मध्य प्रदेश सरकार की नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाणपत्र को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को अहम मोड़ पर पहुंचने जा रहा है। राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने प्रतिमा बागरी को 6 जुलाई को अनुसूचित जाति विकास आयुक्त कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। इस सुनवाई के बाद समिति उपलब्ध दस्तावेजों, दोनों पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों के आधार पर आगे का फैसला करेगी। राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से यह सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जाति प्रमाणपत्र विवाद
आज समिति के सामने पेश होंगी मंत्री प्रतिमा बागरी
दस्तावेजों और दावों पर टिकी नजर
माना जा रहा है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उन्हें राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। यदि समिति उन्हें क्लीन चिट देती है तो वह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार की दूसरी मंत्री होंगी, जिन्हें जाति प्रमाणपत्र विवाद में राहत मिलेगी। इससे पहले राज्यमंत्री गौतम टेटवाल को भी समिति ने क्लीन चिट दी थी, हालांकि उनके मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है और उसकी अगली सुनवाई 21 जुलाई को प्रस्तावित है।
शिकायतकर्ता भी पेश करेंगे अपने दस्तावेज
दूसरी ओर, शिकायतकर्ता और कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दावा किया है कि वह सुनवाई के दौरान ऐसे दस्तावेज समिति के समक्ष प्रस्तुत करेंगे, जिनसे प्रतिमा बागरी के राजपूत (ठाकुर) समुदाय से संबंध होने का दावा मजबूत होगा। उनका कहना है कि मंत्री के अनुसूचित जाति होने का दावा जिन दस्तावेजों पर आधारित है, वे वर्तमान वैधानिक सूची और वर्ष 2007 के राजपत्र (गजट) के अनुरूप नहीं हैं।
अहिरवार का आरोप है कि यदि कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं है, तो उसे एससी प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकता। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर प्रमाणपत्र की वैधता तय की जानी चाहिए।
क्या है पूरा विवाद?
पूरा मामला प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाणपत्र से जुड़ा है। उन्होंने सतना जिले की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रैगांव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद उन्हें राज्य सरकार में नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री बनाया गया।
बाद में कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने उनके जाति प्रमाणपत्र की वैधता पर सवाल उठाते हुए शिकायत दर्ज कराई और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में दावा किया गया कि प्रतिमा बागरी जिस बागरी समुदाय से आती हैं, वह सतना क्षेत्र में अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि उनका संबंध राजपूत (ठाकुर) समुदाय से है। ऐसे में एससी प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षित सीट से चुनाव लड़ना नियमों के अनुरूप नहीं था।
आज की सुनवाई पर सबकी नजर
सोमवार को होने वाली सुनवाई में दोनों पक्ष अपने-अपने दस्तावेज और तर्क समिति के समक्ष रखेंगे। समिति इन सभी साक्ष्यों की जांच के बाद निर्णय लेगी कि मंत्री प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाण पत्र जो अनुसूचित जाति का है वह प्रमाणपत्र वैध है अथवा नहीं, इस निर्णय का प्रभाव न केवल प्रतिमा बागरी के राजनीतिक भविष्य पर पड़ेगा बल्कि राज्य की राजनीति के साथ विधानसभा की आरक्षित सीटों से जुड़े प्रकरणों पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा। फिलहफिलहाल पूरे प्रदेश की नजर इस महत्वपूर्ण सुनवाई और समिति के फैसले पर टिकी हुई है।