लखनऊ। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश ने सामाजिक विकास के कई महत्वपूर्ण मानकों पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में स्वास्थ्य, पोषण, परिवार नियोजन, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में हुए सुधारों ने राज्य को सामाजिक विकास के नए आयाम तक पहुंचाया है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले आठ वर्षों में प्रदेश ने कई प्रमुख सूचकांकों पर रिकॉर्ड सुधार दर्ज किया है।
सामाजिक विकास के पैमानों पर यूपी ने दर्ज की उल्लेखनीय प्रगति
प्रजनन दर घटकर 2.2, परिवार नियोजन को मिली सफलता
स्वास्थ्य बीमा और संस्थागत प्रसव में बड़ा इजाफा
कुपोषण में कमी, टीकाकरण कवरेज में तेज वृद्धि
महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मिली नई मजबूती
रिपोर्ट बताती है कि बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता में भी बड़ा बदलाव आया है। वर्ष 2015-16 में जहां केवल 71 प्रतिशत घरों तक बिजली पहुंची थी, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 95.8 प्रतिशत हो गया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजनाओं के प्रभाव से स्वास्थ्य बीमा कवरेज 6.1 प्रतिशत से बढ़कर 37.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता 97.9 प्रतिशत दर्ज की गई है।
जनसंख्या स्थिरीकरण और परिवार नियोजन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.74 से घटकर 2.2 पर पहुंच गई है, जो राष्ट्रीय जनसंख्या स्थिरीकरण लक्ष्यों के अनुरूप मानी जा रही है। आधुनिक परिवार नियोजन साधनों का उपयोग करने वाली विवाहित महिलाओं का प्रतिशत 45.5 से बढ़कर 63.8 हो गया है। किशोरावस्था में गर्भधारण के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है, जो जागरूकता अभियानों की सफलता को दर्शाता है।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव सामने आए हैं। संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 67.8 से बढ़कर 85 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिला है। पहली तिमाही में प्रसव पूर्व जांच कराने वाली गर्भवती महिलाओं की संख्या में भी वृद्धि हुई है। वहीं 12 से 23 माह आयु वर्ग के बच्चों का पूर्ण टीकाकरण 51.1 प्रतिशत से बढ़कर 81.4 प्रतिशत हो गया है, जो बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
कुपोषण के खिलाफ चलाए गए अभियानों का असर भी स्पष्ट दिखाई देता है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान और आंगनबाड़ी सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के परिणामस्वरूप बच्चों में बौनापन (स्टंटिंग) 46.2 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत रह गया है। कम वजन वाले बच्चों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है, जो पोषण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में रिपोर्ट ने सबसे अधिक उत्साहजनक तस्वीर प्रस्तुत की है। स्वयं संचालित बैंक खाते रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 27.7 से बढ़कर 83.5 प्रतिशत हो गया है। जनधन योजना, स्वयं सहायता समूहों और मिशन शक्ति जैसे कार्यक्रमों ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही 10 वर्ष या उससे अधिक की स्कूली शिक्षा प्राप्त करने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़ी है।
महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक स्थिति में भी सुधार दर्ज किया गया है। घरेलू या यौन हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 34.4 से घटकर 28.5 हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, जागरूकता और महिला सुरक्षा से जुड़े सरकारी प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव इस बदलाव के रूप में सामने आया है।
NFHS-6 की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश ने केवल आर्थिक और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि सामाजिक विकास के मोर्चे पर भी मजबूत प्रगति की है। स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों के परिणाम अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगे हैं, जिससे प्रदेश की सामाजिक तस्वीर तेजी से बदलती नजर आ रही है।





