मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद मानसून एक बार फिर रफ्तार पकड़ने की तैयारी में है। अब तक सामान्य से कम बारिश के कारण खेती, जलाशयों और पेयजल व्यवस्था को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राहत भरी खबर दी है। अगले तीन दिनों तक प्रदेश के 16 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस), उत्तर प्रदेश के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) और सक्रिय मानसून ट्रफ के संयुक्त प्रभाव से प्रदेश के उत्तरी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में अच्छी वर्षा होने की संभावना है। यदि यह सिस्टम लगातार सक्रिय रहा तो अब तक दर्ज बारिश की कमी में भी उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।
नए मौसम सिस्टम से बदलेगा मिजाज किसानों को राहत की उम्मीद कई जिलों में गरज-चमक और तेज बारिश के आसार
18 प्रतिशत कम बारिश ने बढ़ाई चिंता
इस मानसून सीजन में मध्यप्रदेश में अब तक लगभग 16.3 इंच वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 18 प्रतिशत कम है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अपेक्षित बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों की बढ़वार प्रभावित हुई है। कई जलाशयों में जलस्तर सामान्य से नीचे है, जबकि भूजल स्तर में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। यही वजह है कि किसान और प्रशासन दोनों अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
प्रदेश के 49 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि केवल छह जिलों में औसत से अधिक वर्षा हुई है। भोपाल, जबलपुर, सागर, रीवा और नर्मदापुरम संभाग के अधिकांश जिले अब भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं।
16 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, सागर, दमोह, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मैहर और अशोकनगर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर मध्यप्रदेश में अगले 72 घंटे मानसून सबसे अधिक सक्रिय रहेगा। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है।
इन मौसम प्रणालियों से बदला मौसम
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय प्रदेश का मौसम तीन प्रमुख सिस्टम से प्रभावित हो रहा है। पहला, पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ है। दूसरा, उत्तर प्रदेश के ऊपर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। तीसरा, मानसून ट्रफ उत्तर भारत की ओर सक्रिय स्थिति में है। इन तीनों प्रणालियों के संयुक्त असर से मध्यप्रदेश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में वर्षा की गतिविधियां तेज हुई हैं।
बुधवार को भी कई जिलों में इसका असर दिखाई दिया। सीधी में सबसे अधिक 74 मिलीमीटर और ग्वालियर में 57 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में भी हल्की से मध्यम बारिश होने से लोगों को उमस से राहत मिली।
किसानों के लिए राहत की उम्मीद
अच्छी बारिश की संभावना किसानों के लिए राहत लेकर आ सकती है। इस बार सोयाबीन, धान, मक्का और दलहन की फसलें पर्याप्त वर्षा नहीं मिलने से प्रभावित हुई हैं। यदि अगले कुछ दिनों तक लगातार बारिश होती है तो खेतों में नमी बढ़ेगी और फसलों की स्थिति में सुधार आएगा। साथ ही जलाशयों और बांधों का जलस्तर बढ़ने से सिंचाई व्यवस्था भी बेहतर होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त का पहला पखवाड़ा मानसून के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा। यदि इस दौरान अच्छी बारिश होती है तो खरीफ सीजन की फसलें काफी हद तक संभल सकती हैं।
भोपाल समेत बड़े शहरों में भी बदलेगा मौसम
राजधानी भोपाल में बुधवार को पूरे दिन बादल छाए रहे और कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हुई। मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर सहित कई बड़े शहरों में अगले दो से तीन दिनों तक बादल छाए रहेंगे और रुक-रुक कर बारिश हो सकती है। इससे तापमान में गिरावट आएगी और उमस से राहत मिलेगी।
बुधवार को जबलपुर प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं इंदौर 27.9 डिग्री सेल्सियस के साथ अपेक्षाकृत सबसे ठंडा प्रमुख शहर रहा।
सावधानी भी जरूरी
मौसम विभाग ने भारी बारिश वाले जिलों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। तेज बारिश के दौरान नदी-नालों के पास जाने से बचने, बिजली चमकने के समय खुले स्थानों में न रुकने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। निचले इलाकों में जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे रास्तों पर आवागमन प्रभावित होने की भी आशंका जताई गई है।
मानसून से जुड़ी सबसे बड़ी उम्मीद
अगले तीन दिन मध्यप्रदेश के मानसून के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। यदि मौसम विभाग का पूर्वानुमान सही साबित होता है तो न केवल बारिश की कमी काफी हद तक पूरी होगी, बल्कि किसानों, जल संसाधनों और आम लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी। फिलहाल प्रदेश की निगाहें आसमान पर टिकी हैं और उम्मीद है कि मानसून अब पूरे जोर के साथ लौटेगा।





