जैसे ही ठंड बढ़ती है, लोग घरों को गर्म रखने के लिए हीटर, ब्लोअर और अंगीठी का इस्तेमाल बढ़ा देते हैं। ये साधन भले ही कमरे को आरामदायक बना दें, लेकिन कई बार यह गर्माहट जानलेवा साबित होती है। हर साल देशभर में कई लोग सोते-सोते दम घुटने से मौत का शिकार हो जाते हैं, क्योंकि बंद कमरे में आग या हीटर चलाने से ऑक्सीजन तेजी से कम होती है और खतरनाक गैसें बढ़ जाती हैं।
बंद कमरा + आग = बढ़ता घुटन का खतरा
बंद कमरे में अंगीठी या कोई भी जलने वाली चीज जलाने पर ऑक्सीजन तेजी से खत्म होती है। ताज़ी हवा नहीं मिलने के कारण वातावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड बनती है। डॉक्टर अमन (मग्गो हॉस्पिटल, वेस्ट दिल्ली) के अनुसार यह गैस धीरे-धीरे शरीर में घुसकर गंभीर नुकसान पहुंचाती है।
कार्बन मोनोऑक्साइड शरीर को कैसे मार देती है?
कार्बन मोनोऑक्साइड खून के हीमोग्लोबिन से चिपककर कार्बोक्सी-हीमोग्लोबिन बनाती है। इसकी मात्रा ज्यादा होते ही इंसान गहरी बेहोशी यानी डीप कोमा जैसी स्थिति में चला जाता है। कई मामलों में व्यक्ति सोते-सोते ही मर जाता है और उसे पता भी नहीं चलता कि क्या हुआ।
किन घटनाओं ने बढ़ाई चिंता?
हर साल सर्दियों में कई ऐसी घटनाएं रिपोर्ट होती हैं जहाँ परिवारों की नींद कभी नहीं खुलती। इस साल भी जनवरी और सितंबर में दम घुटने की कई घटनाएं दर्ज हुईं। खतरा लगातार बढ़ रहा है क्योंकि सर्दी में लोग कमरे बंद कर सोने की आदत नहीं छोड़ते।
क्या करें ताकि हादसा न हो — अपनाएं ये जरूरी सावधानियां
कमरे को पूरी तरह बंद न रखें, हल्की हवा आती रहे।
आग या अंगीठी से सोने से पहले लपटें पूरी तरह बुझा दें।
हीटर के पास ज्वलनशील चीजें न रखें।
सोने से पहले हीटर हमेशा बंद कर दें।
कमरे में पानी का बर्तन रखें ताकि हवा सूखे नहीं।
सांस में तकलीफ, सीने में भारीपन महसूस हो तो तुरंत बंद कमरे से बाहर जाएं।
लगातार हीटर का उपयोग करना पड़े तो गर्म तरल पदार्थ लेते रहें और स्किन पर मॉइश्चराइज़र लगाएं।
नोट: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.





