कौन हैं पूर्व आईएएस राधा चौहान..जो करेंगी CBSE के ‘सच’ की पड़ताल…एक महीने में सीधे पीएम को सौंपेंगी रिपोर्ट

former IAS Radha Chauhan

OSM विवाद के बाद केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर देशभर में उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के बाद सरकार ने मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति की कमान वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एस. राधा चौहान को सौंपी गई है। समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपनी होगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

CBSE की मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे सवालों ने शिक्षा जगत में नई बहस छेड़ दी है। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद उन्हें अपेक्षित अंक नहीं मिले। इसके बाद सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए और बोर्ड के शीर्ष स्तर पर भी बदलाव किए।

कौन हैं एस. राधा चौहान?

एस. राधा चौहान 1988 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रही हैं। प्रशासनिक सेवा में उनका करियर तीन दशक से अधिक का रहा है। उन्होंने 30 जून 2025 को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की सचिव के पद से सेवानिवृत्ति ली थी।

सेवानिवृत्ति के बाद भी केंद्र सरकार ने उनके अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन का अध्यक्ष नियुक्त किया। यह संस्था केंद्र सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता विकास से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी करती है। इस पद पर रहते हुए वह सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय को रिपोर्ट करती हैं।

कानून की पढ़ाई कर चुकी राधा चौहान को प्रशासनिक सुधार, शिक्षा और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में विशेषज्ञ माना जाता है। यही वजह है कि सरकार ने CBSE जैसे संवेदनशील मामले की जांच की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है।

शिक्षा और प्रशासन में लंबा अनुभव

राधा चौहान का प्रशासनिक अनुभव बेहद व्यापक रहा है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास, शहरी विकास और कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम किया है। विभिन्न जिलों में जिलाधिकारी और मंडल स्तर के प्रशासनिक पदों पर रहते हुए उन्होंने कई नीतिगत फैसलों को जमीन पर लागू किया।

उनका नाम विशेष रूप से शिक्षा क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए जाना जाता है। वर्ष 2011 से 2015 के बीच उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में संयुक्त सचिव के रूप में सेवाएं दीं। इस दौरान स्कूल शिक्षा में डिजिटल तकनीकों के उपयोग और प्रशासनिक सुधारों पर कई महत्वपूर्ण पहलें की गईं।

इसके अलावा वे नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) की चेयरपर्सन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी रह चुकी हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी प्रणालियों की गहरी समझ उन्हें OSM विवाद की जांच के लिए एक उपयुक्त विकल्प बनाती है।

नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़ा रहा सफर

राधा चौहान का प्रशासनिक करियर उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों और संस्थाओं से जुड़ा रहा है। वे गाजियाबाद की कमिश्नर, नोएडा प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की डिप्टी CEO रह चुकी हैं।

इसके अलावा उन्होंने बुलंदशहर, पीलीभीत, आगरा और मेरठ में अतिरिक्त आयुक्त तथा जिलाधिकारी के रूप में भी कार्य किया। शहरी विकास और प्रशासनिक सुधारों में उनके योगदान को व्यापक रूप से सराहा गया है। उनके नेतृत्व में कई विकास परियोजनाओं को गति मिली और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाया गया।

आखिर OSM विवाद क्या है?

CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को परीक्षा मूल्यांकन में पारदर्शिता और तेजी लाने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इस प्रणाली के तहत उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया जाता है। लेकिन हाल ही में बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

कुछ छात्रों का दावा है कि उनके उत्तरों का सही मूल्यांकन नहीं हुआ और उन्हें अपेक्षा से कम अंक मिले। सोशल मीडिया से लेकर शिक्षा विशेषज्ञों तक इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई। कई संगठनों ने मूल्यांकन प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई।

मामला बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप किया और CBSE के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल सिंह तथा सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दियाया। इसके साथ ही पूरे इस मामले की पूरी ततरह से निष्पक्ष जांच के लिए समिति गठित की गई। जिसकी अध्यक्ष यूपी कैडर की पूर्व IAS एस. राधा चौहान हैं।

रिपोर्ट पर टिकी हैं लाखों छात्रों की नजरें

अब देशभर के लाखों छात्र, अभिभावक और शिक्षा विशेषज्ञ इस समिति की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि जांच में यदि किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक खामी सामने आती है तो मूल्यांकन प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।

राधा चौहान के अनुभव, निष्पक्ष कार्यशैली और शिक्षा क्षेत्र की समझ को देखते हुए सरकार को उम्मीद है कि समिति तथ्यात्मक और पारदर्शी रिपोर्ट पेश करेगी। यह जांच केवल CBSE की साख से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि देश की सबसे बड़ी स्कूली परीक्षा प्रणाली में छात्रों के विश्वास को बनाए रखने की भी बड़ी चुनौती है। आने वाले एक महीने में समिति की रिपोर्ट शिक्षा व्यवस्था के लिए कई अहम सवालों के जवाब तय कर सकती है।

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