घर बैठे करें शिव पूजा, आसान है पूरी विधि
सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे शुभ समय माना जाता है। इस दौरान शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन यदि किसी कारण मंदिर जाना संभव न हो तो घर पर ही शुद्ध मिट्टी से शिवलिंग बनाकर विधि-विधान से पूजा की जा सकती है। शास्त्रों में पार्थिव शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक बनाए गए मिट्टी के शिवलिंग की पूजा करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
ऐसे तैयार करें पार्थिव शिवलिंग
शिवलिंग बनाने के लिए सबसे पहले स्वच्छ और शुद्ध मिट्टी का चयन करें। कोशिश करें कि मिट्टी में कंकड़, घास या अन्य अशुद्धियां न हों। मिट्टी को अच्छी तरह छानने के बाद उसमें थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर मुलायम आटा जैसा गूंथ लें। इसके बाद सबसे पहले गोलाकार आधार (पीठिका) तैयार करें। फिर उसके ऊपर अंडाकार आकार में शिवलिंग बनाएं और उसे सावधानीपूर्वक आधार पर स्थापित करें।
यदि शिवलिंग की सतह कहीं से खुरदरी दिखाई दे रही हो तो गीले हाथ या मुलायम ब्रश की सहायता से उसे चिकना किया जा सकता है। चाहें तो सफेद रंग से भगवान शिव के त्रिपुंड की तीन क्षैतिज रेखाएं बनाएं और बीच में लाल बिंदु लगाकर उसे आकर्षक स्वरूप दें। हालांकि धार्मिक दृष्टि से सादगी भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पूजा में रखें इन बातों का ध्यान
घर पर बने मिट्टी के शिवलिंग का अभिषेक गंगाजल, स्वच्छ जल, दूध या पंचामृत से किया जा सकता है। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक, सफेद पुष्प, भस्म, चंदन और अक्षत अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप या शिव चालीसा एवं रुद्राष्टक का पाठ करना शुभ माना जाता है।
ध्यान रखें कि पूजा पूरी श्रद्धा, स्वच्छता और सात्विक भाव से की जाए। शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल को इधर-उधर न फैलने दें और पूजा स्थल को साफ रखें।
विसर्जन का सही तरीका भी जानिए
मिट्टी से बने शिवलिंग के विसर्जन को लेकर भी सावधानी बरतना आवश्यक है। इसे सड़क, सार्वजनिक स्थान, नदी किनारे बिना आवश्यकता या किसी पेड़ के नीचे छोड़ना उचित नहीं माना जाता। बेहतर होगा कि पूजा पूर्ण होने के बाद शिवलिंग को घर के किसी गमले, विशेष रूप से तुलसी के गमले की मिट्टी में स्थापित कर दें। नियमित रूप से पानी देने पर यह धीरे-धीरे उसी मिट्टी में विलीन हो जाएगा।
इस विधि से धार्मिक आस्था का सम्मान भी बना रहता है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी मिलता है। यही कारण है कि आजकल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पर्यावरण-अनुकूल पार्थिव शिवलिंग बनाकर सावन में भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं।
आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
मिट्टी से बने शिवलिंग की पूजा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। प्लास्टर या रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियों की तुलना में मिट्टी का शिवलिंग पूरी तरह प्राकृतिक होता है और आसानी से मिट्टी में मिल जाता है। सावन के इस पावन अवसर पर घर में पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा करना भगवान शिव की भक्ति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम माना जा सकता है।





