उज्जैन में भव्य दीपोत्सव की रोशनी से खिले ग्रामीणों के चेहरे…मोहन सरकार का 50 लाख ग्रामीण परिवारों को बड़ा तोहफा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर महाकाल की नगरी उज्जैन में भव्य दीपोत्सव का आयोजन हुआ। महाकाल की नगरी के रामघाट, दत्त अखाड़ा और महाकाल महालोक में एक साथ 33 लाख 27 हजार 125 दीये जलाए गए। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में हुए आयोजन को ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, यूके’ में भी दर्ज किया गया है। इतना ही नहीं इस मौके पर ग्रामीण परिवारों के लिए भी बड़ी घोषणा की गई। अब मध्यप्रदेश की मोहन सरकार में स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश के 50 लाख से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को उनकी जमीन और मकान की मुफ्त रजिस्ट्री का लाभ दिया जा रहा है। इसके लिए स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस में पूरी छूट रहेगी। इससे ग्रामीणों को अपनी संपत्ति का कानूनी मालिकाना हक तो मिलेगा ही जमीन-मकान के दस्तावेज होने से बैंक से कर्ज लेना भी अब ग्रामीणों लिए आसान होगा साथ ही संपत्ति से जुड़े विवादों को कम करने में भी मदद मिलेगी।
महाकाल की नगरी में 33 लाख दीयों का उजाला
गांवों में 50 लाख परिवारों को मालिकाना हक
उज्जैन में दीपोत्सव का नया कीर्तिमान
स्वामित्व योजना का ग्रामीणों को मिला लाभ
ग्रामीण परिवारों को जमीन-मकान की मुफ्त रजिस्ट्री का तोहफा
मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर एक साथ 33 लाख 27 हजार 125 दीये जलाकर भव्य दीपोत्सव मनाया गया। शिप्रा नदी के रामघाट, दत्त अखाड़ा और श्री महाकाल महालोक में हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। दावा है कि इस आयोजन को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, यूके में दर्ज किया गया है। इस आयोजन की खास बात सिर्फ लाखों दीयों का जलना नहीं था। इसी मौके पर ग्रामीण परिवारों के लिए स्वामित्व योजना के तहत एक बड़ा फैसला भी सामने आया। प्रदेश के 50 लाख से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को उनकी जमीन और मकान का मालिकाना हक देने की प्रक्रिया के तहत मुफ्त रजिस्ट्री का लाभ दिया जा रहा है।
33 लाख दीयों से जगमगाया शिप्रा तट
उज्जैन में दीपोत्सव के दौरान शिप्रा नदी का तट लाखों दीयों की रोशनी से जगमगा उठा। रामघाट, दत्त अखाड़ा और महाकाल महालोक में एक साथ दीये जलाए गए। इस आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में उज्जैन के लोगों ने भी इसमें भाग लिया। इसका उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ उज्जैन की पहचान को एक बड़े सांस्कृतिक आयोजन के रूप में सामने लाना भी रहा।
50 लाख परिवारों को क्या मिला?
दीपोत्सव के साथ स्वामित्व योजना को लेकर भी बड़ा ऐलान हुआ। इसके तहत गांवों में रहने वाले ऐसे परिवारों को उनकी जमीन और मकान का कानूनी मालिकाना हक देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, जिनके पास अब तक जमीन का स्पष्ट दस्तावेज नहीं था। सबसे खास बात यह है कि इन परिवारों को रजिस्ट्री के लिए स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं देना होगा। इसका मतलब है कि जिस जमीन या मकान पर परिवार लंबे समय से रह रहा है, उसका सरकारी रिकॉर्ड में मालिकाना हक दर्ज हो सकेगा।
मालिकाना हक मिलने से क्या बदलेगा?
किसी जमीन या मकान का पक्का दस्तावेज होने के कई फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि परिवार अपनी संपत्ति को लेकर ज्यादा सुरक्षित महसूस कर सकता है। जमीन को लेकर विवाद होने पर सरकारी रिकॉर्ड में मालिकाना हक का प्रमाण मौजूद रहेगा। दूसरा फायदा बैंक से जुड़ा है। वैध दस्तावेज होने पर पात्र व्यक्ति अपनी संपत्ति के आधार पर बैंक से कर्ज लेने की प्रक्रिया में इसका इस्तेमाल कर सकता है। यानी स्वामित्व योजना सिर्फ कागज देने की योजना नहीं है। इसका मकसद ग्रामीण परिवार की संपत्ति को कानूनी पहचान और आर्थिक उपयोग देना भी है।
जमीन के झगड़े कम करने की कोशिश
गांवों में जमीन और मकान को लेकर विवाद लंबे समय से बड़ी समस्या रहे हैं। कई बार जमीन पर परिवार का कब्जा होता है, लेकिन उसके पास स्पष्ट दस्तावेज नहीं होते। ऐसी स्थिति में पीढ़ियों तक विवाद चलते रहते हैं। स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति का सर्वे और रिकॉर्ड तैयार होने से ऐसे विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि किसी भी योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि रिकॉर्ड कितना सही तैयार होता है और जमीन से जुड़े पुराने विवादों का समाधान कैसे किया जाता है।
दीपोत्सव और सुशासन का संदेश
उज्जैन के इस आयोजन को दो स्तरों पर देखा जा सकता है। एक तरफ 33 लाख से ज्यादा दीयों का दीपोत्सव, जो धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन का प्रतीक बना। दूसरी तरफ 50 लाख से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को संपत्ति का अधिकार, जो प्रशासनिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा फैसला है। यानी एक ही आयोजन में धार्मिक आस्था, जनभागीदारी और सरकारी योजना को जोड़ने की कोशिश दिखाई दी। उज्जैन में शिप्रा तट पर लाखों दीयों की रोशनी ने जहां शहर को जगमगाया, वहीं स्वामित्व योजना ग्रामीण परिवारों के लिए जमीन और मकान के अधिकार को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बनकर सामने आई। एक तरफ दीपों का रिकॉर्ड बना, तो दूसरी तरफ लाखों परिवारों के लिए उनकी संपत्ति को सरकारी रिकॉर्ड में पहचान देने का काम आगे बढ़ा।