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BRICS Summit 2026:विकास बनाम पर्यावरण नहीं…विकास के साथ पर्यावरण…ब्रिक्स से पीएम मोदी का बड़ा संदेश

DigitalDesk by DigitalDesk
September 13, 2026
in मुख्य समाचार
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BRICS Summit 2026
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BRICS Summit 2026 | नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन विश्व नेताओं के साथ ‘फैमिली फोटो’ खिंचवाई। तस्वीर में BRICS देशों के नेता एक साथ नजर आए। यह तस्वीर सम्मेलन में भारत की मेजबानी और वैश्विक नेताओं की मौजूदगी को दर्शाती है।

भारत मंडपम में चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक विकास की उस पुरानी बहस को नई दिशा देने की कोशिश की है, जिसमें अक्सर आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक-दूसरे का विरोधी मान लिया जाता है। पीएम मोदी का स्पष्ट संदेश है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। यानी दुनिया को ऐसी विकास यात्रा चाहिए, जिसमें अर्थव्यवस्था भी आगे बढ़े, रोजगार भी बढ़े, तकनीक भी विकसित हो और प्रकृति का संतुलन भी बना रहे।

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विकास की रफ्तार के साथ प्रकृति की चिंता

21वीं सदी की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि दुनिया की बढ़ती आबादी की जरूरतें पूरी करते हुए प्राकृतिक संसाधनों को बचाया कैसे जाए। सड़क, उद्योग, बिजली, आवास, परिवहन और डिजिटल ढांचे के विस्तार के बिना विकास संभव नहीं है। लेकिन दूसरी तरफ अनियंत्रित औद्योगिकीकरण, प्रदूषण, जंगलों की कटाई, जल संकट और जलवायु परिवर्तन पूरी मानवता के सामने गंभीर चुनौती बन चुके हैं। यही वजह है कि ब्रिक्स जैसे बड़े वैश्विक मंच से भारत का यह संदेश महत्वपूर्ण हो जाता है। भारत यह संकेत दे रहा है कि विकास की कीमत पर्यावरण को चुकाकर नहीं, बल्कि हरित और टिकाऊ तकनीक के जरिए विकास की नई राह बनाकर चुकानी चाहिए। यह सोच केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी है।

एआई और डिजिटल तकनीक बने किसानों की ताकत

ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल कृषि और किसानों की जरूरतों को तकनीक से जोड़ने पर भी जोर दिया। एआई, भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे को खेती के साथ जोड़ने की पहल इसी बदलाव का संकेत है। यहां पर्यावरण और विकास का संबंध और स्पष्ट हो जाता है। अगर तकनीक के जरिए किसान को मौसम की सटीक जानकारी मिले, पानी का बेहतर इस्तेमाल हो, मिट्टी की गुणवत्ता समझी जा सके और उर्वरकों का जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल हो, तो उत्पादन बढ़ाने के साथ प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव भी कम किया जा सकता है। यानी भविष्य की खेती केवल ज्यादा उत्पादन की खेती नहीं होगी। वह कम पानी, कम संसाधन और ज्यादा तकनीकी दक्षता वाली खेती होगी। ब्रिक्स का डिजिटल कृषि नेटवर्क इसी दिशा में एक बड़ा प्रयोग बन सकता है। अलग-अलग देशों के अनुभव और तकनीक एक-दूसरे से जुड़ेंगे तो कृषि क्षेत्र जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से मुकाबला करने में ज्यादा सक्षम हो सकता है।

महत्वपूर्ण खनिज। विकास की नई दौड़ का नया मोर्चा

आधुनिक अर्थव्यवस्था की एक और बड़ी जरूरत महत्वपूर्ण खनिज हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और अत्याधुनिक तकनीक के लिए इन खनिजों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। लेकिन यहां भी एक बड़ी चुनौती है। खनिजों की मांग बढ़ेगी तो खनन भी बढ़ेगा। और अगर खनन में पर्यावरणीय संतुलन की अनदेखी हुई, तो हरित अर्थव्यवस्था की पूरी अवधारणा पर ही सवाल खड़े हो सकते हैं। यही कारण है कि महत्वपूर्ण खनिजों को केवल आर्थिक संसाधन के तौर पर नहीं, बल्कि रणनीतिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ देखने की जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी का यह कहना कि तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों का हथियार की तरह इस्तेमाल साझा प्रगति में बाधा बन सकता है, वैश्विक सहयोग की जरूरत को रेखांकित करता है। आने वाले समय में जिन देशों के पास तकनीक, खनिज और ऊर्जा संसाधन होंगे, उनका वैश्विक प्रभाव भी बढ़ेगा। ऐसे में प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग जरूरी होगा।

