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UP में खेती बनी उम्मीद की नई कहानी…. योगी सरकार की नीतियों, तकनीक और भुगतान सुधार से ऐसे बदली किसान की तस्वीर

DigitalDesk by DigitalDesk
March 23, 2026
in उत्तर प्रदेश, कृषि, मुख्य समाचार, लखनऊ
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नए उत्तर प्रदेश’ में खेती बनी उम्मीद की नई कहानी

नीतियों, तकनीक और भुगतान सुधार से बदली किसान की तस्वीर

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उत्तर प्रदेश की खेती-किसानी, जो कभी संकट, कर्ज और निराशा का पर्याय मानी जाती थी, अब बदलाव की एक नई कहानी गढ़ने का दावा कर रही है। वर्षों तक सूखा, भुगतान में देरी, खराब क्रय व्यवस्था और तकनीकी अभाव से जूझते किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि मेहनत के बावजूद उन्हें उचित लाभ क्यों नहीं मिल पा रहा। गन्ना किसानों के बकाए भुगतान, धान-गेहूं खरीद केंद्रों की अव्यवस्था और दलहन-तिलहन की उपेक्षा ने कृषि व्यवस्था को कमजोर बना दिया था।

विशेषज्ञों की मानें तो उस दौर की सबसे बड़ी समस्या स्पष्ट नीति, दूरदृष्टि और किसान केंद्रित सोच का अभाव था। योजनाएं कागजों तक सीमित रहीं और किसान कर्ज व लागत के दबाव में फंसता चला गया। कई क्षेत्रों में हालात इतने खराब हुए कि किसानों के सामने आत्महत्या तक की नौबत आ गई। हालांकि, वर्ष 2017 के बाद राज्य में कृषि क्षेत्र को लेकर बड़े बदलावों का दावा किया जा रहा है। नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ के लक्ष्य के साथ कई योजनाएं शुरू की गईं। सरकार का कहना है कि अब फोकस केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर है।

गन्ना किसानों के भुगतान को लेकर सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां वर्षों तक बकाया भुगतान लंबित रहता था, वहीं अब रिकॉर्ड स्तर पर भुगतान किए जाने का दावा किया जा रहा है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया और खेती में निवेश की क्षमता बढ़ी।

इसी तरह न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद को मजबूत करने के लिए क्रय केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई और डिजिटल मॉनिटरिंग लागू की गई। धान और गेहूं की खरीद में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और सीधे खाते में भुगतान की व्यवस्था ने बिचौलियों की भूमिका को कम किया है। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने लगा है।

सिंचाई के क्षेत्र में भी विस्तार किया गया है। नहरों के पुनरुद्धार, सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं और बिजली आपूर्ति में सुधार से खेती की लागत कम करने का प्रयास हुआ है। साथ ही, आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और कृषि यंत्रों की उपलब्धता बढ़ाकर उत्पादकता में वृद्धि पर जोर दिया गया है। राज्य सरकार ने फसल विविधीकरण को भी प्राथमिकता दी है, ताकि किसान केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर न रहें। बागवानी, दुग्ध उत्पादन और पशुपालन को बढ़ावा देकर आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाना भी इस बदलाव का अहम हिस्सा है। लाखों महिलाएं अब कृषि और उससे जुड़े कार्यों के जरिए आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। इससे सामाजिक स्तर पर भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, बेहतर सड़कों और बाजार तक आसान पहुंच ने भी किसानों को लाभ पहुंचाया है। एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विस्तार से उत्पादों को समय पर बाजार तक पहुंचाना आसान हुआ है, जिससे नुकसान कम हुआ और मुनाफा बढ़ा है।

हालांकि, चुनौतियां अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। मौसम में बदलाव, लागत में वृद्धि और बाजार की अनिश्चितता जैसे मुद्दे अभी भी किसानों के सामने हैं। लेकिन सरकार का दावा है कि नीतिगत सुधार और लगातार प्रयासों से इन चुनौतियों का समाधान किया जा रहा है। कुल मिलाकर, ‘नए उत्तर प्रदेश’ में खेती-किसानी को संकट से निकालकर अवसर में बदलने की कोशिश की जा रही है। अगर यह बदलाव जमीन पर निरंतर और प्रभावी रूप से लागू होता रहा, तो आने वाले वर्षों में प्रदेश की कृषि न केवल आत्मनिर्भर होगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी बड़ी भूमिका निभा सकती है।

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