ट्रंप के एक ऐलान से शेयर बाजार में तूफानी तेजी, सेंसेक्स-निफ्टी ने भरी उड़ान; निवेशकों की संपत्ति में भारी इजाफा

Trump trigger a massive stock market

भारत समेत दुनिया भर के शेयर बाजारों में सप्ताह की शुरुआत जबरदस्त तेजी के साथ हुई। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते को माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटाने की घोषणा के बाद वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और इसका सीधा असर शेयर बाजारों पर दिखाई दिया।

अमेरिका-ईरान समझौते से बदला बाजार का मूड

सेंसेक्स 76 हजार के पार, निफ्टी ने लगाई लंबी छलांग

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बढ़ा भरोसा

इंडिगो से अडानी पोर्ट्स तक शेयरों में जबरदस्त उछाल

वैश्विक बाजारों में भी दिखी रिकॉर्ड तेजी

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती कारोबार से ही खरीदारी का माहौल बन गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक BSE Sensex 76,000 के स्तर को पार कर गया, जबकि NIFTY 50 ने भी मजबूत बढ़त दर्ज की। बाजार खुलते ही सेंसेक्स में 1100 अंकों से अधिक की तेजी देखने को मिली, वहीं निफ्टी 330 अंकों से ज्यादा उछल गया।

शुक्रवार की तेजी को मिला सोमवार का साथ

पिछले कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को भी बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 1,695 अंकों की मजबूती के साथ 75,527.95 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 461 अंकों की बढ़त के साथ 23,622.90 के स्तर पर बंद हुआ था। सोमवार को आई नई सकारात्मक खबरों ने इस तेजी को और मजबूत कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को लंबे समय बाद एक ऐसा वैश्विक संकेत मिला है, जिसने बाजार में अनिश्चितता को कम किया है और जोखिम लेने की क्षमता बढ़ाई है।

ट्रंप के ऐलान से क्यों बढ़ा भरोसा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरा हो चुका है और होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी रोक-टोक के खोलने की मंजूरी दे दी गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र में तनाव के कारण तेल आपूर्ति बाधित होने और कीमतों में तेजी की आशंका बनी हुई थी। समझौते के बाद यह आशंका कम हुई और निवेशकों ने राहत की सांस ली।

कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट

शेयर बाजार में आई तेजी के पीछे एक और बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही। समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जाता है। कच्चा तेल सस्ता होने से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की लागत पर दबाव कम होता है। इससे महंगाई नियंत्रित रखने में मदद मिलती है और कंपनियों की लागत घटने से उनके मुनाफे में सुधार की संभावना बढ़ती है। यही कारण है कि निवेशकों ने बाजार में जमकर खरीदारी की।

इन शेयरों ने मचाया धमाल

बाजार की इस तेजी में लार्जकैप कंपनियों के लगभग सभी प्रमुख शेयर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए।

सबसे अधिक तेजी वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे—

  • InterGlobe Aviation (IndiGo) – 4.05%
  • Larsen & Toubro – 3.60%
  • Bajaj Finance – 3.56%
  • Eternal Limited – 3.40%
  • Adani Ports and Special Economic Zone – 3.80%

इन शेयरों में खरीदारी का दबाव इतना मजबूत रहा कि शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों को शानदार रिटर्न देखने को मिला।

मिडकैप शेयरों में भी जबरदस्त उछाल

सिर्फ बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि मिडकैप शेयरों में भी निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया।

प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे—

  • Ashok Leyland – 5%
  • Muthoot Finance – 4.60%
  • Hindustan Petroleum Corporation Limited – 4.40%
  • Godrej Properties – 4%
  • GMR Airports Infrastructure – 3.30%

एशियाई बाजारों ने भी दिखाई ताकत

भारतीय बाजार में तेजी के संकेत पहले ही एशियाई बाजारों से मिलने शुरू हो गए थे। अमेरिका-ईरान समझौते की खबर के बाद जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया के प्रमुख सूचकांकों में भी जोरदार बढ़त दर्ज की गई। जापान का निक्केई सूचकांक हजारों अंकों की मजबूती के साथ कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी मजबूत बढ़त में रहे। इसके अलावा भारतीय बाजार के लिए अग्रिम संकेतक माने जाने वाले गिफ्ट निफ्टी ने भी 24,000 के स्तर को पार करते हुए मजबूत तेजी का संकेत दिया था।

निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से शेयर बाजार को मजबूती मिल सकती है। तेल की कीमतों में गिरावट, महंगाई के दबाव में कमी और वैश्विक व्यापार मार्गों के सामान्य होने से निवेशकों का विश्वास बढ़ा है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि केवल तेजी देखकर निवेश के फैसले नहीं लेने चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा बना रहता है और निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार या मार्केट एक्सपर्ट की राय लेना जरूरी है। फिलहाल इतना तय है कि ट्रंप के एक ऐलान ने वैश्विक बाजारों का माहौल पूरी तरह बदल दिया है और सप्ताह की शुरुआत निवेशकों के लिए बेहद उत्साहजनक रही है। भारतीय बाजार में आई इस तेजी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर घरेलू बाजारों पर कितना गहरा पड़ता है।

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