सप्लाई चेन से टिकाऊ विकास तक

ब्रिक्स लॉजिस्टिक सप्लाई चेन सहयोग ढांचे की बात भी इसी बड़ी तस्वीर का हिस्सा है। कोरोना महामारी और वैश्विक संघर्षों ने दिखाया कि दुनिया की आपूर्ति श्रृंखलाएं कितनी संवेदनशील हैं। अगर जरूरी वस्तुओं, ऊर्जा, खाद्य पदार्थों और तकनीकी संसाधनों की आपूर्ति बार-बार बाधित होगी, तो इसका असर आर्थिक विकास के साथ आम लोगों पर भी पड़ेगा। इसलिए मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन केवल आर्थिक जरूरत नहीं है। यह ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता से भी जुड़ी है। लेकिन भविष्य की सप्लाई चेन ऐसी होनी चाहिए जो केवल तेज और सस्ती न हो, बल्कि कम प्रदूषण वाली, ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण के अनुकूल भी हो। यहीं से विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन का असली मॉडल सामने आता है।

भारत का संदेश…प्रकृति बचाकर विकास की नई राह

भारत की सोच में पर्यावरण संरक्षण और विकास को साथ लेकर चलने की अवधारणा नई नहीं है। भारतीय परंपरा में प्रकृति को संसाधन भर नहीं, बल्कि जीवन का आधार माना गया है। आज दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, ग्लेशियरों के पिघलने, समुद्र के बढ़ते स्तर और चरम मौसम की घटनाओं से जूझ रही है। ऐसे समय में विकास का पुराना मॉडल सवालों के घेरे में है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि किसी देश की अर्थव्यवस्था कितनी तेजी से बढ़ रही है। सवाल यह भी है कि उस विकास की पर्यावरणीय कीमत कितनी है और उसका लाभ समाज के कितने लोगों तक पहुंच रहा है। यही वजह है कि ब्रिक्स का मंच भारत के लिए अपनी विकास सोच को दुनिया के सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर है।

भारत यह बताने की कोशिश कर रहा है कि विकास को रोकना समाधान नहीं है। समाधान यह है कि विकास की दिशा बदली जाए। ऊर्जा के क्षेत्र में स्वच्छ विकल्प बढ़ें, उद्योगों में संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो, खेती में पानी और मिट्टी की रक्षा हो, शहरों में हरित ढांचा विकसित हो और तकनीक का इस्तेमाल आम लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए हो।

ब्रिक्स से दुनिया को बड़ा संदेश

ब्रिक्स का विस्तार वैश्विक अर्थव्यवस्था में इस समूह की भूमिका को और बड़ा बना रहा है। ऐसे समय में पर्यावरण, तकनीक, कृषि, खनिज और आर्थिक सहयोग को एक साथ जोड़ना भविष्य की वैश्विक व्यवस्था की जरूरत भी है। प्रधानमंत्री मोदी का संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें विकास को रोकने की बात नहीं है। बल्कि विकास को जिम्मेदार, समावेशी और टिकाऊ बनाने की बात है। आज दुनिया को ऐसी अर्थव्यवस्था चाहिए जो रोजगार पैदा करे, तकनीक को बढ़ावा दे, किसानों को मजबूत बनाए और उद्योगों को गति दे। लेकिन इसके साथ जंगल, नदियां, मिट्टी, हवा और प्राकृतिक संसाधन भी सुरक्षित रहें। कुल मिलाकर ब्रिक्स के मंच से भारत का संदेश साफ है। विकास और पर्यावरण के बीच चुनाव करने का समय अब खत्म होना चाहिए। भविष्य उस मॉडल का है, जहां आर्थिक प्रगति प्रकृति की कीमत पर नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़े। यही विकास की असली स्थिरता है और यही आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी।

Tags: #BRICS Summit 2026#environment #PM Modi major message
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