भोपाल का वन विहार राष्ट्रीय उद्यान इन दिनों सिर्फ वन्यजीवों को देखने की जगह नहीं, बल्कि प्रकृति और समाज के बीच संवाद का मंच बन गया है। वन्यजीव सप्ताह-2026 के तहत आयोजित गतिविधियों में जिस तरह विद्यार्थियों, युवाओं और प्रकृति प्रेमियों ने भाग लिया, उससे संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की कोशिश साफ दिखाई देती है। इस बार की थीम है—‘जुड़े आवास, वन्यजीवन का विकास’।
पक्षियों के जरिए प्रकृति की पाठशाला
2 अक्टूबर को आयोजित पक्षी अवलोकन कार्यक्रम में 109 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। करीब 54 पक्षी प्रजातियों का अवलोकन किया गया। लिटिल कॉर्मोरेंट, इंडियन पैराडाइज फ्लाईकैचर, इंडियन रॉबिन, प्लम हेडेड पैराकीट, स्पॉटेड डव और ब्लैक ड्रोंगो जैसी प्रजातियों ने प्रतिभागियों का ध्यान खींचा। महत्वपूर्ण बात यह रही कि कार्यक्रम सिर्फ पक्षियों को देखने तक सीमित नहीं रहा। प्रतिभागियों को उनकी पहचान, व्यवहार, आवास और पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई। यानी वन विहार में प्रकृति को किताब के बजाय सीधे अनुभव के जरिए समझने का अवसर मिला।
बच्चों से युवाओं तक संरक्षण की सीख
वन्यजीव संरक्षण की समझ बचपन से विकसित करने के लिए रचनात्मक गतिविधियों को भी कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया। स्टोन पेंटिंग, वुडन टाइल पेंटिंग और ‘खजाने की खोज’ जैसी प्रतियोगिताओं में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। विद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए आयोजित रचनात्मक कार्यशाला में पेपर क्राफ्ट, क्ले मॉडलिंग और स्टोन पेंटिंग के जरिए पक्षियों, तितलियों, फूलों और वन्यजीवों की आकृतियां बनाना सिखाया गया। इससे बच्चों के लिए संरक्षण का संदेश केवल भाषण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रचनात्मक गतिविधि के जरिए उनके अनुभव का हिस्सा बना।
54 प्रजातियां, लेकिन संदेश एक
पक्षियों की अलग-अलग प्रजातियां भले ही आकार, रंग और व्यवहार में अलग हों, लेकिन उनका अस्तित्व अपने प्राकृतिक आवास से जुड़ा है। यही इस वर्ष की थीम का मूल संदेश भी है। आवास सुरक्षित रहेगा तो जैव विविधता सुरक्षित रहेगी और जैव विविधता सुरक्षित रहेगी तो पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन भी मजबूत रहेगा। इसीलिए वन्यजीव सप्ताह जैसी गतिविधियों का महत्व सिर्फ एक सप्ताह तक सीमित नहीं है। ऐसे आयोजन लोगों को अपने आसपास मौजूद पक्षियों, पेड़-पौधों और दूसरे जीवों के प्रति संवेदनशील बनाने का माध्यम बन सकते हैं।
3 अक्टूबर को युवाओं की बारी
वन्यजीव सप्ताह का अगला चरण भी सहभागिता पर केंद्रित है। 3 अक्टूबर को दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए ‘वन विहार की आवाजें’ कार्यक्रम आयोजित होगा। वहीं विद्यालयीन और महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए ‘जुड़े आवास, वन्यजीवन का विकास’ विषय पर युवा संसद होगी। वन भवन में ‘स्टैंड फॉर वाइल्ड लाइफ’ कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में युवाओं को वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता से जुड़े मुद्दों पर संवाद का अवसर मिलेगा।
वन विहार से बड़ा संदेश
इस पूरे आयोजन की सबसे अहम बात यही है कि वन्यजीव संरक्षण को केवल जंगल और वन विभाग तक सीमित नहीं रखा गया। विद्यार्थियों, युवाओं, पक्षी प्रेमियों, कलाकारों और दिव्यांग बच्चों को जोड़कर इसे सामाजिक भागीदारी का विषय बनाने की कोशिश हुई है। वन्यजीव सप्ताह की गतिविधियां यह समझाने का माध्यम बन रही हैं कि प्रकृति का संरक्षण केवल वन्यजीवों को बचाने की कवायद नहीं, बल्कि उनके आवास, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास भी है। भोपाल का वन विहार इस संदेश को अनुभव, सहभागिता और रचनात्मकता के जरिए लोगों तक पहुंचा रहा है।





