योगी सरकार बनी अभिभावक’: यूपी में बेसहारा बच्चों के जीवन में उम्मीद की नई सुबह
ममता का हाथ, जिम्मेदारी का साथ
उत्तर प्रदेश में बेसहारा बच्चों और अनाथ बेटियों के जीवन में सरकार एक अभिभावक की भूमिका निभाती नजर आ रही है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चलाई जा रही मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना न सिर्फ आर्थिक मदद दे रही है, बल्कि जीवन के अहम मोड़ों पर साथ खड़ी होकर भविष्य संवारने का भरोसा भी दे रही है। कोविड-19 महामारी में माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए शुरू की गई यह योजना अब संवेदनशील शासन का मजबूत उदाहरण बन चुकी है।
66 बेटियों के ‘हाथ पीले’, सरकार बनी परिवार
इस योजना का सबसे भावुक पहलू उन बेटियों से जुड़ा है, जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ गया था। अब तक 66 बेसहारा बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक कराया जा चुका है। हर बेटी को नए जीवन की शुरुआत के लिए ₹1,01,000 की आर्थिक सहायता दी गई। यह सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उस सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन है, जो आमतौर पर परिवार निभाता है।
10 हजार से ज्यादा बच्चों को हर महीने सहारा
इस योजना का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में 10,904 से अधिक बच्चे इसका लाभ उठा रहे हैं।
सरकार की ओर से:
- हर बच्चे को ₹4000 प्रतिमाह सहायता
- यह मदद 18 वर्ष की आयु या 12वीं पास करने तक जारी
- बुनियादी जरूरतों की स्थिर व्यवस्था
यह आर्थिक सुरक्षा बच्चों के जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास ला रही है।
शिक्षा और डिजिटल इंडिया से जुड़ाव
सरकार ने सिर्फ आर्थिक मदद तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करने पर भी फोकस किया है।
- 8,000 से अधिक बच्चों को लैपटॉप वितरण
- डिजिटल शिक्षा से जुड़ने का अवसर
- 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए आवासीय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा
इससे ये बच्चे तकनीकी रूप से सक्षम बन रहे हैं और प्रतिस्पर्धी दुनिया में खुद को तैयार कर पा रहे हैं।
छत, सुरक्षा और सम्मान—तीनों का इंतजाम
जिन बच्चों का कोई सहारा नहीं है, उनके लिए:
- राजकीय बाल देखरेख संस्थाओं में मुफ्त आवास
- सुरक्षित और संरक्षित वातावरण
साथ ही, उनकी संपत्ति की सुरक्षा के लिए जिलाधिकारियों को संरक्षक नियुक्त किया गया है, ताकि कोई उनका हक न छीन सके।
सपनों को नहीं रुकने दे रही सरकार
योजना का दायरा 18 से 23 वर्ष तक के युवाओं तक भी बढ़ाया गया है।
जो छात्र:
- NEET, JEE, CLAT जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं
- उच्च शिक्षा हासिल करना चाहते हैं
उन्हें ₹2500 प्रतिमाह सहायता दी जा रही है, ताकि आर्थिक तंगी उनके सपनों के आड़े न आए।
संवेदनशील शासन का मॉडल
महिला कल्याण विभाग की पहल के तहत इस योजना का उद्देश्य साफ है—कोई भी बच्चा खुद को अकेला महसूस न करे।
यह योजना तीन स्तरों पर काम कर रही है:
- आर्थिक सुरक्षा
- शैक्षणिक सशक्तिकरण
- सामाजिक संरक्षण
कल के नागरिक, आज की जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश की यह पहल दिखाती है कि अगर नीति में संवेदनशीलता हो, तो शासन सिर्फ प्रशासन नहीं, बल्कि सहारा भी बन सकता है। ‘मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ ने हजारों बच्चों के जीवन में भरोसा लौटाया है—जहां सरकार सिर्फ योजनाएं नहीं चला रही, बल्कि रिश्ते निभा रही है। आने वाले समय में इस मॉडल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह बच्चों को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा में कितनी मजबूती से स्थापित कर पाती है।