लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राजस्व न्याय व्यवस्था अब पूरी तरह डिजिटल युग की ओर बढ़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन और ई-गवर्नेंस विजन को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो वर्षों से चली आ रही कागजी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव साबित होगा।
राजस्व परिषद का बड़ा फैसला
मूल दस्तावेज रहेंगे सुरक्षित
न्याय प्रक्रिया होगी तेज और पारदर्शी
अब राजस्व परिषद की अदालतों में मुकदमों की सुनवाई के लिए मूल दस्तावेज मंगाने की आवश्यकता नहीं होगी। उनकी जगह विधिवत प्रमाणित और स्कैन की गई डिजिटल प्रतियों के आधार पर ही न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस व्यवस्था के लागू होने से न केवल सरकारी अभिलेख सुरक्षित रहेंगे, बल्कि मुकदमों के निस्तारण की गति भी तेज होगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल के निर्देश पर इस नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। लंबे समय से अदालतों में मूल फाइलें भेजने की प्रक्रिया के कारण दस्तावेजों के गुम होने, क्षतिग्रस्त होने या समय पर उपलब्ध नहीं हो पाने जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। कई मामलों में वर्षों पुराने रिकॉर्ड खराब हो जाने या फाइलों के गायब होने से मुकदमों का निपटारा प्रभावित होता था। नई व्यवस्था इन समस्याओं का स्थायी समाधान मानी जा रही है।
अब स्कैन कॉपी ही बनेगी सुनवाई का आधार
नई व्यवस्था के तहत अधीनस्थ अदालतों और राजस्व कार्यालयों से भेजी जाने वाली स्कैन कॉपियों को ही सुनवाई का आधार बनाया जाएगा। परिषद ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्कैन किए गए प्रत्येक दस्तावेज की गुणवत्ता उत्कृष्ट होनी चाहिए। आदेश पत्रक, नोटशीट, नक्शे, रिपोर्ट और अन्य सभी अभिलेख क्रमवार एवं स्पष्ट रूप से स्कैन किए जाएं ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।
इसके साथ ही हर डिजिटल रिकॉर्ड के साथ संबंधित राजस्व रिकॉर्ड कीपर (आरआरके) का प्रमाण-पत्र भी अनिवार्य होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रस्तुत दस्तावेज मूल अभिलेखों की सही और प्रमाणित प्रति हैं। इस व्यवस्था से डिजिटल रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बनी रहेगी और न्यायिक प्रक्रिया में किसी तरह की शंका की गुंजाइश नहीं रहेगी।
मूल दस्तावेज अब रहेंगे पूरी तरह सुरक्षित
राजस्व परिषद के इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ सरकारी अभिलेखों की सुरक्षा के रूप में सामने आएगा। अब वर्षों पुराने और महत्वपूर्ण रिकॉर्ड को बार-बार विभिन्न कार्यालयों और अदालतों में भेजने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे दस्तावेजों के फटने, खराब होने, पानी से भीगने, गुम होने या परिवहन के दौरान क्षतिग्रस्त होने का खतरा लगभग समाप्त हो जाएगा।
सरकारी रिकॉर्ड प्रशासन की महत्वपूर्ण धरोहर माने जाते हैं। भूमि विवाद, सीमांकन, नामांतरण और स्वामित्व जैसे मामलों में कई दशक पुराने दस्तावेज निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इनका सुरक्षित रहना न्यायिक प्रक्रिया के लिए बेहद आवश्यक है।
विशेष परिस्थितियों में ही मंगाए जाएंगे मूल रिकॉर्ड
राजस्व परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि सामान्य परिस्थितियों में अदालतें केवल डिजिटल प्रतियों के आधार पर ही सुनवाई करेंगी। यदि किसी विशेष मामले में मूल दस्तावेज देखने की आवश्यकता महसूस होती है, तो संबंधित न्यायालय को उसका स्पष्ट कारण लिखित रूप से दर्ज करना होगा। न्यायालय के विशेष आदेश के बाद ही मूल रिकॉर्ड प्रस्तुत किया जाएगा।
इस व्यवस्था से न केवल रिकॉर्ड की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि अदालतों में मुकदमों के लंबित रहने की अवधि भी कम होगी। पहले कई मामलों में मूल फाइल मंगाने और उसके पहुंचने में सप्ताहों या महीनों का समय लग जाता था। अब यह देरी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
आरसीसीएमएस पोर्टल से जुड़ेगी पूरी प्रक्रिया
राज्य सरकार इस व्यवस्था को भविष्य में पूरी तरह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी कर रही है। राजस्व परिषद की योजना है कि पूरी न्यायिक प्रक्रिया को आरसीसीएमएस (RCCMS) पोर्टल के माध्यम से संचालित किया जाए। इसके सक्रिय होने के बाद राजस्व मामलों से जुड़े दस्तावेज अपलोड करने, मुकदमों की स्थिति देखने, आदेश प्राप्त करने और अन्य प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किया जा सकेगा।
इससे वकीलों, पक्षकारों और सरकारी अधिकारियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए समय की बचत होगी और न्यायिक प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी।
लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राजस्व परिषद ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को अधीनस्थ कर्मचारियों को डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का प्रशिक्षण देने के लिए कहा गया है।
परिषद ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि किसी जिले से धुंधली, अधूरी, अप्रमाणित या गलत स्कैन कॉपी भेजी जाती है तो संबंधित राजस्व रिकॉर्ड कीपर (आरआरके) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। यानी डिजिटल व्यवस्था के साथ जवाबदेही भी उतनी ही सख्त होगी।
ई-गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम है। इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक आधुनिक, सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी। साथ ही सरकारी रिकॉर्ड का डिजिटल संरक्षण भविष्य के लिए भी उपयोगी साबित होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार सरकारी सेवाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ रही है। भूमि रिकॉर्ड, संपत्ति पंजीकरण, ऑनलाइन सेवाओं और अब राजस्व न्यायालयों में डिजिटल दस्तावेजों के उपयोग जैसी पहलें प्रदेश में ई-गवर्नेंस को नई गति दे रही हैं। राजस्व परिषद का यह निर्णय आने वाले समय में न केवल मुकदमों के शीघ्र निस्तारण में मदद करेगा, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड प्रबंधन की कार्यप्रणाली को भी अधिक सुरक्षित, आधुनिक और भरोसेमंद बनाएगा। इसे उत्तर प्रदेश की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है