मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित ब्रिक्स देशों की 11वीं सांस्कृतिक बैठक का तीन दिवसीय आयोजन ‘भोपाल घोषणा पत्र’ के साथ संपन्न हो गया। बैठक में ब्रिक्स के 11 देशों के 55 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का केंद्र बिंदु संस्कृति, विरासत संरक्षण, नवाचार और सतत विकास रहा।
- तीन दिन की बैठक का घोषणापत्र के साथ समापन
- 11 देशों के 55 प्रतिनिधि हुए शामिल
- विरासत संरक्षण पर साझा रोडमैप तैयार
- डिजिटल तकनीक से संस्कृति बचाने पर जोर
- भोपाल की सांस्कृतिक पहचान को मिला वैश्विक मंच
समापन अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि बैठक के दौरान सदस्य देशों के बीच संस्कृति और विरासत को लेकर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने बताया कि पहली बार सांस्कृतिक क्षेत्र के लिए समयबद्ध लक्ष्यों को निर्धारित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है।
पहली बार तैयार हुआ ‘भोपाल घोषणा पत्र’
इस सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘भोपाल घोषणा पत्र’ को माना जा रहा है। इसमें सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने और ऐतिहासिक संपदाओं को उनके मूल देशों में वापस लाने जैसी पहलों को शामिल किया गया है। भविष्य में होने वाली ब्रिक्स सांस्कृतिक बैठकों में इस घोषणा पत्र को संदर्भ के तौर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
विरासत संरक्षण के लिए साझा रोडमैप
तीन दिनों तक चले मंथन में सदस्य देशों ने अपनी कला, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े अनुभव साझा किए। विरासत के संरक्षण के लिए साझा रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी। साथ ही डिजिटल तकनीक के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहर का दस्तावेजीकरण, संरक्षण और नई पीढ़ी तक पहुंच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
भोपाल में दिखी दुनिया की सांस्कृतिक विविधता
सम्मेलन सिर्फ बैठकों तक सीमित नहीं रहा। ब्रिक्स देशों से आए कलाकारों ने अपने-अपने देशों की कला, संगीत, नृत्य और परंपराओं की प्रस्तुति दी। भारत की ओर से राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक भी प्रस्तुत की गई। इन कार्यक्रमों ने विभिन्न देशों की सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर सामने रखा।
‘संस्कृति रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम’
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि संस्कृति किसी देश की पहचान होने के साथ-साथ अलग-अलग समाजों और राष्ट्रों को जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी है। ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद बढ़ने से आपसी समझ और सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई गई।
समापन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन को मध्य प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि राजा भोज की नगरी भोपाल में दुनिया के प्रमुख देशों के प्रतिनिधियों का एकत्र होना प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री ने भारत की सांस्कृतिक सोच को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ से जोड़ते हुए कहा कि भारतीय परंपरा पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की रही है।
तीन दिनों तक चले इस सम्मेलन ने मध्य प्रदेश की कला, संस्कृति और विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान किया। ‘भोपाल घोषणा पत्र’ के साथ संपन्न हुआ आयोजन ब्रिक्स देशों के बीच भविष्य के सांस्कृतिक सहयोग के लिए साझा आधार तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है





