कौन हैं कृष्ण मोहन? राम मंदिर ट्रस्ट की अंतरिम कमान संभालेंगे, पारदर्शिता बढ़ाना होगी पहली चुनौती

Krishna Mohan

चंपत राय के इस्तीफे के बाद नई जिम्मेदारी, बोले- दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले और आरोप के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से यह बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय के इस्तीफे के बाद इस्तीफा स्वीकार होने के बाद उनकी जिम्मेदारियां फिलहाल कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव के रूप में सौंपी गई हैं। पदभार संभालते ही उन्होंने साफ कर दिया कि ट्रस्ट की पहली प्राथमिकता दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और श्रद्धालुओं का भरोसा दोबारा मजबूत करना होगी।

बोले- दोषी कोई भी हो, सजा जरूर मिले

अंतरिम महासचिव बनने के बाद कृष्ण मोहन ने कहा कि मंदिर प्रबंधन में कुछ कमियां रह गई थीं, जिनका कुछ लोगों ने फायदा उठाया। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट की छवि को जो नुकसान पहुंचा है, उसे दूर करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। भविष्य में मंदिर में मिलने वाले हर दान और उसके उपयोग की जानकारी अधिक पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक की जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो सके।

कौन हैं कृष्ण मोहन?

73 वर्षीय कृष्ण मोहन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी और भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के पूर्व अधिकारी रह चुके हैं। वे उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के निवासी हैं और वर्तमान में पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघचालक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

उन्हें वर्ष 2025 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था। उन्होंने ट्रस्ट में कामेश्वर चौपाल का स्थान लिया था। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक कार्यशैली के कारण उन्हें अब अंतरिम महासचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

क्या है पूरा चढ़ावा विवाद?

राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन और अनियमितता का मामला जून में सामने आया था। आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। जांच के दौरान दानपात्रों से जुड़े मामलों में कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे, जिसके बाद महासचिव चंपत राय ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना इस्तीफा सौंप दिया। ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी पद छोड़ दिया।

अब सबसे बड़ी चुनौती भरोसा लौटाने की

कृष्ण मोहन के सामने सबसे बड़ी चुनौती मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और श्रद्धालुओं का विश्वास दोबारा कायम करने की होगी। ट्रस्ट ने संकेत दिए हैं कि दान संग्रह, लेखा-जोखा और निगरानी व्यवस्था में कई सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

22 जुलाई की बैठक पर टिकी निगाहें

ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। तब तक एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट आने की संभावना है। इसी रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट आगे की कार्रवाई, स्थायी महासचिव की नियुक्ति और प्रशासनिक सुधारों पर अंतिम निर्णय ले सकता है। फिलहाल कृष्ण मोहन के नेतृत्व में ट्रस्ट पारदर्शिता और जवाबदेही की नई शुरुआत करने की तैयारी में जुट गया है।

Exit mobile version