सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि यह किसी आम के जूस बनाने वाली फैक्ट्री का है। वीडियो में कथित तौर पर आम के गूदे की प्रोसेसिंग बेहद अस्वच्छ माहौल में होती दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद बड़ी संख्या में सोशल मीडिया यूजर्स ने खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और मामले की जांच की मांग की है। हालांकि, अब तक इस वीडियो की लोकेशन, तारीख और दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए वीडियो में किए जा रहे दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती।
वीडियो में फर्श पर फैला दिखा पीला तरल, प्रोसेसिंग के तरीके पर उठे सवाल
वायरल वीडियो में दो महिलाएं किसी फैक्ट्री या प्रोसेसिंग यूनिट जैसी जगह पर काम करती दिखाई दे रही हैं। फर्श पर बड़ी मात्रा में पीले रंग का गाढ़ा तरल फैला हुआ नजर आता है, जिसे सोशल मीडिया पर आम का जूस या आम का पल्प बताया जा रहा है। वीडियो में एक महिला झुककर उसी तरल पदार्थ को उठाकर पास में लगी मशीन में डालती दिखाई देती है। इस दौरान एक हाथ में दस्ताना पहने होने और खुले पैरों से काम करने जैसी बातें भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के बाद FSSAI को टैग कर उठाई गई कार्रवाई की मांग
इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर @khurpenchh नाम के अकाउंट से साझा किया गया। पोस्ट में लोगों से पैक्ड आम का जूस खरीदने से बचने की अपील की गई और FSSAI को टैग करते हुए मामले की जांच की मांग की गई। वीडियो वायरल होने के बाद हजारों लोगों ने इसे शेयर किया और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता तथा स्वच्छता को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
यूजर्स ने जताई नाराजगी, कई लोगों ने जांच की मांग की
वीडियो देखने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने खाद्य सुरक्षा एजेंसियों से तत्काल जांच कराने की मांग की, जबकि कई लोगों ने बाजार में मिलने वाले पैक्ड जूस की गुणवत्ता पर चिंता जताई। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि वीडियो सही है तो उत्पादन प्रक्रिया के दौरान स्वच्छता मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया। वहीं कई यूजर्स ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं, आधिकारिक जानकारी का इंतजार
फिलहाल इस वीडियो को लेकर किसी सरकारी एजेंसी या संबंधित कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो किस स्थान का है और कब रिकॉर्ड किया गया था। ऐसे में वायरल वीडियो के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल आधिकारिक जांच रिपोर्ट के आधार पर ही किसी तरह का फैसला किया जाना चाहिए।
वायरल कंटेंट पर भरोसा करने से पहले तथ्य जांचना जरूरी
सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो कई बार अधूरी या भ्रामक जानकारी के साथ भी साझा किए जाते हैं। इसलिए किसी भी दावे को सही मानने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना जरूरी है। यदि संबंधित एजेंसियां जांच करती हैं, तो उसके बाद ही इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।





