मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पिछले दिनों छात्रों से बातचीत के दौरान एक बेहद सामान्य लेकिन दिलचस्प सवाल सामने रखा— “पंखा घूमने से हवा क्यों लगती है और पंखा बंद होते ही हवा क्यों रुक जाती है, क्या कभी आपने इसके पीछे का कारण सोचा है?” है?” मुख्यमंत्री का यह सवाल भले दैनिक नरोजमर्रा में आम आदमी की जिंदगी बहुत गहरा जुड़ा हो, लेकिन इस सवाल के पीछे का विज्ञान का एक बहुत रोचक सिद्धांत काम करता है
गर्मी के मौसम में पंखा हमारे लिए राहत का सबसे आसान साधन है। धूप से लौटने के बाद जैसे ही पंखा चलता है, चेहरे और शरीर पर हवा महसूस होती है और कुछ ही देर में पसीना सूखने लगता है। लेकिन पंखा बंद होते ही वही कमरा अचानक गर्म महसूस होने लगता है। सवाल यह है कि आखिर पंखा कमरे में नई हवा पैदा करता है या पहले से मौजूद हवा को ही हमारे शरीर तक पहुंचाता है?
पंखा हवा बनाता नहीं, हवा को गति देता है
असल में पंखा हवा पैदा नहीं करता। कमरे में पहले से मौजूद हवा ही पंखे के ब्लेड घूमने के कारण गति पकड़ती है। पंखे के ब्लेड एक खास कोण पर बने होते हैं। जब वे तेजी से घूमते हैं तो आसपास की हवा को धक्का देते हैं और हवा का प्रवाह पैदा होता है। यही गतिशील हवा जब हमारे शरीर से टकराती है तो हमें हवा चलने का एहसास होता है। यानी पंखा कमरे में हवा की मात्रा को अचानक बढ़ा नहीं देता, बल्कि मौजूद हवा को एक दिशा में तेजी से गतिशील कर देता है।
पसीना सूखने से मिलती है ठंडक
यहां विज्ञान का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा सामने आता है। पंखे की हवा हमारे शरीर पर मौजूद पसीने के वाष्पीकरण को तेज करती है। पसीना जब त्वचा से वाष्प बनकर उड़ता है तो शरीर से ऊष्मा ले जाता है। इससे हमें ठंडक महसूस होती है। यानी पंखे की हवा सिर्फ इसलिए राहत नहीं देती कि हवा ठंडी होती है, बल्कि चलती हवा शरीर से गर्मी हटाने और पसीने के वाष्पीकरण की प्रक्रिया को तेज करती है।
पंखा बंद होते ही क्या बदल जाता है?
जैसे ही पंखा बंद होता है, हवा की तेज गति धीरे-धीरे कम हो जाती है। कमरे की हवा फिर अपेक्षाकृत स्थिर हो जाती है। शरीर से पसीने के वाष्पीकरण की ग ति भी कम हो जाती है और गर्मी अधिक महसूस होने लगती है। इसलिए ऐसा नहीं है कि पंखा बंद होते ही कमरे से हवा गायब हो जाती है। हवा मौजूद रहती है, लेकिन उसका तेज प्रवाह खत्म हो जाता है।
तेज पंखा ज्यादा ठंडक क्यों देता है?
पंखे की गति बढ़ने पर हवा का प्रवाह भी सामान्यतः बढ़ता है। इससे शरीर के आसपास मौजूद गर्म और नम हवा तेजी से हटती है और पसीने का वाष्पीकरण तेज होता है। यही वजह है कि तेज पंखे के सामने हमें ज्यादा ठंडक महसूस होती है। हालांकि, पंखा कमरे के तापमान को एयर कंडीशनर की तरह कम नहीं करता। वह मुख्य रूप से हवा की गति बढ़ाकर शरीर को ठंडा महसूस कराता है।
रोजमर्रा की चीज में छिपा विज्ञान
मुख्यमंत्री मोहन यादव का छात्रों के साथ इस तरह का सवाल-जवाब विज्ञान को रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ने का दिलचस्प उदाहरण है। पंखा हमारे घरों में सबसे सामान्य उपकरणों में से एक है, लेकिन उसके पीछे काम करने वाले वायु प्रवाह, दबाव और वाष्पीकरण जैसे वैज्ञानिक सिद्धांतों पर हम आमतौर पर ध्यान नहीं देते।
तो अगली बार जब पंखा चलाते ही आपको हवा महसूस हो, तो याद रखिए—पंखा हवा पैदा नहीं कर रहा, बल्कि कमरे की मौजूद हवा को गति देकर आपके शरीर तक पहुंचा रहा है। और पसीने के तेजी से वाष्पीकरण के कारण आपको ठंडक का एहसास हो रहा है।




