पश्चिम एशिया युद्ध का असर, संकट में सोयाबीन किसान
मध्य प्रदेश में सोयाबीन उत्पादक किसान इस समय गहरे संकट से जूझ रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते समुद्री शिपिंग रूट्स प्रभावित हुए हैं, जिसका सीधा असर भारत के सोयाबीन निर्यात पर पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक मार्च में निर्यात करीब 50 प्रतिशत तक गिर गया है, जो फरवरी के लगभग 93 हजार टन से घटकर 40-50 हजार टन के बीच सिमट गया।
निर्यात में 50% गिरावट से बढ़ी चिंता
मंडियों में गिरे दाम, किसानों को नुकसान
मध्य प्रदेश, जिसे देश का ‘सोयाबीन का कटोरा’ कहा जाता है, यहां इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। प्रदेश में सोयाबीन की खेती का रकबा भी घटकर 58.72 लाख हेक्टेयर से 53.20 लाख हेक्टेयर रह गया है। हालांकि उत्पादन में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह 55.54 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा, लेकिन बाजार की स्थिति कमजोर होने से किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा।
वैश्विक स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा और निर्यात में आई गिरावट के कारण मंडियों में सोयाबीन की मांग कम हो गई है। व्यापारियों के अनुसार माल का उठाव धीमा हो गया है, जिससे कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है। किसान अपनी लागत तक निकालने में असमर्थ हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ रहा है।
भोपाल की करोंद मंडी सहित प्रदेश की अन्य मंडियों में किसानों की परेशानी साफ नजर आ रही है। कई किसान बताते हैं कि उन्होंने पहले 3,700 से 3,800 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर सोयाबीन बेचा था, लेकिन अब कीमतें और गिरने की आशंका है। ऐसे में छोटे और मध्यम किसानों के सामने परिवार चलाने तक की चुनौती खड़ी हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्द सामान्य नहीं होते, तो अप्रैल और आने वाले महीनों में निर्यात और भी गिर सकता है। इससे न केवल किसानों, बल्कि राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल किसान सरकार से समर्थन मूल्य पर खरीदी और राहत पैकेज की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि इस संकट से उबर सकें।





