महिला आरक्षण पर बीजेपी का मिशन मोड, यूपी में तेज हुआ जनसमर्थन अभियान
अभियान के जरिए घर-घर पहुंच रही सरकार
महिला आरक्षण को लेकर भारतीय जनता पार्टी अब मिशन मोड में नजर आ रही है। उत्तर प्रदेश में पार्टी ने बड़े स्तर पर जनसमर्थन अभियान शुरू किया है, जिसके तहत गांव-गांव और घर-घर तक इस बिल की जानकारी पहुंचाई जा रही है। पार्टी का दावा है कि यह सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं को राजनीति में बराबरी दिलाने का ऐतिहासिक अवसर है। इसी मकसद से महिला मोर्चा की टीम लगातार जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर समर्थन जुटा रही है।
गीता साक्य बोलीं—महिलाओं के लिए ऐतिहासिक मौका
BJP की राज्यसभा सांसद गीता साक्य ने इस अभियान को महिलाओं के लिए “सौभाग्य का क्षण” बताया। उनका कहना है कि 2023 में बिल पास होने के बाद महिलाओं के मन में यह सवाल था कि इसे लागू कब किया जाएगा, और अब वह समय आ गया है। उन्होंने कहा कि यह कानून देश की हर महिला को राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर देगा, चाहे वह किसी भी गांव या छोटे क्षेत्र से क्यों न आती हो।
हर महिला को मिलेगा मंच’—बीजेपी का दावा
बीजेपी नेताओं का कहना है कि इस बिल के लागू होने के बाद राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा गया कि सरकार ने हमेशा महिलाओं को सशक्त बनाने को प्राथमिकता दी है। उनका मानना है कि अब महिलाएं सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि देश की नीतियों को भी दिशा देने में अहम भूमिका निभाएंगी।
मिस कॉल अभियान से जुटाया जा रहा समर्थन
अभियान के तहत महिलाओं से सीधे जुड़ने के लिए एक मिस कॉल अभियान भी चलाया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि बड़ी संख्या में महिलाएं खुद आगे आकर इस बिल का समर्थन कर रही हैं। फोन कॉल और डिजिटल माध्यमों के जरिए समर्थन दर्ज कराया जा रहा है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि कितनी महिलाएं इस पहल के साथ खड़ी हैं।
महिलाओं में उत्साह, खुद कर रहीं संपर्क
बीजेपी का दावा है कि उत्तर प्रदेश की महिलाएं खुद पार्टी कार्यकर्ताओं से संपर्क कर रही हैं और संसद की कार्यवाही देखने में भी दिलचस्पी दिखा रही हैं। यह उत्साह बताता है कि महिला आरक्षण का मुद्दा जमीनी स्तर पर भी प्रभाव डाल रहा है। पार्टी इसे “नीचे से ऊपर” उठ रही मांग के रूप में पेश कर रही है, जहां महिलाएं खुद अपने अधिकार के लिए जागरूक हो रही हैं।
‘33% नहीं, 100% हौसला’—नया नारा
अभियान के दौरान एक नया नारा भी सामने आया है—“33% आरक्षण नहीं, 100% हौसला”। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और भागीदारी को बढ़ाने का प्रयास है। उनका मानना है कि इससे समाज और राजनीति दोनों में सकारात्मक बदलाव आएगा।
महिला सशक्तिकरण को जोड़कर पेश कर रही सरकार
सरकार इस बिल को सिर्फ राजनीतिक सुधार के रूप में नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण के व्यापक एजेंडे से जोड़कर पेश कर रही है। आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर महिलाओं को मजबूत बनाने के दावे के साथ इसे एक बड़े बदलाव के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।
सियासत के साथ जनभावना भी जुड़ी
हालांकि इस पूरे मुद्दे पर राजनीतिक बहस जारी है, लेकिन बीजेपी इसे जनभावना से जोड़ने की कोशिश कर रही है। पार्टी का मानना है कि महिलाओं का बढ़ता समर्थन इस बिल को मजबूती देगा। अब देखना होगा कि संसद में इस पर क्या फैसला होता है और यह अभियान राजनीतिक तौर पर कितना असर डालता है।