चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव शी चिनफिंग का बुनियादी अनुसंधान को
मजबूत करने पर एक लेख बुधवार, 16 सितंबर को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय
समिति की प्रमुख पत्रिका ‘छ्यूशी जर्नल’ के इस साल के 18वें अंक में प्रकाशित किया जाएगा।
लेख में जोर दिया गया है कि बुनियादी अनुसंधान पूरी वैज्ञानिक व्यवस्था का आधार और तकनीकी
समस्याओं के समाधान का महत्वपूर्ण स्रोत है। साथ ही, यह वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा का अहम
मोर्चा भी है। किसी देश की वैज्ञानिक और तकनीकी ताकत को मापने का एक महत्वपूर्ण पैमाना
उसके बुनियादी अनुसंधान का स्तर है। लेख के मुताबिक, अगर चीन को दुनिया में विज्ञान और
प्रौद्योगिकी की अग्रणी शक्ति बनना है, तो बुनियादी अनुसंधान के स्तर को लगातार ऊपर उठाना
होगा।
लेख में कहा गया है कि सीपीसी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस (नवंबर 2012) के बाद से, केंद्रीय समिति
ने बुनियादी अनुसंधान को उच्च प्राथमिकता दी है। अनुसंधान के क्षेत्र में बेहतर योजना, निवेश
सुनिश्चित करने और संस्थागत व्यवस्था में नवाचार के जरिए चीन के बुनियादी अनुसंधान के स्तर
में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। हालांकि, दुनिया की प्रमुख विज्ञान और प्रौद्योगिकी शक्तियों की
तुलना में अभी भी अंतर मौजूद है। ऐसे में संकट की भावना और तात्कालिकता को बढ़ाते हुए, अधिक
प्रयास और ठोस उपायों के जरिए बुनियादी अनुसंधान को और मजबूत करना जरूरी है।
इस दिशा में लेख में चार प्रमुख क्षेत्रों पर जोर दिया गया है। पहला, बुनियादी अनुसंधान की समग्र
योजना को बेहतर बनाने की जरूरत है। लेख के अनुसार, बड़े विज्ञान के दौर में बुनियादी अनुसंधान
के संगठन और प्रबंधन का स्तर लगातार बढ़ रहा है। ‘चार अभिमुखताओं’ के रणनीतिक मार्गदर्शन
का पालन करते हुए, राष्ट्रीय तात्कालिक जरूरतों और दीर्घकालिक मांगों के आधार पर प्रमुख दिशाओं
और महत्वपूर्ण क्षेत्रों को स्पष्ट करना होगा। साथ ही, नई राष्ट्रीय व्यवस्था के लाभों का इस्तेमाल
करते हुए राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं, राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों और उच्च स्तरीय शोध
विश्वविद्यालयों की अग्रणी भूमिका को और मजबूत करना होगा।
दूसरा, बुनियादी अनुसंधान से जुड़ी प्रतिभाओं की टीम को मजबूत करने की जरूरत है। लेख में कहा
गया है कि बुनियादी अनुसंधान का विकास आखिरकार उच्च स्तरीय प्रतिभाओं पर निर्भर करता है।
इसलिए शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा प्रतिभा विकास को एक साथ आगे बढ़ाना होगा। इसके
साथ ही, देश में प्रतिभाओं को तैयार करने की गुणवत्ता में सुधार और युवा शोधकर्ताओं को अधिक
समर्थन देना होगा।
तीसरा, बुनियादी अनुसंधान के लिए समर्थन और जरूरी सुविधाओं को मजबूत किया जाना चाहिए।
इसके तहत दीर्घकालिक और स्थिर निवेश सुनिश्चित करना, बुनियादी अनुसंधान में वित्तीय निवेश
का अनुपात बढ़ाना, वित्तपोषण के नए माध्यमों का विस्तार करना और शोध की परिस्थितियों में
सुधार करना जरूरी है। इसके अलावा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी व्यवस्था में सुधार, बेहतर अनुसंधान
माहौल तैयार करने और खुली, समावेशी तथा विफलताओं को स्वीकार करने वाली नवाचार संस्कृति
विकसित करने पर भी ध्यान देना होगा।
चौथा, बुनियादी अनुसंधान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विस्तार किया जाना चाहिए। इसके
लिए वैश्विक नवाचार नेटवर्क में सक्रिय रूप से शामिल होना, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा और पर्यावरण
तथा जीवन और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक मुद्दों पर संयुक्त अनुसंधान करना और
अंतरराष्ट्रीय बड़े विज्ञान कार्यक्रमों में भाग लेना आवश्यक है।
साथ ही, लेख में कहा गया है कि बुनियादी अनुसंधान को मजबूत करने के लिए पूरी पार्टी और समाज
के संयुक्त प्रयास जरूरी हैं। सभी स्तरों की पार्टी समितियों और सरकारों को नीतिगत समर्थन बढ़ाना
होगा और जरूरी सेवाएं एवं सुविधाएं सुनिश्चित करनी होंगी, ताकि केंद्रीय समिति के फैसलों और
योजनाओं को प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू किया जा सके।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)