पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल तेजी से गर्म हो गया है। आरोप-प्रत्यारोप, नए गठबंधन और बड़े चुनावी वादों के बीच अब सियासत एक नए विवाद के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है—“मुसलमानों की जमीन पर मंदिर निर्माण” का मुद्दा। इस बहस को हवा दी है आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने, जिन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
ममता सरकार पर ‘तुष्टिकरण’ का आरोप
हुमायूं कबीर ने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी मुस्लिम समुदाय के वोट लेकर सत्ता में आईं, लेकिन अब वह हिंदू वोटरों को साधने के लिए मंदिर निर्माण पर जोर दे रही हैं। उनका दावा है कि राजारहाट क्षेत्र में मुस्लिमों की जमीन पर दुर्गा मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है, जो समुदाय विशेष के साथ अन्याय है। कबीर ने कहा कि अगर सरकार हिंदुओं के लिए काम कर सकती है, तो वह भी मुस्लिम समुदाय के हितों के लिए खुलकर राजनीति करेंगे। उन्होंने इसे “दोहरी नीति” करार देते हुए सवाल उठाया कि क्या विकास और धार्मिक पहचान को मिलाकर राजनीति की जा रही है।
‘बाबरी’ विवाद से चर्चा में आए कबीर
हुमायूं कबीर पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) का हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन एक विवादित बयान के बाद पार्टी से निष्कासित कर दिए गए थे। उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद बनाने की बात कही थी, जिसके बाद सियासी विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी AJUP का गठन किया और अब खुद को एक अलग मुस्लिम नेतृत्व के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
ओवैसी के साथ गठबंधन, नई रणनीति
2026 चुनाव को ध्यान में रखते हुए कबीर ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ गठबंधन किया है। यह गठबंधन राज्य की राजनीति में एक नया समीकरण पेश कर रहा है, खासकर मुस्लिम वोट बैंक को लेकर। ओवैसी ने इस गठबंधन को “स्वतंत्र मुस्लिम नेतृत्व” की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। उनका कहना है कि जिन क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय का स्वतंत्र राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं है, वहां सामाजिक और आर्थिक विकास के आंकड़े कमजोर हैं। उन्होंने इस गठबंधन को सिर्फ चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राजनीतिक मिशन बताया।
महिलाओं के लिए बड़ा चुनावी वादा
आम जनता उन्नयन पार्टी AJUP ने चुनावी मैदान में उतरते ही बड़ा दांव खेला है। हुमायूं कबीर ने महिलाओं को हर महीने ₹3500 देने का वादा किया है, जो ममता सरकार की ‘लक्ष्मीर भंडार’ योजना से दोगुना से भी ज्यादा है। ममता सरकार की इस योजना के तहत महिलाओं को ₹1000 से ₹1500 तक की सहायता मिलती है। कबीर ने इसे “अपर्याप्त” बताते हुए कहा कि उनकी सरकार बनने पर महिलाओं को ज्यादा आर्थिक सुरक्षा दी जाएगी। इस वादे के जरिए वह महिला मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।
सीट बंटवारा और चुनावी प्लान
गठबंधन ने सीटों को लेकर भी अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। AJUP ने 2026 के चुनाव में 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है, जिनमें से करीब 8 सीटें AIMIM को दी जाएंगी। यह कदम बताता है कि गठबंधन राज्य के बड़े हिस्से में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है। जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे—पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा 29 अप्रैल को। वहीं, मतगणना 4 मई को होगी।
सियासी समीकरण पर असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह नया गठबंधन तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए चुनौती बन सकता है। खासकर उन सीटों पर, जहां मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका में हैं, वहां आम जनता उन्नयन पार्टी -AIMIM गठबंधन समीकरण बिगाड़ सकता है। हालांकि, ममता बनर्जी की पार्टी अभी भी राज्य में मजबूत स्थिति में मानी जाती है। लेकिन इस तरह के आरोप और नए राजनीतिक प्रयोग चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना रहे हैं। पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 अब केवल विकास और योजनाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पहचान, धर्म और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे भी केंद्र में आ गए हैं। हुमायूं कबीर के आरोप, ओवैसी के साथ गठबंधन और बड़े आर्थिक वादों ने चुनावी माहौल को और ज्यादा तीखा बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया गठबंधन कितना असर डाल पाता है और क्या ममता बनर्जी इन चुनौतियों का जवाब अपनी रणनीति से दे पाती हैं या नहीं।





