पश्चिम बंगाल चुनाव : ममता बनर्जी जो करती हैं मां माटी और मानुष की बात… टीएमसी—बीजेपी मेें ताज की लड़ाई
ममता बनर्जी ये नाम इन दिनों देश की राजनीति में जोर-शोर से चल रहा है। पश्चिम बंगाल के चुनाव हों औऱ ममता दीदी सुर्खियों में नहीं हो ऐसा कैसे हो सकता है। पश्चिम बंगाल के चुनावों की दिल्चसप तस्वीर फिलहाल देश की जनता के सामने है। जिसमें एक तरफ ममता बेनर्जी हैं जो मां माटी और मानुष की बातें कर रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ विश्व का सबसे बड़ा राजनैतिक दल मतलब कि बीजेपी है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और उनकी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी दोनों पश्चिम बंगाल के ताज के लिए जी जान से जोर लगा रही है। इस बात ये इनकार नहीं किया जा सकता कि ममता बनर्जी की साख के चलते बीजेपी को पश्चिम बंगाल में ज्यादा जोर लगाना पड़ रहा है।
चलिए जानते है ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर के बार में कैसे वो राजनीति में आई। पहले कांग्रेस फिर तृणमूल कांग्रेस पार्टी बनाई कुछ समय वो एनडीए का भी हिस्सा रहीं और फिर उसके बाद अब वो इंडिया गठबंधन के साथ है। अपने बेबाक अंदाज और विवादित बयानों से सुर्खियों में रहने वाली ममता बनर्जी का जन्म कोलकाता में हुआ था। अपने स्कूल के दिनों से ही वे राजनीति से जुड़ गईं थीं। स्कूल के जमाने में उन्होंने सबसे पहले बंगला में कांग्रेस पार्टी का हाथ थामा। 1970 के समय राजनीति शुरू करने वाली ममता बनर्जी 1976 से 1980 तक महिला कांग्रेस की महासचिव रहीं। इसके बाद वे कोलकता दक्षिण में जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष रहीं और 1984 में उन्हें लोकसभा का सदस्य चुना गया। 1990 में पश्चिम बंगाल युवा कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं। इसके बाद 1996-97-9899 लगातार लोकसभा की सदस्य बनीं और अलग अलग मंत्रालयों की सलाहाकर समिति में भी रहीं।
1997 में की तृणमूल कांग्रेस की स्थापना
ममता बनर्जी ने 1997 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का साथ थोड़ दिया। यहीं से उनके और कांग्रेस के रास्ते अलग अलग हो गए। इसके बाद ममता बनर्जी ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृ्तव लाी एनडीए सरकार के साथ आ गई। एनडीए की सरकार में ममता बनर्जी ने रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सम्हाली । रेल मंत्री रहते हुए ममता बनर्जी ने 2002 में 2002 में, रेलमंत्री बनने के बाद, उन्होंने नई ट्रेनों का प्रस्ताव दिया। कुछ एक्सप्रेस ट्रेन सेवाओं का विस्तार किया। पर्यटन विकसित करने के उद्देश्य से कुछ ट्रेन की आवृत्ति में वृद्धि की और भारतीय रेलवे खानपान प्रबंध और पर्यटन निगम का प्रस्ताव भी दिया। इसके अलावा उन्होंने 31 मई 2009 से 19 जुलाई 2011 तक रेलमंत्री के इनके दूसरे कार्यकाल के दौरान कई नान-स्टॉप टूरंटो एक्सप्रेस ट्रेनों की शुरुआत की जो प्रमुख शहरों को अन्य यात्री गाड़ियों और महिला-विशेष ट्रेनों के माध्यम से आपस में जोड़ती हैं।
पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी
साल 2011 में ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने इस जीत के साथ दो रिकार्ड बनाए एक तो पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री होने का और दूसरा 34 साल पुरानी कम्युनिस्ट सरकार को बंगाल से उखाड फेकने का। ममता बनर्जी ने अपने करिश्माई नेतृत्व से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)की अगुवाई में 34 वर्ष पुरानी वाम मोर्चा सरकार को उखाड़कर फेंक दिया था।
सिंगूर प्रदर्शन के दौरान जनता का मिला साथ
ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगला सरकार के खिलाफ 2006-2008 के बीच जमकर प्रर्दशन किया। ये प्रर्दशन सिंगूर में किसानों की जमीन को जबरन अधिग्रहण के खिलाफ था। सरकार यहां पर टाटा का नैनो प्लांट डालना चाहती थी। लेकिन ममता बनर्जी के प्रदर्शन के चलते ये फसैला वापस लिया गया।
पश्चिम बंगाल में ममता के लिए अब बीजेपी बड़ी चुनौती
मई 2022 के चुनावों के दौरान ममता बेनर्जी दो सीटों से चुनावी मैदान में थी। जिनमें उन्हें ननंदीग्राम से चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था और इसी चुनाव में बीजेपी प्रमुख विपक्षी दल के तौर पर उभरर सामने आईं। इसके बाद हालिया चुनावों में बीजेपी और ममता के बीच कड़ी टक्कर देती नजर आ रहीं है। झगड़ा मतदाता सूची को लेकर है तो वहीं ममता लगातार मां मानुष और माटी की बात कर रही हैं।





