Uttar Pradesh Rural Transport System:योगी सरकार की रफ्तार… सिर्फ चार महीने में 56 जिलों तक पहुंची ग्राम परिवहन योजना

Uttar Pradesh Rural Transport System

‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना’ से गांवों को मिली नई रफ्तार… बस सेवा के साथ रोजगार और विकास को भी मिला बढ़ावा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मार्च 2026 में कैबिनेट से मंजूरी मिलने के महज चार महीनों के भीतर ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना’ को प्रदेश के 75 में से 56 जिलों तक पहुंचा दिया गया है। सरकार का लक्ष्य उन गांवों को भी सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ना है, जहां अब तक बस सेवा नहीं पहुंच पाई थी। इस योजना से ग्रामीणों को सुरक्षित, सस्ती और सुगम यात्रा के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं।

योजना के तहत गांवों को ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालयों से जोड़ने के लिए मिनी बसों का संचालन शुरू किया गया है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) के साथ निजी ऑपरेटरों को भी जोड़ा गया है, ताकि दूरदराज के इलाकों में परिवहन की कमी दूर की जा सके। सरकार का मानना है कि बेहतर परिवहन व्यवस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगी और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार तक पहुंच आसान बनाएगी।

परिवहन विभाग के अनुसार अब तक 1,012 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 858 आवेदनों को स्वीकृति दी जा चुकी है। वर्तमान में 56 जिलों में 215 मिनी बसें विभिन्न ग्रामीण मार्गों पर संचालित हो रही हैं। सबसे अधिक 43 बसें प्रयागराज में चल रही हैं। इसके अलावा मुजफ्फरनगर में 27, झांसी में 19, मथुरा में 18 और जौनपुर में 7 बसों का संचालन शुरू हो चुका है। बांदा, एटा, मऊ, जालौन और बलिया जैसे जिलों में भी बस सेवाओं का विस्तार लगातार किया जा रहा है।

यह योजना केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का भी बड़ा माध्यम बन रही है। मिनी बसों के संचालन में स्थानीय युवाओं को ड्राइवर और कंडक्टर के रूप में प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

योजना के तहत 15 से 28 सीटों वाली डीजल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक मिनी बसों को शामिल किया गया है। हालांकि, दिल्ली-एनसीआर से जुड़े उत्तर प्रदेश के जिलों में केवल सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों को ही संचालन की अनुमति दी गई है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण के लक्ष्य को भी बढ़ावा मिल सके। इन वाहनों की आयु सीमा भी निर्धारित की गई है ताकि यात्रियों को सुरक्षित और बेहतर परिवहन उपलब्ध कराया जा सके।

सरकार ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बस संचालन में परमिट की अनिवार्यता से भी छूट दी है। पात्र आवेदकों का चयन जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति कर रही है, जबकि योजना की नियमित निगरानी क्षेत्रीय प्रबंधकों और मंडलायुक्त स्तर पर की जा रही है।

ग्रामीण संपर्क, रोजगार और परिवहन सुविधा को एक साथ जोड़ने वाली यह योजना योगी सरकार की प्रमुख विकास परियोजनाओं में शामिल होती जा रही है। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में प्रदेश के सभी जिलों और अंतिम गांव तक बस सेवा पहुंचाकर ग्रामीण परिवहन की तस्वीर पूरी तरह बदल दी जाएगी।

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