एक से ज्यादा मकान, कैपिटल गेन या विदेशी संपत्ति है तो ITR-2 भरना होगा, जानिए किसे कौन-सा फॉर्म चुनना चाहिए

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ITR-2 को लेकर दूर करें भ्रम

नई दिल्ली। आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है और इस बार भी बड़ी संख्या में करदाता इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि उन्हें ITR-1 (सहज) भरना चाहिए या ITR-2। आयकर नियमों के अनुसार फॉर्म का चयन आपकी आय के स्रोत, संपत्ति और निवेश की प्रकृति पर निर्भर करता है। गलत फॉर्म भरने पर रिटर्न अमान्य हो सकता है या बाद में संशोधन की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले सही फॉर्म का चयन करना बेहद जरूरी है।

किन लोगों के लिए है ITR-1 (सहज)?

ITR-1 उन व्यक्तिगत करदाताओं के लिए है जिनकी आय का स्वरूप सरल है। यदि आपकी कुल वार्षिक आय 50 लाख रुपये तक है, आय केवल वेतन, पेंशन या एक आवासीय संपत्ति से है और आपको किसी प्रकार का कैपिटल गेन या विदेशी आय नहीं हुई है, तो आप ITR-1 दाखिल कर सकते हैं।

इन परिस्थितियों में भरना होगा ITR-2

आयकर विभाग के नियमों के मुताबिक निम्नलिखित स्थितियों में करदाता को ITR-2 का चयन करना होगा—

  • आपके पास एक से अधिक मकान हैं, चाहे उनसे किराया मिल रहा हो या नहीं।
  • आपकी कुल कर योग्य आय 50 लाख रुपये से अधिक है।
  • आपने शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी, सोना या अन्य परिसंपत्तियां बेचकर कैपिटल गेन कमाया है।
  • यदि आपको कैपिटल गेन के बजाय कैपिटल लॉस हुआ है, तब भी ITR-2 ही भरना होगा।
  • आपकी विदेश में कोई संपत्ति है या विदेश से आय प्राप्त होती है।
  • कृषि से आपकी आय 5 हजार रुपये से अधिक है।
  • आप किसी अनलिस्टेड कंपनी के शेयरधारक हैं।
  • आप किसी कंपनी के डायरेक्टर या बोर्ड सदस्य हैं।

बिजनेस करने वालों के लिए नहीं है ITR-2

यदि आपकी आय व्यवसाय (Business) या प्रोफेशन से होती है, तो ITR-2 आपके लिए उपयुक्त नहीं है। ऐसे मामलों में आय के स्वरूप के अनुसार ITR-3 या अन्य संबंधित फॉर्म भरना होता है।

ऑनलाइन कैसे भरें ITR-2?

आयकर रिटर्न ऑनलाइन दाखिल करने के लिए सबसे पहले आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें। इसके बाद ‘e-File’ मेन्यू में जाकर ‘Income Tax Return’ विकल्प चुनें और संबंधित Assessment Year का चयन करें।

सिस्टम कई जानकारियां पहले से भर देता है, लेकिन रिटर्न जमा करने से पहले सभी विवरणों का सावधानीपूर्वक मिलान करना जरूरी है। विशेष रूप से आय, बैंक खाते, टीडीएस, निवेश, संपत्ति और कैपिटल गेन से जुड़ी जानकारी सही है या नहीं, इसकी पुष्टि करें।

वेरिफिकेशन करना न भूलें

रिटर्न जमा करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है। यदि तय समय के भीतर रिटर्न का सत्यापन नहीं किया जाता, तो उसे दाखिल माना नहीं जाएगा। ई-वेरिफिकेशन आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग या अन्य उपलब्ध माध्यमों से किया जा सकता है।

गलत फॉर्म चुनने से हो सकती है परेशानी

कर विशेषज्ञों का कहना है कि रिटर्न भरने से पहले अपनी आय के सभी स्रोतों का सही आकलन करें। यदि आपकी आय या निवेश ITR-2 की श्रेणी में आते हैं और आप गलती से ITR-1 भर देते हैं, तो भविष्य में नोटिस, रिटर्न रिजेक्ट होने या संशोधित रिटर्न दाखिल करने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपकी आय, संपत्ति और निवेश के अनुसार सही ITR फॉर्म का ही चयन किया गया है। इससे रिटर्न प्रक्रिया आसान होगी और भविष्य में किसी तरह की कर संबंधी परेशानी से बचा जा सकेगा।

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