अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट ने पेट्रोल-डीजल को लेकर नई उम्मीद जगा दी है। 23 सितंबर को WTI क्रूड करीब 89.69 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 98.55 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। यानी दोनों प्रमुख बेंचमार्क हाल के ऊंचे स्तरों से नीचे आ चुके हैं। उपलब्ध बाजार रिपोर्टों में भी 23 सितंबर को भारतीय पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़े शहरों में कोई बदलाव नहीं दर्ज किया गया।
- 90 डॉलर के नीचे पहुंचा WTI
- 100 डॉलर के नीचे आया ब्रेंट
- मध्य-पूर्व से सप्लाई का दबाव
- भारत में अभी कीमतें स्थिर
- 24 सितंबर पर टिकी नजरें
सबसे बड़ा सवाल अब 24 सितंबर के संभावित मूल्य समायोजन को लेकर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की नरमी अगर बनी रहती है, तो इससे भारतीय तेल कंपनियों की लागत पर दबाव कुछ कम हो सकता है। हालांकि पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमत सिर्फ कच्चे तेल के भाव से तय नहीं होती। रुपये और डॉलर की विनिमय दर, परिवहन लागत, कर और तेल कंपनियों के मूल्य निर्धारण जैसे कई कारक भी अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं।
भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम अपेक्षाकृत स्थिर बने हुए हैं। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आंकड़ों के मुताबिक 21 सितंबर को दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर था। 23 सितंबर को भी प्रमुख शहरों में कीमतों में बड़े बदलाव की खबर नहीं है।
कच्चे तेल की मौजूदा गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति को लेकर बदली तस्वीर अहम है। मध्य-पूर्व से तेल आपूर्ति में सुधार की संभावनाओं और रणनीतिक समुद्री मार्गों से जुड़ी चिंताओं में कुछ नरमी ने बाजार के जोखिम प्रीमियम को नीचे खींचा है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण पेंच भी है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह गिरावट कुछ दिनों तक कायम रहती है, तभी घरेलू ईंधन कीमतों पर इसका असर ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे सकता है। एक-दो कारोबारी सत्र की गिरावट से तत्काल बड़ी कटौती होना जरूरी नहीं है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी उपभोक्ताओं की नजर इसी बदलाव पर है। 23 सितंबर के उपलब्ध आंकड़ों में भोपाल का पेट्रोल करीब 114 रुपये प्रति लीटर के आसपास बना हुआ है।
इसलिए 24 सितंबर का मूल्य समायोजन महत्वपूर्ण हो जाता है। कच्चा तेल नीचे, लेकिन घरेलू कीमतों में कटौती कितनी होगी, यह सिर्फ अंतरराष्ट्रीय गिरावट से तय नहीं होगा। तेल कंपनियों की लागत, रुपया-डॉलर स्थिति और स्थानीय करों का भी इसमें योगदान रहेगा। फिलहाल संकेत यह हैं कि वैश्विक क्रूड में राहत की जमीन तैयार हुई है, लेकिन इसका फायदा पेट्रोल पंप तक कितनी तेजी से पहुंचेगा, इस पर 24 सितंबर का फैसला निर्णायक होगा।





