BRICS Summit: मोदी-पुतिन मुलाकात… दोस्ती और भरोसे का नया दौर, कारोबार से रणनीतिक साझेदारी तक बड़ा संदेश

BRICS Summit

दूसरी मुलाकात, बड़ा संकेत…मोदी-पुतिन के बीच रिश्तों की गहराई पर मंथन

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात भारत-रूस संबंधों की निरंतरता और मजबूती का बड़ा संकेत है। खास बात यह है कि इस साल दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात है। इससे पहले 31 अगस्त को बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के 26वें शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। यानी वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में तेजी से बदलाव के बावजूद भारत और रूस के शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधा संवाद लगातार जारी है। बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष, कौशल गतिशीलता और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा हुई। यह बताता है कि भारत-रूस संबंध केवल पारंपरिक रक्षा साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अब अर्थव्यवस्था और तकनीक सहित कई नए क्षेत्रों में विस्तार पा रहे हैं।

रक्षा से आगे बढ़ता रिश्ता.. ऊर्जा, अंतरिक्ष और व्यापार पर नई रफ्तार

भारत और रूस के रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत लंबे समय से रक्षा सहयोग रहा है, लेकिन बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में दोनों देश साझेदारी का दायरा लगातार बढ़ा रहे हैं। मोदी और पुतिन ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल और जनसंपर्क से जुड़े क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की। इस मुलाकात में आर्थिक और औद्योगिक सहयोग पर खास जोर दिखाई दिया। भारत में पहली बार आयोजित इनोप्रोम इंडिया प्रदर्शनी इसी बढ़ती आर्थिक साझेदारी का प्रतीक बनी। 9 से 11 सितंबर तक आयोजित इस प्रदर्शनी में दोनों देशों की कंपनियों और उद्योग जगत की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि भारत-रूस संबंध अब कारोबार और औद्योगिक सहयोग की नई जमीन तलाश रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन का प्रदर्शनी में साथ जाना भी प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है। यह संदेश देता है कि दोनों देशों की रणनीतिक दोस्ती का अगला बड़ा आधार उद्योग, निवेश, तकनीक और व्यापार को बनाया जा रहा है।

2030 की आर्थिक साझेदारी.. कारोबार को नई ऊंचाई देने की तैयारी

मोदी और पुतिन ने आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 के क्रियान्वयन सहित व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। इसका मकसद दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को दीर्घकालिक आधार देना है। भारत के लिए रूस ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण साझेदार है, वहीं रूस के लिए भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को बढ़ाना दोनों के लिए रणनीतिक जरूरत भी है। इनोप्रोम इंडिया के जरिए उद्योगों को एक मंच पर लाना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। आने वाले समय में बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, तकनीक, विनिर्माण और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ता है तो इसका सीधा असर द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों पर दिखाई दे सकता है। यानी भारत-रूस संबंधों की कहानी अब केवल हथियारों और ऊर्जा तक सीमित नहीं रहने  वाली। उद्योग और तकनीक भी इस साझेदारी के नए स्तंभ बन सकते हैं।

पश्चिम एशिया और काला सागर.. भारत ने फिर रखा संवाद का रास्ता

मोदी और पुतिन की बातचीत सिर्फ द्विपक्षीय मुद्दों तक सीमित नहीं रही। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में चल रहे संघर्षों सहित कई क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार साझा किए। इन संघर्षों का असर समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक समुद्री मार्गों में अस्थिरता का सीधा असर व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर भारत की स्पष्ट नीति दोहराई कि संघर्षों का समाधान संवाद और कूटनीति के रास्ते से ही निकाला जाना चाहिए। साथ ही भारत ने शांति प्रयासों में योगदान देने की अपनी तत्परता भी जताई। यह भारत की उस कूटनीतिक नीति को दिखाता है जिसमें वह किसी एक खेमे का हिस्सा बनने के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए वैश्विक संकटों के समाधान की भूमिका निभाना चाहता है।

पुतिन का रूस आने का न्योता.. रिश्तों में भरोसे का अगला पड़ाव

मुलाकात का सबसे बड़ा कूटनीतिक संदेश राष्ट्रपति पुतिन का प्रधानमंत्री मोदी को रूस आने का निमंत्रण देना है। पुतिन ने 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए मोदी को रूस आने का न्योता दिया, जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया। शिखर सम्मेलन की तारीख दोनों देशों की आपसी सुविधा के अनुसार राजनयिक माध्यमों से तय होगी। दोनों नेताओं ने भारत-रूस के विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए लगातार संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच भी दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय रिश्तों को स्थिर बनाए रखा है। मुलाकात का एक भावनात्मक और सांस्कृतिक पक्ष भी सामने आया। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को तिरुवल्लुवर के महान ग्रंथ तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया। यह उपहार सिर्फ एक पुस्तक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को भाषाई और भौगोलिक सीमाओं से आगे ले जाने का संदेश भी है। कुल मिलाकर, मोदी-पुतिन मुलाकात ने एक बार फिर साफ किया कि भारत-रूस संबंध बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद मजबूत आधार पर खड़े हैं। रक्षा और ऊर्जा से लेकर व्यापार, उद्योग, अंतरिक्ष और तकनीक तक साझेदारी का विस्तार हो रहा है। ब्रिक्स में भारत की अध्यक्षता के दौरान हुई यह मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे वैश्विक मंच पर भारत-रूस समन्वय और द्विपक्षीय रिश्तों की निरंतरता दोनों का संदेश गया है। अब नजर इस बात पर होगी कि 24वें वार्षिक शिखर सम्मेलन और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 के जरिए यह साझेदारी अगले स्तर तक कैसे पहुंचती है।

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