ट शैली आज भी उनके मन में ताजा है। उन्होंने कहा कि जब भी गुरुजी से मुलाकात होती है तो ऐसा महसूस होता है मानो वे फिर से उज्जैन के साइंस कॉलेज की कक्षा में बैठे हों और डॉ. पाठक पढ़ा रहे हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुजी का पढ़ाने का तरीका विद्यार्थियों को विषय से जोड़ने वाला और प्रेरणा देने वाला था।
वैज्ञानिक उपलब्धियों पर जताया गर्व
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि डॉ. जे.पी.एन. पाठक ने विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और अनेक वैज्ञानिक सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी उपलब्धियां केवल उनके विद्यार्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश और देश के लिए गर्व का विषय हैं।
गुरुजनों से मिले संस्कार आज भी प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में छात्र जीवन से जुड़े कई संस्मरण साझा किए। उन्होंने उन अन्य शिक्षकों को भी याद किया जिन्होंने उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि शिक्षकों द्वारा दी गई शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह संस्कार, साहस और समाज के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराने वाली शिक्षा थी। यही सीख आज भी उनके सार्वजनिक जीवन में मार्गदर्शक बनी हुई है।
युवा शक्ति पर विश्वास रखने वाले शिक्षक
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. पाठक ने हमेशा विद्यार्थियों की क्षमता और युवा शक्ति पर भरोसा किया। उन्होंने छात्र संघ की गतिविधियों को सशक्त बनाने में सहयोग दिया और ‘प्रज्ञा’ पत्रिका जैसे माध्यमों से विद्यार्थियों को वैचारिक दिशा प्रदान की। उनके मार्गदर्शन ने कई विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
शिष्यों ने भी जताया सम्मान
डॉ. पाठक के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना मंडल के अध्यक्ष ओम जैन सहित कई जनप्रतिनिधि और उनके पूर्व छात्र भी शामिल हुए। सभी ने अपने गुरु को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और उनके योगदान को याद किया।
गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत उदाहरण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अपने शिक्षक को सार्वजनिक रूप से सम्मान देना भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा का एक प्रेरणादायक उदाहरण माना जा रहा है। यह संदेश भी देता है कि जीवन में चाहे व्यक्ति कितनी भी ऊंचाई पर पहुंच जाए, उसके व्यक्तित्व की नींव रखने वाले शिक्षक हमेशा सम्मान और श्रद्धा के पात्र रहते हैं। डॉ. पाठक के प्रति मुख्यमंत्री का सम्मान और आत्मीयता इसी परंपरा की जीवंत मिसाल बनकर सामने आई है।





