8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं निगाहें
केंद्र सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दिए जाने के बाद लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें बढ़ गई हैं। हालांकि, आयोग के गठन और सिफारिशों को लेकर अभी कई स्तरों पर चर्चा जारी है। इसी बीच, कर्मचारी पिछले वेतन आयोगों में मिली वेतन वृद्धि की तुलना भी कर रहे हैं और यह जानना चाहते हैं कि अब तक किस आयोग में सबसे कम सैलरी हाइक मिली थी।
7वें वेतन आयोग में मिली सबसे कम बढ़ोतरी
जानकारों के अनुसार, अब तक लागू सातों वेतन आयोगों में सबसे कम वास्तविक वेतन वृद्धि 7वें वेतन आयोग के दौरान हुई थी। वर्ष 2016 में लागू हुए इस आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था, लेकिन इसमें पहले से मिल रहे महंगाई भत्ते (DA) को मूल वेतन में समाहित कर दिया गया था। इसी कारण कर्मचारियों की वास्तविक वेतन वृद्धि औसतन केवल 14.3 प्रतिशत मानी गई। हालांकि, न्यूनतम वेतन को 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया गया था।
पिछले वेतन आयोगों में कितनी हुई बढ़ोतरी?
भारत में पहला वेतन आयोग 1947 में गठित हुआ था, जिसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे को व्यवस्थित करना था। इसके बाद समय-समय पर महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर वेतन आयोग गठित किए गए। चौथे वेतन आयोग में कर्मचारियों को करीब 27.6 प्रतिशत, पांचवें में 31 प्रतिशत और छठे वेतन आयोग में रिकॉर्ड 54 प्रतिशत तक वेतन वृद्धि मिली थी। छठे वेतन आयोग को आज भी कर्मचारियों के लिए सबसे लाभकारी माना जाता है।
क्या 8वां वेतन आयोग देगा बड़ी राहत?
अब सभी की निगाहें 8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं। कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए इस बार वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक फिटमेंट फैक्टर या संभावित वेतन वृद्धि को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में आने वाले महीनों में आयोग की सिफारिशें लाखों कर्मचारियों के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं।





