प्रतीक यादव कौन थे? साधना गुप्ता और मुलायम सिंह यादव की कहानी, निजी रिश्तों से लेकर राजनीतिक चर्चाओं तक सबकुछ

Who was Prateek Yadav

प्रतीक यादव कौन थे? साधना गुप्ता और मुलायम सिंह यादव की कहानी, निजी रिश्तों से लेकर राजनीतिक चर्चाओं तक सबकुछ

उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे प्रभावशाली परिवारों में शामिल यादव परिवार एक बार फिर चर्चा में है। समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव के निधन की खबर ने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में शोक की लहर फैला दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था। वह लंबे समय से राजनीति से दूर रहकर निजी जीवन जी रहे थे।

कौन थे प्रतीक यादव?

प्रतीक यादव, मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के पुत्र थे। वह समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेता अखिलेश यादव के सौतेले भाई थे। उनका जन्म 7 जुलाई 1987 को हुआ था। यादव परिवार के अन्य सदस्यों के विपरीत प्रतीक यादव ने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी और बिजनेस तथा फिटनेस की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश की। उन्हें खास तौर पर रियल एस्टेट और जिम फिटनेस इंडस्ट्री में रुचि थी।

शिक्षा और शुरुआती जीवन

प्रतीक यादव ने अपनी शुरुआती शिक्षा लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीकॉम की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए वह यूनाइटेड किंगडम गए, जहां उन्होंने लीड्स यूनिवर्सिटी से MBA की डिग्री हासिल की। विदेश में पढ़ाई के बाद भी उन्होंने राजनीति में प्रवेश करने के बजाय निजी व्यवसाय और फिटनेस सेक्टर को चुना।

बिजनेस और फिटनेस में करियर

प्रतीक यादव ने पढ़ाई पूरी करने के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में काम किया। साथ ही वह फिटनेस के प्रति काफी जुनूनी थे। उन्होंने लखनऊ में ‘द फिटनेस प्लैनेट’ नाम से जिम भी शुरू किया था। फिटनेस ट्रेनिंग और बॉडीबिल्डिंग में उनकी गहरी रुचि थी। वे खुद को एक फिटनेस उद्यमी के रूप में स्थापित करना चाहते थे। इसके अलावा उन्हें लग्जरी कारों और लाइफस्टाइल का भी शौक बताया जाता है।

अपर्णा यादव से विवाह

प्रतीक यादव ने अपर्णा यादव से विवाह किया था। दोनों ने लंबे समय तक रिलेशनशिप के बाद 2012 में शादी की। अपर्णा यादव ने 2017 में राजनीति में कदम रखा और समाजवादी पार्टी के टिकट पर लखनऊ कैंट सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बाद में 2022 में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गईं। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं। बीते समय में दोनों के रिश्ते को लेकर तलाक की अफवाहें भी सामने आई थीं, जिन्हें प्रतीक यादव ने सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया था।

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साधना गुप्ता कौन थीं?

प्रतीक यादव की मां साधना गुप्ता उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक चर्चित नाम रही हैं, हालांकि उन्होंने कभी औपचारिक राजनीति में सक्रिय भूमिका नहीं निभाई। वे मूल रूप से औरैया जिले के बिधूना की रहने वाली थीं। उन्होंने नर्सिंग की ट्रेनिंग ली थी और शुरुआती दौर में सैफई के एक अस्पताल में कार्य किया। इसी दौरान उनका संपर्क मुलायम सिंह यादव के परिवार से हुआ। धीरे-धीरे वह राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में दिखाई देने लगीं, हालांकि उन्होंने हमेशा खुद को पर्दे के पीछे रखा।

पहली शादी और पारिवारिक पृष्ठभूमि

साधना गुप्ता की पहली शादी फर्रुखाबाद के व्यापारी चंद्र प्रकाश गुप्ता से हुई थी। बाद में 1990 में उनका तलाक हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, 1987 में प्रतीक यादव का जन्म उनकी पहली शादी के दौरान हुआ था। बाद में स्कूल रिकॉर्ड और दस्तावेजों में मुलायम सिंह यादव को उनके पिता के रूप में दर्ज किया गया। 2007 में मुलायम सिंह यादव ने एक हलफनामे में स्वीकार किया था कि साधना गुप्ता उनकी पत्नी हैं और प्रतीक यादव उनके पुत्र हैं।

मुलायम सिंह और साधना गुप्ता का रिश्ता

कहा जाता है कि मुलायम सिंह यादव और साधना गुप्ता की मुलाकात 1980 के दशक में हुई थी, जब साधना उनकी मां की देखभाल से जुड़ी थीं। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वर्षों बाद यह रिश्ता सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया। दोनों के बीच लगभग 20 साल का उम्र अंतर भी चर्चा का विषय रहा।

राजनीतिक और पारिवारिक विवाद

यादव परिवार के भीतर इस रिश्ते को लेकर लंबे समय तक मतभेद और विवाद की स्थिति बनी रही। कई बार राजनीतिक घटनाओं के दौरान परिवारिक तनाव भी सामने आया। समाजवादी पार्टी के भीतर सत्ता और उत्तराधिकार को लेकर हुए संघर्षों में भी इस पारिवारिक पृष्ठभूमि की चर्चा होती रही। हालांकि समय के साथ परिस्थितियां बदलती रहीं।

साधना गुप्ता का निधन

साधना गुप्ता का निधन वर्ष 2022 में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद हुआ था। वे फेफड़ों के संक्रमण से पीड़ित थीं। उनके निधन के बाद राजनीतिक जगत के कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया था और यादव परिवार के प्रति संवेदना जताई थी।

प्रतीक यादव का जीवन भले ही राजनीति से दूर रहा हो, लेकिन उनका नाम हमेशा एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़ा रहा। उनकी कहानी निजी रिश्तों, पारिवारिक जटिलताओं और राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच एक अलग पहचान बनाती है। उनका जीवन और साधना गुप्ता से जुड़ी कहानी उत्तर प्रदेश की राजनीति और यादव परिवार के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जो लंबे समय तक चर्चा में बना रहेगा।

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