बंगाल में बीजेपी सरकार का नया चेहरा कैसा होगा?
सोशल इंजीनियरिंग, क्षेत्रीय संतुलन और हिंदुत्व की रणनीति पर बनेगा पहला मंत्रिमंडल
West Bengal की राजनीति में पहली बार BJP सरकार बनाने जा रही है। 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटों की ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल को लेकर उठ रहा है। पार्टी नेतृत्व मुख्यमंत्री चयन के साथ-साथ कैबिनेट गठन में बेहद सावधानी बरत रहा है, क्योंकि बीजेपी बंगाल में सिर्फ सरकार नहीं बल्कि लंबे समय तक मजबूत राजनीतिक आधार तैयार करने की रणनीति पर काम कर रही है।
शुक्रवार शाम केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की मौजूदगी में विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा सिर्फ सीएम चेहरे की नहीं, बल्कि उस पूरी टीम की है जो बंगाल में बीजेपी शासन का चेहरा बनेगी।
सोशल इंजीनियरिंग पर रहेगा पूरा फोकस
बीजेपी की रणनीति केवल राजनीतिक संतुलन तक सीमित नहीं रहने वाली। पार्टी बंगाल कैबिनेट को “सोशल इंजीनियरिंग मॉडल” के रूप में पेश करना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल में उत्तर बंगाल, जंगलमहल, दक्षिण बंगाल और मतुआ समुदाय को विशेष प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि उसकी सरकार सिर्फ शहरी या एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे बंगाल की सरकार होगी।
महिला नेताओं और अनुसूचित जाति-जनजाति समुदाय के चेहरों को भी बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। चुनाव में महिला वोटरों और दलित समाज का समर्थन बीजेपी की बड़ी ताकत बनकर उभरा था।
क्या शुभेंदु अधिकारी बनेंगे मुख्यमंत्री?
भवानीपुर सीट पर Mamata Banerjee को हराने वाले Suvendu Adhikari फिलहाल मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। हालांकि पार्टी अभी अंतिम फैसला लेने से पहले सभी समीकरणों पर विचार कर रही है। यदि शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री नहीं बनते हैं, तो उन्हें गृह या वित्त जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय दिए जा सकते हैं। प्रशासनिक अनुभव और संगठन में पकड़ के कारण उन्हें सरकार का सबसे ताकतवर चेहरा माना जा रहा है।
इन नेताओं को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष Samik Bhattacharya को भी मंत्रिमंडल में अहम जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। पार्टी उन्हें बौद्धिक और वैचारिक चेहरा मानती है। वहीं Agnimitra Paul ने महिला वोटरों के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई। ऐसे में उन्हें महिला एवं बाल विकास या उद्योग जैसे विभाग मिल सकते हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता Dilip Ghosh का संगठनात्मक अनुभव भी सरकार में उपयोग किया जा सकता है। उन्हें कैबिनेट में वरिष्ठ मंत्री के तौर पर जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है।
नए चेहरों और पुराने नेताओं का संतुलन
बीजेपी की कोशिश पुराने संगठनात्मक नेताओं और नए लोकप्रिय चेहरों के बीच संतुलन बनाने की है। पूर्व केंद्रीय मंत्री Nisith Pramanik, अर्जुन सिंह, गौरी शंकर घोष, श्रुति शेखर गोस्वामी, Roopa Ganguly, कौस्तव बागची, दीपक बर्मन और सजल घोष जैसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इसके अलावा पहली बार विधायक बने कुछ चेहरों ने भी सबका ध्यान खींचा है। इनमें आरजी कर मामले की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ, पूर्व IPS अधिकारी राजेश कुमार और पूर्व NSG कमांडो दीपंजन चक्रवर्ती शामिल हैं। बीजेपी इन्हें “संघर्ष और बदलाव” के प्रतीक के तौर पर पेश करना चाहती है।





