पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही उथल-पुथल अब नए मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ असंतोष जताने वाले नेताओं की संख्या बढ़ने के साथ-साथ बागी खेमे के भीतर नेतृत्व को लेकर भी संघर्ष शुरू हो गया है। ताजा राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की एंट्री है, जिनके बागी खेमे से जुड़ने की अटकलों ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
टीएमसी में बढ़ा नेतृत्व संकट, बागी खेमे में भी छिड़ी सियासी जंग
नए समीकरणों के बीच बागियों की कमान को लेकर खींचतान तेज
बताया जा रहा है कि अब तक बागी सांसदों की अगुवाई कर रहीं काकोली घोष दस्तीदार को नए नेतृत्व की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, छह बार सांसद रह चुके सुदीप बंदोपाध्याय का अनुभव और संगठन में उनकी पकड़ उन्हें बागी गुट का स्वाभाविक नेता बना सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद और नेता पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। बागी खेमे की ओर से दावा किया जा रहा है कि बड़ी संख्या में सांसद उनके संपर्क में हैं और अलग राजनीतिक रणनीति पर विचार चल रहा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
उधर, ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व स्थिति को संभालने की कोशिश में जुटे हैं। लेकिन लगातार सामने आ रही नाराजगी और नेतृत्व को लेकर उभर रहे नए समीकरणों ने पार्टी के लिए चुनौती बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी खेमे को कोई मजबूत और सर्वमान्य चेहरा मिल जाता है तो तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठनात्मक संकट और गहरा सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बागी गुट की कमान आखिर किसके हाथ में जाएगी। क्या काकोली घोष अपना नेतृत्व बरकरार रख पाएंगी या फिर सुदीप बंदोपाध्याय नए नेतृत्व के रूप में उभरेंगे? आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस सवाल का जवाब कई नए राजनीतिक समीकरण तय कर सकता है।