Vijay का राजनीतिक सफर अब तमिलनाडु की राजनीति का सबसे बड़ा ड्रामा बन चुका है। फिल्मों के सुपरस्टार से सत्ता के केंद्र तक पहुंचने वाले विजय पहली ही चुनावी पारी में मुख्यमंत्री बनने के बेहद करीब पहुंच गए थे, लेकिन आखिरी समय में सहयोगी दलों के रुख बदलने से उनकी राह मुश्किलों में फंस गई। अब स्थिति ऐसी बन गई है कि सरकार गठन का सपना अधर में लटक गया है और तमिलनाडु की राजनीति में जबरदस्त सस्पेंस बना हुआ है।
पहली बार चुनाव लड़कर सत्ता के दरवाजे तक पहुंचे विजय ने सबको चौंका दिया
दो साल पहले अपनी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam बनाने वाले विजय को शुरुआत में राजनीतिक तौर पर गंभीरता से नहीं लिया गया था। लेकिन विधानसभा चुनाव नतीजों ने पूरा खेल बदल दिया। उनकी पार्टी 118 के बहुमत आंकड़े से सिर्फ दो सीट दूर पहुंच गई।
तमिलनाडु की राजनीति में यह प्रदर्शन किसी बड़े राजनीतिक भूचाल से कम नहीं माना जा रहा। विजय अब उन दिग्गजों की सूची में शामिल होने के करीब पहुंच गए हैं जिन्होंने सिनेमा से सीधे सत्ता तक का सफर तय किया, जैसे M. G. Ramachandran, J. Jayalalithaa, C. N. Annadurai और M. Karunanidhi।
सरकार बनाने के लिए शुरू हुआ सहयोगियों को जोड़ने का बड़ा सियासी खेल
बहुमत से दूर रहने के बाद विजय ने छोटे दलों और सहयोगी पार्टियों से समर्थन जुटाने की कोशिश शुरू की। कांग्रेस पहले ही समर्थन दे चुकी थी। इसके बाद टीवीके ने वाम दलों, वीसीके और अन्य क्षेत्रीय दलों से बातचीत तेज कर दी।
बताया गया कि CPI और CPM ने समर्थन देने को लेकर सकारात्मक संकेत दिए। वहीं Viduthalai Chiruthaigal Katchi यानी वीसीके की भूमिका सबसे अहम बन गई। पार्टी के दो विधायक विजय को बहुमत दिला सकते थे।
लेकिन इसी बीच मांगों और शर्तों का दौर शुरू हो गया। खबरें सामने आईं कि वीसीके ने पहले कैबिनेट में जगह मांगी और बाद में डिप्टी सीएम पद की मांग भी रख दी। तमिलनाडु की राजनीति में अचानक नए समीकरण बनने लगे।
राज्यपाल के सामने बहुमत साबित करने की कोशिश में फंसा मामला
विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राज्यपाल R. V. Arlekar से मुलाकात की। लेकिन यहां भी मामला आसानी से आगे नहीं बढ़ा। सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ने साफ कहा कि केवल दावों से काम नहीं चलेगा, 118 विधायकों के समर्थन पत्र दिखाने होंगे।
विजय लगातार यह भरोसा दिलाते रहे कि वे विधानसभा में बहुमत साबित कर देंगे। लेकिन समर्थन देने वाले दलों का रुख बार-बार बदलने से स्थिति और उलझती चली गई।
एक समय ऐसा लगा कि वीसीके, कांग्रेस और वाम दलों के समर्थन से विजय के पास 119 विधायकों का आंकड़ा पहुंच गया है और सरकार बनना तय है। इसी भरोसे के साथ विजय दोबारा राज्यपाल से मिलने पहुंचे।
आखिरी वक्त में IUML और AMMK के पीछे हटने से बिगड़ा पूरा खेल
सियासी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब Indian Union Muslim League और Amma Makkal Munnetra Kazhagam ने समर्थन से दूरी बना ली। इन दोनों दलों की तीन सीटें विजय के लिए बेहद अहम थीं।
इसके बाद वीसीके का रुख भी पूरी तरह साफ नहीं रहा। कभी समर्थन की बात हुई तो कभी शर्तें सामने आने लगीं। इस पूरे घटनाक्रम ने विजय की सरकार बनाने की कोशिशों को बड़ा झटका दे दिया।
राजनीतिक गलियारों में अब चर्चा इस बात की है कि क्या विजय बहुमत साबित कर पाएंगे या तमिलनाडु फिर से नए चुनाव की ओर बढ़ेगा।
विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से पहले सरकार गठन की बढ़ी चुनौती
तमिलनाडु विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में नई सरकार का गठन समय रहते नहीं हुआ तो राज्य में संवैधानिक संकट की स्थिति बन सकती है। ऐसी हालत में राज्यपाल को नए चुनाव कराने की सिफारिश करनी पड़ सकती है।
विजय की पार्टी के लिए यह सबसे बड़ा राजनीतिक इम्तिहान बन चुका है। चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बावजूद सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने के लिए अब उन्हें आखिरी दौर की सियासी लड़ाई जीतनी होगी। पूरे देश की नजर फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति पर टिकी हुई है, जहां हर घंटे समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं।





