दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों में शामिल Meta अब केवल विज्ञापनों के भरोसे अपना कारोबार चलाने के बजाय सब्सक्रिप्शन आधारित मॉडल पर भी तेजी से आगे बढ़ रही है। Facebook, Instagram और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म वर्षों से मुफ्त सेवाएं देते रहे हैं, लेकिन अब कंपनी अलग-अलग प्रीमियम सुविधाओं के लिए मासिक शुल्क लेने की रणनीति पर काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर होने वाला भारी खर्च है, जिसे पूरा करने के लिए Meta नए राजस्व स्रोत तलाश रही है।
AI की दौड़ में आगे निकलने के लिए Meta कर रही है रिकॉर्ड स्तर का निवेश
टेक इंडस्ट्री में AI को भविष्य की सबसे बड़ी तकनीक माना जा रहा है और Meta भी इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अरबों डॉलर खर्च कर रही है। कंपनी ने AI रिसर्च, डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और नई तकनीकों के विकास पर निवेश बढ़ा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Meta ने 2026 के लिए अपने पूंजीगत खर्च का अनुमान बढ़ाकर 125 से 145 अरब डॉलर के बीच कर दिया है। इस निवेश का बड़ा हिस्सा AI आधारित सेवाओं और सुपरकंप्यूटिंग क्षमताओं को विकसित करने में लगाया जाएगा।
Meta के नए सब्सक्रिप्शन प्लान से कंपनी को मिलेगा अतिरिक्त राजस्व
कंपनी ने विभिन्न यूजर्स के लिए अलग-अलग सब्सक्रिप्शन विकल्प पेश किए हैं। भारत में Facebook Plus, Instagram Plus और WhatsApp Plus जैसी सेवाओं की शुरुआती कीमत करीब 99 रुपये प्रति माह रखी गई है। वहीं एडवांस AI सुविधाओं का उपयोग करने वाले यूजर्स के लिए Meta One Plus और Meta One Premium जैसे प्रीमियम प्लान भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन सेवाओं के जरिए कंपनी नियमित और स्थायी आय का नया स्रोत तैयार करना चाहती है।
भारत में भी AI विस्तार के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू
Meta की AI रणनीति केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। भारत को भी कंपनी अपने महत्वपूर्ण बाजारों में शामिल कर रही है। हाल ही में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के साथ साझेदारी के तहत गुजरात के जामनगर में AI डेटा सेंटर विकसित करने की योजना सामने आई है। इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय और वैश्विक ग्राहकों के लिए उन्नत AI समाधान तैयार करना है। इससे भारत Meta के AI इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
विज्ञापन पर अत्यधिक निर्भरता Meta के लिए बनी बड़ी चुनौती
कंपनी की आय का अधिकांश हिस्सा अभी भी विज्ञापनों से आता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष Meta की कुल कमाई का 97.6 प्रतिशत हिस्सा विज्ञापन कारोबार से प्राप्त हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक स्रोत पर इतनी अधिक निर्भरता लंबे समय में जोखिम पैदा कर सकती है। यही कारण है कि Meta अब सब्सक्रिप्शन, AI सेवाओं और बिजनेस टूल्स के जरिए आय के नए रास्ते विकसित कर रही है।
AI विस्तार के साथ बढ़ रही हैं कंपनी के भीतर की चुनौतियां भी
AI पर बड़े निवेश के साथ Meta को आंतरिक स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की संख्या में कटौती, नई टीमों का पुनर्गठन, बढ़ती लागत और प्रतिभाशाली विशेषज्ञों को दिए जा रहे बड़े पैकेज चर्चा का विषय बने हुए हैं। हालांकि कंपनी का मानना है कि AI भविष्य का सबसे बड़ा अवसर है और इसी वजह से वह अभी से बड़े स्तर पर निवेश कर रही है ताकि आने वाले वर्षों में तकनीकी प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति हासिल की जा सके।





