90 दिन के संवैधानिक प्रावधान के तहत चुनाव आयोग ने जारी किया पूरा कार्यक्रम
ढाका। बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि 20 अगस्त को राष्ट्रपति पद के लिए मतदान कराया जाएगा। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुए सर्वोच्च संवैधानिक पद को भरने के लिए यह चुनाव कराया जा रहा है। चुनाव आयोग ने नामांकन से लेकर मतदान तक का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है। माना जा रहा है कि यह चुनाव केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल और सत्ता संतुलन की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव भी साबित होगा।
चुनाव आयोग ने जारी किया विस्तृत कार्यक्रम
बांग्लादेश चुनाव आयोग (EC) ने राजधानी ढाका स्थित निर्वाचन भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना जारी की। चुनाव आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने बताया कि 13 अगस्त को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक नामांकन पत्र जमा किए जाएंगे।
इसके बाद 16 अगस्त को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। यदि किसी उम्मीदवार के दस्तावेजों में कोई आपत्ति होती है तो नियमानुसार उसका परीक्षण होगा। वहीं 18 अगस्त तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। अंतिम सूची जारी होने के बाद 20 अगस्त को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक संसद भवन के सत्र कक्ष में मतदान होगा।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि केवल एक वैध उम्मीदवार मैदान में रहेगा, तो मतदान की आवश्यकता नहीं होगी और उसे निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त संभालेंगे पूरी प्रक्रिया
राष्ट्रपति चुनाव के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन को रिटर्निंग ऑफिसर बनाया गया है। चुनाव आयोग के अनुसार राष्ट्रपति चुनाव की सभी संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
आयोग को संसद सचिवालय से निर्वाचक मंडल की सूची पहले ही प्राप्त हो चुकी है। राष्ट्रपति चुनाव में सांसद ही मतदान करते हैं, इसलिए संसद सचिवालय की सूची के आधार पर पूरी प्रक्रिया संचालित होगी।
राष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद खाली हुआ पद
राष्ट्रपति चुनाव कराने की नौबत तब आई जब 24 जुलाई को तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद संसद अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
संवैधानिक व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति पद रिक्त होने की स्थिति में नए राष्ट्रपति का चुनाव समयसीमा के भीतर कराना अनिवार्य होता है। इसी कारण चुनाव आयोग ने प्रक्रिया में तेजी लाते हुए कार्यक्रम घोषित किया।
संविधान के अनुच्छेद 123(2) का पालन
बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 123(2) में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि राष्ट्रपति का पद इस्तीफे, मृत्यु या किसी अन्य कारण से रिक्त होता है तो 90 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति का चुनाव कराया जाना आवश्यक है।
इसी संवैधानिक बाध्यता को पूरा करने के लिए चुनाव आयोग ने तेजी से तैयारी पूरी की। चुनाव कार्यक्रम घोषित करने से पहले आयोग ने संसद के कार्यवाहक अध्यक्ष से औपचारिक परामर्श भी किया, जैसा कि राष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1991 में निर्धारित है।
स्पीकर से सलाह के बाद घोषित हुआ चुनाव
राष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1991 के अनुसार चुनाव कार्यक्रम जारी करने से पहले चुनाव आयोग को संसद अध्यक्ष या कार्यवाहक अध्यक्ष से सलाह लेना अनिवार्य होता है।
इसी प्रक्रिया के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने 28 जुलाई को कार्यवाहक स्पीकर बैरिस्टर कैसर कमाल के साथ बैठक की। इस बैठक के बाद चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया।
संसद की भूमिका होगी सबसे अहम
बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव आम जनता सीधे नहीं करती। राष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है। इसलिए संसद में जिस दल या गठबंधन के पास बहुमत होता है, उसका उम्मीदवार सामान्यतः मजबूत स्थिति में माना जाता है।
ऐसे में इस चुनाव में राजनीतिक दलों की रणनीति, उम्मीदवार चयन और संसदीय गणित सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि विपक्ष संयुक्त उम्मीदवार उतारता है तो मुकाबला रोचक हो सकता है, जबकि सर्वसम्मति बनने की स्थिति में निर्विरोध चुनाव भी संभव है।
राजनीतिक संकेतों पर भी रहेगी नजर
हालांकि राष्ट्रपति का पद बांग्लादेश में मुख्य रूप से संवैधानिक माना जाता है, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों में इसका महत्व बढ़ जाता है। राष्ट्रपति कई संवैधानिक नियुक्तियों, आपात परिस्थितियों और औपचारिक सरकारी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसी वजह से राजनीतिक दल राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के चयन को लेकर गंभीर मंथन कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि चुनाव सर्वसम्मति से होगा या फिर मुकाबले की स्थिति बनेगी।
क्यों अहम है यह चुनाव?
बांग्लादेश इस समय कई राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में नए राष्ट्रपति का चयन केवल एक संवैधानिक औपचारिकता नहीं बल्कि राजनीतिक स्थिरता और संस्थागत संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए राष्ट्रपति के चुनाव से देश की संवैधानिक संस्थाओं को स्थिरता का संदेश मिलेगा और सत्ता परिवर्तन के बाद की राजनीतिक प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।
अब सबकी नजर 20 अगस्त पर
फिलहाल चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार है। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं तो 20 अगस्त को संसद भवन में मतदान कराया जाएगा। वहीं यदि केवल एक उम्मीदवार वैध पाया जाता है तो उसे निर्विरोध राष्ट्रपति घोषित किया जाएगा।
कुल मिलाकर, बांग्लादेश का यह राष्ट्रपति चुनाव केवल नए राष्ट्राध्यक्ष के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की संवैधानिक व्यवस्था, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और राजनीतिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा और राजनीतिक दलों की रणनीति इस चुनाव को और अधिक दिलचस्प बना सकती है।





